4 फिर मोखा स्वर्ग म से एक अऊर सब्द असो कैहते सुनाई दियो,
9 “जमीन को राजा जिनना ओको संग म गलत काम[c] करियो अर सुक चैन से रया, जब ओको जलन को धुवा देखेगो, ते ओको लाने रोयगो अऊर छाती ठोकेगो 10 ओको दुख को दरद को डर मारे वी बड़ी दूर खड़ा हो ख कहेगो, अरे बड़ो सहर बेबीलोन! अरे मजबुत सहर, धितकार! धितकार! घड़ी भर म ही तोखा सजा मिल गयो हैं।”
11 “जमीन ख बैपारी ओको लाने रोयगो अर बिलकेंगो, काहेकि अब कोई उनको माल मोल नी लेन को।” 12 एकोमतलब सोना, चाँदी, रत्न मोती, अर मलमल, अर बैजनी, रेसमी, अऊर लाल रंग को कपड़ा, अर हर तरीका को महकन वालो काठ, अर हाथी को दाँत कि हर तरीका कि चीज, अर बड़ा महेगा काठ अर पीतर अर लोहा अर संगमरमर कि सब तरीका कि चीज, 13 अर दालचीनी, मसाला हुन, धूप, इतर, लोबान, दारू, तेल, मैदा, गहूँ, गाय-बईल, भेड़-बकरी हुन, घोड़ा हुन अर घोड़ा गाडी, अर सवारी, अर अदमी हुन कि जान। 14 अब तोरा मन को मुताबित फल तोरो जोने से जाता रया, अर चोक्खो सुवाद वाली अर चमकदार चीज तोरो जोने से दुर हो गई, अऊर वी फिर कभी नी मिलन की। 15 असी चीज हुन ख बैपारी जो उनको संग म धनी हो गया रहा, ओको दुख को डर को मारे दूर खड़ा रहेगो, अऊर रोते अर किलपते हुए कहेगो, 16 धितकार! धितकार! यू बड़ो सहर जो मखमल[d], अर बैंजनी अर लाल रंग को कपड़ा पहिन ख हतो।
20 अरे स्वर्ग, अऊर अरे सुध्द अदमी हुन, अर प्रेरित सिखान वाला [h]हुन अर भविस्यवक्ता हुन, ओपर आनन्द मनाव, “काहेकि परमेस्वर न न्याय कर ख ओसे तुमरो बदला लियो हैं।”
21 फिर एक ताकतवर स्वर्ग दूत न बड़ी चक्की को पाट को समान एक पत्थर उठायो, अर असो बोल ख समुंदर म फेक दियो, बड़ो सहर बेबीलोन असो ही बड़ी ताकत से गिड़ायो जाहेगो, अऊर फिर कभी ओको पता नी चलन को। 22 वीणा बजान वाला हुन, अर गायक हुन, अर बाँसुरी बजान वाला, अर तुरई फूँकन वालो को सब्द फिर कभी तोरो म सुनाई नी देन को; अर कोई उधम को कारीगर भी फिर कभी तोरो म नी मिलन को; अर चक्की को चलन को सब्द फिर कभी तोरो म सुनाई नी देन को; 23 अर दिया को उजेरा फिर कभी तोरो म नी चमकन को, अर दूला अर दुलन को सब्द फिर कभी तुरो म सुनाई नी देन को; काहेकि तोरा बैपारी जमीन ख राजा[i] हता, अर तोरो टोना से सब जाती हुन भरमाई गई हती।
24 भविस्यवक्ता हुन अर सुध्द अदमी हुन, “अर जमीन पा सबरा मरिया-काटीया वाला हुन को खून ओमा ही मिला हैं।”
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