6 तब अधिकारी न उन्ख जाय क पकड़्यो, अऊर असीच बाते उन्को सी कही। 7 उन्न अधिकारी सी कह्यो, “हे हमरो स्वामी, तय असी बाते कहाली कह्य रह्यो हय? हम कसम खाजे हय कि हम न असो काम करयो हय कि तोरो दासों सी दूर रहे। 8 देख, जो रुपया हमरो बोरा को मुंह को ऊपर निकल्यो होतो, जब हम न ओख कनान देश सी लाय क तोख वापस कर दियो, तब कहाली, हम तोरो स्वामी को घर म सी कोयी चांदी या सोनो की चिज कसो चुराय सकजे हंय? 9 हे स्वामी, तोरो दासों म सी जो कोयी को जवर ऊ निकले, त ऊ मार डाल्यो जाये, अऊर हम भी ऊ स्वामी को दास होय जाबो।”
10 घर को अधिकारी न कह्यो, “तुम्हरोच कहनो सही हय, जेको जवर कटोरा निकले ऊ मोरो दास होयेंन, अऊर तुम लोग निर्दोष ठहरो।” 11 यो बात पर हर एक आदमी अपनो अपनो बोरा ख जमीन पर जल्दी रख क उन्ख खोलन लग्यो। 12 तब यूसुफ को घर को अधिकारी ढूंढन लग्यो, अऊर बड़ो भाऊ को बोरा सी ले क छोटो भाऊ को बोरा तक ढूंढ्यो; अऊर कटोरा बिन्यामीन को बोरा म मिल्यो। 13 तब भाऊवों न अपनो अपनो दु:ख म कपड़ा फाड़्यो, अऊर अपनो अपनो गधा पर सामान रख क नगर ख लौट गयो।
14 जब यहूदा अऊर ओको भाऊ यूसुफ को घर पर पहुंच्यो, त यूसुफ वहांच होतो, तब हि ओको आगु जमीन पर गिरयो। 15 यूसुफ न उन्को सी कह्यो, “तुम लोगों न यो कसो काम करयो हय? का तुम नहीं जानत होतो, कि मोरो जसो आदमी लूकी हुयी बातों ख भी कर सकय हय?”
16 यहूदा न कह्यो, “हम लोग अपनो स्वामी सी का कह्यबो? हम का कह्य क अपनो ख निर्दोष ठहराबो? परमेश्वर न तोरो दासों को अधर्म ख पकड़ लियो हय। हम, अऊर जेको जवर कटोरा निकल्यो ऊ भी, हम सब को सब अपनो स्वामी को दासच हंय।”
17 “यूसुफ न कह्यो असो काम मोरो सी दूरच रहे, जेको जवर कटोरा निकल्यो हय उच मोरो दास होयेंन; अऊर तुम लोग अपनो बाप को जवर अच्छो सी चली जावो।”
24 “येकोलायी जब हम अपनो बाप अऊर तोरो दास को जवर गयो, तब हम न ओको सी अपनो स्वामी की बाते कही। 25 तब हमरो बाप न कह्यो, ‘फिर जाय क हमरो लायी थोड़ी सी खान की चिज लेय क लावो।’ 26 हम न कह्यो, ‘हम नहीं जाय सकजे, हव, यदि हमरो छोटो भाऊ हमरो संग रहे, तब हम जाबो; यदि हमरो छोटो भाऊ हमरो संग नहीं रहेंन, त हम ऊ आदमी को जवर नहीं जाय सकजे।’ 27 तब तोरो दास अऊर हमरो बाप न हम सी कह्यो, ‘तुम त जानय हय कि मोरी बाई राहेल सी दोय टुरा पैदा भयो। 28 अऊर उन म सी एक त मोख छोड़ क चली गयो, अऊर मय न निश्चय कर लियो कि ऊ कोयी जनावर को वजह टुकड़ा टुकड़ा कर दियो गयो होना, अऊर तब सी मय ओको मुंह भी नहीं देख सक्यो। 29 यदि तुम येख भी मोरी आंखी को आगु सी ले जावो, अऊर कोयी संकट येको पर पड़े, त तुम्हरो वजह म यो बुढ़ापा को समय म दु:ख को संग अधोलोक म उतर जाऊं।’
30 “येकोलायी जब मय अपनो बाप अऊर तोरो दास को जवर पहुंचू अऊर यो लड़का संग म नहीं रहेंन, त ओको जीव त येकोच पर अटक्यो रहेंन, 31 तब ऊ देखेंन कि लड़का नहाय त ऊ तुरतच मर जायेंन। तब तोरो दासों को वजह तोरो दास अऊर हमरो बाप, जो बुढ़ापा को समय म, दु:ख को संग अधोलोक म उतर जायेंन। 32 मय तोरो दास अपनो बाप को इत यो कह्य क् लड़का लायी अपनो जीवन गिरवी रख्यो हय, यदि मय येख तोरो जवर नहीं पहुंचाय देऊ, त मय हमेशा लायी तोरो अपराधी ठहरूं। 33 येकोलायी अब तोरो दास यो लड़का को बदला अपनो स्वामी को दास होय क रहन की आज्ञा पाये, अऊर यो लड़का ख अपनो भाऊवों को संग जान दियो जाये। 34 यदि लड़का मोरो संग नहीं हो त मय कसो अपनो बाप को जवर जाय सकूं; कही असो नहीं होय कि मोरो बाप पर जो दु:ख पड़ेंन ओख मोख देखनो पड़े।”
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