5 यह सुनकर दाऊद को बड़ा ग़ुस्सा आया। वह पुकारा, “रब की हयात की क़सम, जिस आदमी ने यह किया वह सज़ाए-मौत के लायक़ है। 6 लाज़िम है कि वह भेड़ की बच्ची के एवज़ ग़रीब को भेड़ के चार बच्चे दे। यही उस की मुनासिब सज़ा है, क्योंकि उसने ऐसी हरकत करके ग़रीब पर तरस न खाया।”
7 नातन ने दाऊद से कहा, “आप ही वह आदमी हैं! रब इसराईल का ख़ुदा फ़रमाता है, ‘मैंने तुझे मसह करके इसराईल का बादशाह बना दिया, और मैं ही ने तुझे साऊल से महफ़ूज़ रखा। 8 साऊल का घराना उस की बीवियों समेत मैंने तुझे दे दिया। हाँ, पूरा इसराईल और यहूदाह भी तेरे तहत आ गए हैं। और अगर यह तेरे लिए कम होता तो मैं तुझे मज़ीद देने के लिए भी तैयार होता। 9 अब मुझे बता कि तूने मेरी मरज़ी को हक़ीर जानकर ऐसी हरकत क्यों की है जिससे मुझे नफ़रत है? तूने ऊरियाह हित्ती को क़त्ल करवा के उस की बीवी को छीन लिया है। हाँ, तू क़ातिल है, क्योंकि तूने हुक्म दिया कि ऊरियाह को अम्मोनियों से लड़ते लड़ते मरवाना है। 10 चूँकि तूने मुझे हक़ीर जानकर ऊरियाह हित्ती की बीवी को उससे छीन लिया इसलिए आइंदा तलवार तेरे घराने से नहीं हटेगी।’
11 रब फ़रमाता है, ‘मैं होने दूँगा कि तेरे अपने ख़ानदान में से मुसीबत तुझ पर आएगी। तेरे देखते देखते मैं तेरी बीवियों को तुझसे छीनकर तेरे क़रीब के आदमी के हवाले कर दूँगा, और वह अलानिया उनसे हमबिसतर होगा। 12 तूने चुपके से गुनाह किया, लेकिन जो कुछ मैं जवाब में होने दूँगा वह अलानिया और पूरे इसराईल के देखते देखते होगा’।”
13 तब दाऊद ने इक़रार किया, “मैंने रब का गुनाह किया है।” नातन ने जवाब दिया, “रब ने आपको मुआफ़ कर दिया है और आप नहीं मरेंगे। 14 लेकिन इस हरकत से आपने रब के दुश्मनों को कुफ़र बकने का मौक़ा फ़राहम किया है, इसलिए बत-सबा से होनेवाला बेटा मर जाएगा।”
15 तब नातन अपने घर चला गया।
18 सातवें दिन बेटा फ़ौत हो गया। दाऊद के मुलाज़िमों ने उसे ख़बर पहुँचाने की जुर्रत न की, क्योंकि उन्होंने सोचा, “जब बच्चा अभी ज़िंदा था तो हमने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उसने हमारी एक भी न सुनी। अब अगर बच्चे की मौत की ख़बर दें तो ख़तरा है कि वह कोई नुक़सानदेह क़दम उठाए।”
19 लेकिन दाऊद ने देखा कि मुलाज़िम धीमी आवाज़ में एक दूसरे से बात कर रहे हैं। उसने पूछा, “क्या बेटा मर गया है?” उन्होंने जवाब दिया, “जी, वह मर गया है।”
20 यह सुनकर दाऊद फ़र्श पर से उठ गया। वह नहाया और जिस्म को ख़ुशबूदार तेल से मलकर साफ़ कपड़े पहन लिए। फिर उसने रब के घर में जाकर उस की परस्तिश की। इसके बाद वह महल में वापस गया और खाना मँगवाकर खाया। 21 उसके मुलाज़िम हैरान हुए और बोले, “जब बच्चा ज़िंदा था तो आप रोज़ा रखकर रोते रहे। अब बच्चा जान-बहक़ हो गया है तो आप उठकर दुबारा खाना खा रहे हैं। क्या वजह है?” 22 दाऊद ने जवाब दिया, “जब तक बच्चा ज़िंदा था तो मैं रोज़ा रखकर रोता रहा। ख़याल यह था कि शायद रब मुझ पर रहम करके उसे ज़िंदा छोड़ दे। 23 लेकिन जब वह कूच कर गया है तो अब रोज़ा रखने का क्या फ़ायदा? क्या मैं इससे उसे वापस ला सकता हूँ? हरगिज़ नहीं! एक दिन मैं ख़ुद ही उसके पास पहुँचूँगा। लेकिन उसका यहाँ मेरे पास वापस आना नामुमकिन है।”
24 फिर दाऊद ने अपनी बीवी बत-सबा के पास जाकर उसे तसल्ली दी और उससे हमबिसतर हुआ। तब उसके एक और बेटा पैदा हुआ। दाऊद ने उसका नाम सुलेमान यानी अमनपसंद रखा। यह बच्चा रब को प्यारा था, 25 इसलिए उसने नातन नबी की मारिफ़त इत्तला दी कि उसका नाम यदीदियाह यानी ‘रब को प्यारा’ रखा जाए।
29 चुनाँचे दाऊद फ़ौज के बाक़ी अफ़राद को लेकर रब्बा पहुँचा। जब शहर पर हमला किया तो वह उसके क़ब्ज़े में आ गया। 30 दाऊद ने हनून बादशाह का ताज उसके सर से उतारकर अपने सर पर रख लिया। सोने के इस ताज का वज़न 34 किलोग्राम था, और उसमें एक बेशक़ीमत जौहर जड़ा हुआ था। दाऊद ने शहर से बहुत-सा लूटा हुआ माल लेकर 31 उसके बाशिंदों को ग़ुलाम बना लिया। उन्हें पत्थर काटने की आरियाँ, लोहे की कुदालें और कुल्हाड़ियाँ दी गईं ताकि वह मज़दूरी करें और भट्टों पर काम करें। यही सुलूक बाक़ी अम्मोनी शहरों के बाशिंदों के साथ भी किया गया।