12 तब यीसु अपन नेउता देय बालेन लग कथै, “जब तुम दिन या रात के भोज हे कउनो के नेउता करा, ता अपन संगिन के बुलाबा अउ भाई सखा सियानन या धनी परोसिन के नेउता झइ देया, असना झइ होय कि उनो तुमके नेउता दइके पलटा चुकाय दे। 13 बलुक जब तुम भोज देया, ता गरीबन, असहाय, लुलुवन अउ अंधरन के नेउता देया। 14 तब तुम धन्य हुइहा उन मनसे तुम्हर पलटा नेहको चुकाय सकथै, पलटा तुमके धरमी मनसे के दवारा जिन्दा होय के टेम पलटा चुकाय दय जही।”
15 ओखर संग भोजन करै बाले मसे कउनो मनसे हइ सुनके यीसु लग कथै, “धन्य हबै, ऊ, जउन भगवान कर राज हे भोजन करी।”
16 हइ सुनके यीसु कथै, “कउनो मनसे अक्ठी बडा भोज के आयोजन करिस अउ बोहत लग मनसेन के नेउता दइस। 17 भोजन के टेम ऊ अपन हरवाह दवारा पहुनन के हइ कहिके पठोथै, कि आबा, काखे अब सगलू कुछ तइयार हबै। 18 पय उन सगलू झन बहाना करै लागथै, पहिले हरवाह लग कथै, मै खेतवा खरीद लय हबो अउ मोके ओही देखै जाय के हबै, मै तोर लग बिनती करथो मोर पल्ला लग छमा मांग लइहा। 19 दूसर मनसे कथै, मै पांचठे गाडी बइला खरीद लय हबो अउ मै उनके देखै जथो, तुम्हर लग बिनती करथो, मोर पल्ला लग छमा मांग लइहा। 20 अक्ठी अउ मनसे कथै, मै काज करे हबो, इहैनिता मै नेहको आय सकथों। 21 हरवाह अपन घर छो लउट के आथै, ता ऊ अपन मालिक लग सगलू बात गुठेथै, ई बात सुनके ऊ घर के मालिक बोहत गुस्साथै अउ अपन हरवाह लग कथै, ऊ सहर के बाजार छो जा, जछो गली हे दीन हीन अउ बेसहारा अउ अंधरा अउ लेंगरा के इछो बुलाय लइ आनबे। 22 जब हरवाह अपन मालिक लग कथै, मालिक तोर आदेस के पालन करे गय हबै, पय अउ कुछ जिघा बाकी हबै। 23 ता घर के मालिक हरवाह के आदेस दइस, अब तै सहर के बाहिर के सडक अउ बखरी के पल्ला जा अउ मनसेन के भित्तर लामै के निता मजबूर कर कि मोर घर भर जाय। 24 अउ मै तुम्हर लग कथो, जउन आगू बुलाय गय हबै, उनखर मसे कउनो मनसे मोर भोजन के नेहको खाय पइहिन।”
25 यीसु के संग-संग मनसेन के अक्ठी बडी भीड चलथै, ता ऊ उनखर पल्ला घूमके मनसेन लग कथै। 26 अगर कउ मोर लिघ्घो आथै अउ अपन दाय बाफ डउकी अउ लरिका, अपन भाई बेहन अउ इहां तक कि खुदय अपन जीवन के मोर लग बोहत महत्व देथै, ता ऊ मोर चेला नेहको हुइ सकथै[c]। 27 जउन मनसे अपन क्रूस उठायके नेहको चलथै, ऊ मोर चेला नेहको हुइ सकथै। 28 तुम्हर मसे असना कोहर हबै, जउन पगरा बनामै चाहथै, अउ आगू बइठके खरचा के अनुमान न लगामै, कि मोर लिघ्घो काम पूर करै के निता खूब पइसा हबै या नेहको? 29 कहुं असना झइ होय कि ऊ नीह कोड लय होय अउ काम पूर नेहको कर पाउत होंय ता देखैबाले मजाक उडाही। 30 अरे देखा हइ मनसे काम तो करिस, पय हइ उके पूर नेहको कर सकिस। 31 असना कोहर राजा हुइ, जउन दूसर राजा लग युध्द करै के पहिलेन हइ बिचार न करी कि ऊ अपन दस हजार सुपाहिन के संग अपन बिरुध बीस हजार के सेना लग सामना कर सकथै, या नेहको? 32 अगर ऊ सामना नेहको कर सकथै, ता जब तक दूसर राजा दूर हबै, ऊ राजदूतन के पठोय के ओखर आगू सान्ति परस्ताव रखी। 33 “इहैमेर तुम्हर मसे जउन मनसे अपन सगलू कुछ नेहको छांड दइ, ऊ मोर चेला नेहको हुइ सकथै।
34 “नून निक्खा हबै, पय अगर ऊ अपन मिठास खो दइ, ता ऊ कसना नमकीन करे जही? 35 ऊ न तो भुंइ के कउनो काम के रही, अउ न खादा के काम हे आथै, मनसे उके बाहिर फटक देथै अउ जेखर सुनै के कान हबै ऊ सुन ले।”
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