7 जव हामु घण दाहड़ा तक धीरा–धीरा चालीन जसा तसा कनिदुसक सामने पुग्या, तो अतरान करीन कि वाहवो हामुक ओगळ जाने नी देती होती, हामु सलमोने सी हईन क्रेतेन आड़ मा चाले। 8 आरू तीनान धोड़े–धोड़े कठिनता छे चालीन शुभलंगरबारी नावन एक धरतीम पुग्या, वा छे लसैया नगर निकट हुता।
9 जव घण दाहड़ा वीत गया, आरू जलयात्रा मा जोखिम अतरान करीन होयती होती कि उपवासन दाहड़ा हिमी वीत त्योक्या हुता, तो पौलुस ने तीनान धरती चेतावनी देदी। 10 पुन सज्जनो, मखे ओसो जान पड़ता छे कि इन यात्रा मा विपत्ति घण हानि, केवल माल आरू ढोंड्यान वरना हामरा जीवन भी होयनेवावी छे। 11 पुन सूबेदार ने अगळवानिया आरू ढोंड्यान भगवानन बातन पौलुस छे बढ़ीन मान्यो। 12 वो बन्दरगाह जाड़े काटनेन करीन वारलो नी होतो; अतरान करीन आखान विचार हुयो कि वाँ छे ढोंड्या उगाड़ यदि काही रीति छे होय सके तो फीनक्स मा पुग्या जाड़े काटे। यो तो क्रेतेन एक बन्दरगाह छे जो दक्षिण पश्चिम आरू जवाब पश्चिमन चा रयन खुलतो छे।
21 जव वो घण दाहड़ा तक भुकला रया त्योके, ती पौलुस इन्दरे वीच मा उबो हईन कयो, “हे मानसोन जूवे होतो कि तुमू मारी वात मानीन, क्रेते छे नी ढोंड्या उगाड़ता आरू नी यो विपत्ति आवती आरू नी यो हानि झेलतो रये।” 22 पुन हिमी हाव तुमूक समझाता छे कि हिमत बांधो, काहकि तुमू मा छे कुदाक जीव क हानि नी होछे, पर केवल ढोंड्या करी। 23 काहकि यहोवा–भगवान जेरो हाव छे, आरू जिन्दरी सेवा करता छे, ऐरा सोरगदूत ने आज रात मारे साथे आवीन कयो। 24 हे पौलुस, “मा बिहे! तुखे कैसरन सामने उबो होयनो पाको सी। देख, यहोवा–भगवान सबक जा तारे साथे जत्रा करता छे, तुखे देदो छे।” 25 अतरान करीन, हे सज्जनो, ढाढ़स बांधो; काहकि हाव यहोवा–भगवान पर विश्वास करता सी, कि जोसो हावखेसी कयो, कि जोसो मुझसी कयो गया सी, वोसो ही होयसी। 26 पुन हामु काही टापु पर टिकना होछे।
27 जव चौदहवी रात होयी हामु अद्रिया दरिया मा भटक रया, हुता आधी रातन निकट मेलिया ने सार सी जानेन हामु देशन निकट पुग्य रया सी। 28 थाह लीन चे वीस पुरसा देख्या आरू थुड़ा ओगव बढ़ीन पछो थाह लीन, पंदरे पुरसा देख्या। 29 तव दगड़ा वाळी जागा पर पड़नेन आरू डर छे चे ढोंड्यान पछो चार लंगर नाख्य, आरू इच्छा करता रया। 30 पुन जव मेलिया ढोंड्या पर छे ढासनो जूवता हुता, आरू गलही छे लंगर नाखनेन वजेसे ढोगी दरिया मा उतार दिदा। 31 ती पौलुस ने सूबेदार आरू सिपाई सी कयो, यदि यो ढोंड्या पर नी रया, ती तुमू भी नी वाच सकता। 32 तव सिपाई ने राश काटीन ढोंड्या पाड़ देदी।
33 जव भोर हुयने पर होतो, ती पौलुस ने यो धरती, आखो भोजन करनेन समझाया, “आज चौवदे दाहड़ा होया कि तुमू आस देखता–देखता भूखला रया आरू काही भोजन नी कर्या। 34 अतरान करीन तुमूक समझाता सी कि काही खाय लेवु, ओका सी तुमरो बचाव होय; काहकि तुमू मा सी कुदान मुनकान एक झटु भी नी पड़े।” 35 आरू यो धरती त्यो रूटा लावीन आखान सामने यहोवा भगवान धन्यावद कामो आरू तुड़ीन खाने लाग्या। 36 तव वो आखा भी ढाढ़स बांधीन भोजन करने लाग्या। 37 हामु आखा हाववीन ढोंड्या पर दुय सौव ने तीन वीसु सत्ते जना हुता। 38 जव वो भोजन करीन आफरी गिया, तो गहू दरिया मा नाखीन ढोंड्या फोवर करने लाग्या।
42 तव सिपाहियोन यो विचार हुयो कि बन्दियोन मार नाखनेन; ओसो नी होय कि तीयार निकवीन डास्या। 43 पुन सूबेदार ने पौलुसक वाचाड़ने मरजी छे तीनुक इन विचार छे रूक, आरू यो कयो, कि जो तीयार हुयसे छे पेहल कूदीन धोड़े पर निकवी जाय। 44 आरू बाकी काही पड़ीया पर, आरू काही ढोंड्यान दिसरा चीजन सहारे निकवी जाय, इन रीति छे आखो काही धोड़े पर वाच निकवे।
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