2 इसहाक न कह्यो, “सुन, मय त बूढ्ढा भय गयो हय, अऊर मय नहीं जानु हय कि मोरो मरन को दिन कब आयेंन 3 येकोलायी अब तय अपनो धनुष बान ले क जंगल म जा, अऊर मोरो लायी शिकार कर क् लाव 4 ओको बाद तय मोरी इच्छा को अनुसार स्वादिष्ट खाना बनाय क मोरो जवर ले आजो, कि मय ओख खाय क मरन सी पहिले तोख जी भर क आशीर्वाद देऊं।”
5 तब एसाव शिकार करन ख जंगल म गयो। जब इसहाक एसाव सी यो बात कह्य रह्यो होतो, तब रिबका भी सुन रही होती। 6 येकोलायी रिबका न अपनो बेटा याकूब सी कह्यो, “सुन, मय न तोरो बाप ख तोरो भाऊ एसाव सी यो कहतो सुन्यो हय, 7 ‘तय मोरो लायी शिकार कर क् ओको स्वादिष्ट खाना बनाव, कि मय ओख खाय क तोख परमेश्वर को आगु मरन सी पहिले आशीर्वाद देऊं।’ 8 येकोलायी अब, रिबका न कह्यो हे मोरो बेटा, मोरी सुन, जसी मय तोरो सी कहू हय, वसोच कर, 9 तय शेरियों को जवर जाय क शेरी को दोय अच्छो अच्छो बच्चा ले आव; अऊर मय तोरो बाप लायी ओकी इच्छा को अनुसार उन्को मांस को स्वादिष्ट खाना बनाऊं। 10 तब तय ओख अपनो बाप को जवर ले जाजो, कि ऊ ओख खाय क मरन सी पहिले तोख आशीर्वाद दे।”
11 याकूब न अपनी माय रिबका सी कह्यो, “सुन, मोरो भाऊ एसाव को शरीर म बहुत बाल हय, लेकिन मोरो शरीर म नहाय। 12 कभी मोरो बाप मोख छुयेंन, तब मय ओकी नजर म धोका देन वालो ठहरूं; अऊर आशीष को बदला अपनो ऊपर श्राप लाऊं।”
13 ओकी माय न ओको सी कह्यो, “हे मोरो बेटा, श्राप तोरो पर नहीं मोरोच पर आयेंन, तय केवल मोरी सुन, अऊर जाय क शेरी को बच्चां मोरो जवर ले आव।” 14 तब याकूब जाय क शेरी को बच्चां अपनी माय को जवर ले आयो, अऊर ओकी माय न ओको बाप की इच्छा को अनुसार स्वादिष्ट खाना बनाय दियो। 15 तब रिबका न अपनो बड़ो बेटा एसाव को सब सी अच्छो कपड़ा, जो ओको जवर घर म होतो, उन्ख ले क अपनो छोटो बेटा याकूब ख पहिनाय दियो; 16 अऊर ओन शेरियों को बच्चा को चमड़ा ख ओको हाथों पर अऊर गर्दन पर लपेट दियो। 17 अऊर ऊ स्वादिष्ट खाना अऊर अपनी बनायी हुयी रोटी भी अपनो बेटा याकूब को हाथ म दे दी।
18 तब याकूब अपनो बाप को जवर गयो, अऊर कह्यो, “हे मोरो बाप,”
19 याकूब न अपनो बाप सी कह्यो, “मय तोरो बड़ो बेटा एसाव आय। मय न तोरी आज्ञा को अनुसार करयो हय; येकोलायी उठ अऊर बैठ क मोरो शिकार को मांस म सी खा ले, ताकि तय मोख दिल सी आशीर्वाद दे सके।”
20 इसहाक न अपनो बेटा सी कह्यो, “हे मोरो बेटा, का वजह हय कि शिकार तोख इतनो जल्दी मिल गयो?”
