6 तब यीसु न उनसे कय्हो, “मोरो लाने सही बखत अबा लक नी आयो हैं। पर तुम्हारो लाने कोई भी बखत सही हैं। 7 दुनिया तुम से घुस्सा नी कर सका, पर उ मोसे घुस्सा करा हैं काहेकि मी ओको बारे म या गवाई देऊ हैं कि ओखा काम बुरा हैं। 8 तुम तिहार म जाव; मी अभी यू तिहार म नी जाऊ हैं, काहेकि अबा लक मोरो बखत सही बखत पूरो नी आयो हैं।” 9 असो बोल ख यीसु गलील परदेस म ही रैय गयो।
12 भीड़ म यीसु को बारे म खुब चाली-चुगली होवत रहा। “उ एक अच्छो अदमी हैं, कुछ इंसान हुन न बोल्यो। नी, दुसरा न बोल्यो, उ इंसान हुन ख बेकुप बनावा हैं।” 13 लेकिन कोई न भी यीसु को बारे म खुल ख बात नी करी काहेकि वी यहूदी अधिकारी हुन से डरत हता।
16 यीसु न जवाब दियो, जो मी सिखऊँ हैं उ मोरो खुद को ग्यान नी हाय, बल्कि यू परमेस्वर कि तरफ से आय, जेना मोखा भेज्यो हैं। 17 जे कोइ भी असो करन ख तैयार हैं जो परमेस्वर चाहवा हैं ओखा पता चल जाहे कि मी जो सिखऊँ हैं उ परमेस्वर से आवा हैं या नी या मी खुद अपनो अधिकार पा बोलू हैं। 18 जो इंसान अपनो हक पर बोला हैं, वी अपनो लाने बड़ाई हासिल करन की सोच रया हैं। लेकिन उ जो ओको लाने बड़ाई चाहवा हैं जेना ओखा भेज्यो हैं उ सच्चो हैं, अऊर येमा कई भी अधर्म नी हाय। 19 मूसा न तुम ख नेम दियो, का ओ ना नी दियो? तेभी तुम म से कोई नियम को पालन नी करत आय। तुम मोखा मारन की कोसिस काहे कर रया हैं?
20 इंसान हुन न जवाब दियो, “तोरो म भूत की आत्मा हैं! कोन तोखा मार ड़ालनो चाहवा हैं?”
21 यीसु न उनका जवाब दियो, “मी न एक काम करयो, अर तुम सब सोच म पढ़ गया हैं। 22 एको लाने मूसा न तुमका खतना कारान को नियम दियो (असो नी कि उ मूसा कि तरफ से हैं पर बाप दादा से चलते आयो हैं), अर तुम आराम को दिन इंसान को खतना करावा हैं। 23 जब हफ्ता को दिन कोइ पोरिया को खतना करो जावा हैं ताकि मूसा को नेम को कानुन नी टूटे, ते तुम मोसे काहेको लाने घुस्सा करा हैं काहेकि मीना एक इंसान ख आराम करन को दिन पूरी तरीका से अच्छो करियो हैं। 24 मुंडो देख ख न्याय मत करो, पर सच्ची-सच्ची न्याय करो।”
28 जसो कि यीसु न मन्दिर म सिखायो, ओ ना बड़ी जोर कि आवाज से बोल्यो का “तुम सही म मोखा जाना हैं कि मी कहाँ को आय? मी खुद की मर्जी से नी आयो हैं। पर जेना मोखा भेज्यो हैं, उ सच्चो हैं तुम ओखा नी जानत आय, 29 पर मी ओखा जानु हैं, काहेकि मी ओकी तरफ से आयो हैं अऊर उयीच न मोखा भेज्यो हैं।”
30 येपर उनना ओखा पकड़न की कोसिस करी, तेभी कोई न ओपर हात नी ड़ाल्यो काहेकि ओको बखत अबा लक नी आयो रहा 31 फिर भी भीड़ म से ढ़ेर सारा न ओपर भरोसा करियो अऊर कहन लग गया, “जब मसी आहे, ते का उ यू इंसान से बड़ ख चिन्ह करे?”
35 येपर यहूदी गुरू हुन न आपस म बोल्यो, “यू किते जान वालो हैं जोकी हम ओखा नी देखन का? का उ वी यूनानी सहर हुन म जाएगो जिते हमारा इंसान हुन रहवा हैं, अऊर यूनानी हुन ख सिखावा हैं? 36 उ कहा हैं कि तुम मोखा ढुढ़ेगो, पर मोखा नी ढुढ़ सकन का, अऊर तुम वहाँ नी जा सका जिते उ होऐ एको का मतलब हैं?”
40 फिर भीड़ म से कोइ-कोइ इंसान हुन न ओखा असो कहते हुए सुनायो अऊर बोल्यो, “यू इंसान सचमुच म भविस्यवक्ता आय।”
41 दुसरा न कय्हो, “यू मसी आय।”
46 सिपाई हुन न जवाब दियो, “कोइ न भी यू इंसान से कभी असी बात नी करी!”
47 का ओ ना तुमका भी घुमायो हैं? फरीसी हुन न उनसे पुछयो। 48 “का तुमना कभी मुखिया हुन या कोई फरीसी ख ओपर भरोसा करते देख्यो हैं? 49 या भीड़ मूसा को नेम ख नी जाना, एकोलाने वी परमेस्वर को सराप म पढ़िया हैं!”
50 फरीसी हुन म से एक नीकुदेमुस थो, उ अदमी जो यीसु ख देखन गयो रहा। उनना दुसरो से बोल्यो, 51 “हमारो नेम को हिसाब से हम इंसान हुन ख उनकी बात सुनन अऊर यू पता लगानो से पहिले ओकी बुराई नी कर सका कि ओ ना का करयो हैं।”
52 उन न ओखा जवाब दियो; “का तू भी गलील को हैं? ढ़ूँढ़ अर देख कि गलील से कोइ भविस्यवक्ता परगट नी होन को।” 53 फिर सब कोइ अपना-अपना घर चल दिया
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