6 येकोलायी इसहाक गरार नगर म रह्य गयो। 7 [b]जब ऊ जागा को लोगों न ओकी पत्नी रिबका को बारे म पुच्छ्यो, तब इसहाक न यो सोच क कि यदि मय ओख अपनी पत्नी कहूं, त इत को लोग रिबका को वजह जो बहुत सुन्दर हय, मोख मार डालेंन, इसहाक न उत्तर दियो, “वा त मोरी बहिन आय।” 8 जब इसहाक ख उत रह्यतो हुयो बहुत समय बीत गयो, तब एक दिन पलिश्तियों को राजा अबीमेलेक न खिड़की म सी झांक क देख्यो कि इसहाक अपनी पत्नी रिबका को संग प्रेम कर रह्यो हय। 9 तब अबीमेलेक न इसहाक ख बुलाय क कह्यो, “वा बाई त निश्चय तोरी पत्नी हय; तब तय न कहाली ओख अपनी बहिन कह्यो?”
10 अबीमेलेक न कह्यो, “तय न हमरो सी यो का करयो? असो त मोरी प्रजा को कोयी भी आदमी तोरी पत्नी को संग सोय सकत होतो, अऊर तय हम्ख पाप म फसातो।” 11 येकोलायी अबीमेलेक न अपनी पूरी प्रजा ख आज्ञा दी, “जो कोयी ऊ आदमी ख यां वा बाई ख छुयेंन, ऊ निश्चय मार दियो जायेंन।”
12 तब इसहाक न ऊ देश म जमीन पर अनाज बोयो, अऊर उच साल म सौ गुना फसल हासिल करी; अऊर परमेश्वर न ओख आशीष दी। 13 अऊर ऊ धनी भय गयो, ओकी उन्नति होती गयी, अऊर ऊ बहुत धनवान आदमी भय गयो। 14 जब ओको शेरी-मेंढी, गाय-बईल, अऊर दास-दासियां भयी, तब पलिश्ती ओको सी जलन करन लग्यो। 15 जिन कुंवा ख इसहाक को बाप अब्राहम को दासों न अब्राहम को जीतो जी खोद्यो होतो, उन्ख पलिश्ती जाति को लोग न माटी सी बुझाय क बन्द कर दियो।
16 तब अबीमेलेक न इसहाक सी कह्यो, “हमरो जवर सी चली जा; कहालीकि तय हमरो सी बहुत सामर्थी भय गयो हय।” 17 येकोलायी इसहाक उत सी चली गयो, अऊर गरार नगर की घाटी म अपनो तम्बू खड़ो कर क् रहन लग्यो। 18 तब जो कुंवा ओको बाप अब्राहम को दिनों म खोद्यो गयो होतो, अऊर अब्राहम को मरन को बाद पलिश्तियों न कुंवा ख बुझाय दियो होतो, तब इसहाक न हि कुंवा ख फिर सी खुदवायो; अऊर उन्को उच नाम रख्यो, जो ओको बाप न रख्यो होतो।
19 तब इसहाक को दासों जो घाटी म कुंवा खोदतो खोदतो एक झरना मिल्यो। 20 तब गरार को चरवाहों न इसहाक को चरवाहों सी झगड़ा करयो, अऊर कह्यो, “यो पानी हमरो आय।” येकोलायी इसहाक न ऊ कुंवा को नाम एसेक रख्यो; कहालीकि हि इसहाक सी झगड़ा करत होतो।
21 तब इसहाक को दासों न दूसरो कुंवा खोद्यो; अऊर उन्न ओको लायी भी झगड़ा करयो, येकोलायी इसहाक न उन्ख सित्ना[c] को नाम दियो। 22 तब इसहाक न उत सी निकल क एक अऊर कुंवा खुदवायो; अऊर ओको लायी उन्न झगड़ा नहीं करयो; येकोलायी इसहाक न ओको नाम यो कह्य क स्वतंत्रता[d] रख्यो। इसहाक न कह्यो, “अब त परमेश्वर न हमरो लायी बहुत जागा दियो हय, अऊर हम यो देश म सफल होयबो।”
23 उत सी ऊ बेर्शेबा ख गयो। 24 अऊर उच दिन परमेश्वर न रात ख ओख दर्शन दे क कह्यो, “मय तोरो बाप अब्राहम को परमेश्वर आय; मत डर, कहालीकि मय तोरो संग हय, अऊर अपनो दास अब्राहम को वजह तोख आशीष देऊं, अऊर तोरो वंश बढ़ाऊं।” 25 तब इसहाक न वहां एक वेदी बनायी, अऊर परमेश्वर सी आराधना करी, अऊर अपनो तम्बू वहांच खड़ो करयो; अऊर वहां इसहाक को दासों न एक कुंवा खोद्यो।
28 उन्न कह्यो, “हम्न त साफ देख्यो हय, कि यहोवा तोरो संग रह्य हय; येकोलायी हम्न सोच्यो, कि तय त यहोवा को तरफ सी धन्य हय, येकोलायी हमरो अऊर तोरो बीच म कसम खायी जाये, अऊर हम तोरो सी यो चाहजे हय कि तय वादा करे; 29 कि जसो हम्न तोख नहीं छूयो, अऊर तोरो संग केवल भलायीच करी हय, अऊर तोख शान्ति सी बिदा करयो, ओको अनुसार तय भी हम सी कोयी बुरो व्यवहार मत करजो अब तुम परमेश्वर की आशीष पायो हुयो आदमी हय।” 30 तब इसहाक न उन्को लायी विशेष भोजन तैयार करयो, अऊर उन्न खायो पियो। 31 तब हि भुन्सारे जल्दी उठ क आपस म कसम खायी; तब इसहाक न उन्ख बिदा करयो, अऊर हि खुशी सी ओको जवर सी चली गयो।
32 उच दिन इसहाक को दासों न आय क अपनो ऊ खोद्यो हुयो कुंवा को बारे म इसहाक ख बतायो, “हम्ख पानी को एक सोता मिल गयो हय।” 33 तब इसहाक न कुंवा को नाम शिबा[f] रख्यो; योच वजह अज तक ऊ नगर को नाम बेर्शेबा[g] पड़्यो हय।
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