21 तब इसहाक न याकूब सी कह्यो, “हे मोरो बेटा, जवर आव, मय तोख छुय क जान सकू कि तय सचमुच मोरो बेटा एसाव आय का नहीं।” 22 तब याकूब अपनो बाप इसहाक को जवर गयो, अऊर इसहाक न ओख छुय क कह्यो, “तोरी आवाज त याकूब को जसी हय, पर तोरो हाथ त एसाव को हाथ जसो लगय हंय।” 23 यो तरह इसहाक न ओख नहीं पहिचान्यो, कहालीकि ओको हाथ ओको भाऊ एसाव को जसो बाल वालो होतो; येकोलायी इसहाक न ओख आशीर्वाद दियो। 24 अऊर इसहाक न पुच्छ्यो, “का तय सचमुच मोरो बेटा एसाव आय?” याकूब न कह्यो,
25 तब इसहाक न कह्यो, “खाना ख मोरो जवर ले आव, कि मय अपनो बेटा को शिकार को मांस म सी खाय क, तोख दिल सी आशीर्वाद देऊ।” तब याकूब न अपनो बाप को जवर खाना लायो, अऊर ओन खायो; अऊर ऊ अंगूरीरस रस भी लायो, अऊर ओन पियो। 26 तब ओको बाप इसहाक न ओको सी कह्यो, “हे मोरो बेटा, जवर आय क मोख चुम्मा दे।” 27 ओन जवर जाय क इसहाक ख चुम्मा दियो; अऊर इसहाक न ओको कपड़ा की सुगन्ध सूंघ क ओख यो आशीर्वाद दियो, “देख, मोरो बेटा की सुगन्ध ऊ खेत को जसो हय जेक परमेश्वर न आशीर्वाद दियो हय; 28 परमेश्वर तोख आसमान सी ओस, अऊर जमीन की अच्छी सी अच्छी उपज, अऊर बहुत सो अनाज अऊर नयो अंगूरीरस रस देन। 29 [a]राज्य राज्य को लोग तोरी सेवा करेंन, अऊर हर एक जाती को लोग तोरो आगु झुकेंन। तय अपनो रिश्तेदारों को ऊपर शासन कर सकय हय, अऊर तोरी माय को बेटा तोरो आगु झुकेंन। जो तोख श्राप देन ऊ खुदच श्रापित होयेंन, अऊर जो तोख आशीर्वाद देन ऊ खुद आशीष पायेंन।”
32 ओको बाप इसहाक न पुच्छ्यो, “तय कौन आय?”
33 तब इसहाक पूरो तरह सी थरथर कांपन लग्यो, अऊर ओन पुच्छ्यो, “ऊ कौन होतो जो शिकार कर क् मोरो जवर ले आयो होतो, अऊर मय न तोरो आवन सी पहिले सब म सी कुछ कुछ खाय लियो अऊर ओख आशीर्वाद दियो? अब उच आशीर्वाद हमेशा ओको पर बन्यो रहेंन।”
34 जब एसाव न अपनो बाप इसहाक की यो बाते सुनी, तब ऊ जोर सी चिल्लायो अऊर फूट फूट क रोवन लग्यो अऊर अपनो बाप सी कह्यो, “हे मोरो बाप, मोख भी अपनो आशीर्वाद दे!”
35 इसहाक न उत्तर दियो, “तोरो भाऊ आयो अऊर मोख धोका दियो, अऊर ऊ तोरो आशीर्वाद छीन क चली गयो।”
36 एसाव न कह्यो, “ओको नाम याकूब ठीकच रख्यो गयो होतो। ओन मोख दोय बार धोका दियो हय। पहिले त ओन मोरो बड़ो बेटा होन को अधिकार ले लियो; अऊर अब मोरो आशीर्वाद भी छीन लियो हय।” तब एसाव न कह्यो, “का तय न मोरो लायी कोयी आशीर्वाद नहीं बचाय क रख्यो?”
37 इसहाक न एसाव ख उत्तर दे क कह्यो, “सुन, मय न ओख तोरो स्वामी बनाय दियो हय, अऊर ओको सब रिश्तेदारों ख ओको दास बनाय क ओख सौंप दियो हय, अऊर मय न अनाज अऊर अंगूर को रस दे क ओख भरपूर आशीष दियो हय। येकोलायी अब, हे मोरो बेटा, मय तोरो लायी का करूं?”
38 [b]एसाव न अपनो बाप सी कह्यो, “हे मोरो बाप, का तोरो मन म केवल एकच आशीर्वाद हय? हे मोरो बाप, मोख भी आशीर्वाद दे।” यो कह्य क एसाव फूट फूट क रोवन लग्यो।
39 तब ओको बाप इसहाक न ओको सी कह्यो,
41 एसाव याकूब सी नफरत करत होतो, कहालीकि ओको बाप न याकूब ख आशीर्वाद दियो होतो; अऊर एसाव न सोच्यो, “मोरो बाप की मृत्यु को शोक मनान को दिन जवर हय, तब मय अपनो भाऊ याकूब ख मार डालूं।”
42 जब रिबका ख ओको बड़ो बेटा एसाव की यो बात बतायी गयी, तब ओन अपनो छोटो बेटा याकूब ख बुलाय क कह्यो, “सुन, तोरो भाऊ एसाव तोख मारन लायी अपनो मन म धीरज रख्यो हुयो हय। 43 येकोलायी अब, हे मोरो बेटा, मोरी सुन, अऊर हारान नगर ख मोरो भाऊ लाबान को जवर भग जा; 44 अऊर थोड़ो दिन तक, यानेकि जब तक तोरो भाऊ को गुस्सा शान्त नहीं होय जाय, तब तक ओकोच जवर रह्यजो। 45 फिर जब तोरो भाऊ को गुस्सा तोरो पर सी शान्त होय जायेंन, अऊर जो काम तय न ओको संग करयो हय ओख ऊ भूल जायेंन; तब मय दास भेज क तोख वहां सी बुलाय लेऊं। तब असो कहाली हो कि एकच दिन म मोख तुम दोयी बेटावों सी वंचित होनो पड़े?”
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