7 तुम तौ निरे अच्छी तरह से एक मसीह को जीवन जीत रहौ! लेकिन अब कोई तुमकै रोक दई, कि सच्चाई कै नाय मानौ? 8 ऐसी सीख तुमरे बुलान बारेन के घाँईं से नाय। 9 “जरा सो खमीर सबै मड़े भै चून कै खमीर कर डारथै।” 10 मैं प्रभु मैं तुमरे ऊपर भरोसो धरथौं, कि तुमरे भीतर कोई दुसरे बिचार ना होगो; लेकिन जो तुम्हैं परेसान करथैं, बौ कोई भी होबै सजा पाबैगो।
11 लेकिन भईय्यौ, अगर मैं खतना को प्रचार करतो, तौ काहे हबै ले सताओ जाथौं। अगर जौ सच होतो, तौ मसीह के क्रूस के बारे मैं मेरे प्रचार करन से कोई परेसानी नाय होती। 12 अच्छो होतो कि जो तुम्हैं परेसान करथैं, कास बे पूरे रस्ता जाते और खुदकै मिटाए देते!
13 तुमरे ताहीं, मेरे भईय्यौ और बहेनियौ, आजाद होन के ताहीं बुलाए गै हौ। लेकिन ऐसो ना होबै कि जौ आजादी सरीर के कामन ताहीं मौका बनै, बल्किन प्यार से एक दुसरे के गुलाम बनौ। 14 काहैकि सब नियम जौ एक बात मैं पूरी हुई जाथै, तैं अपने परोसी से अपने हानी प्यार रख। 15 लेकिन अगर तुम जंगली जानवरन के हानी, एक-दूसरे के दाँत से काटत और फाड़त हौ, तौ चहाचीते रहियो कि एक-दूसरे को नाओंनिसान मत मिटाए दियौ।
20 मूर्ति पूजा, टोना, बैर, लड़ाई, जलन, गुस्सा, खिलापत, फूट, विधर्म, 21 बे जलन रखथैं, नसा मैं धुत हुई जाथैं, काम वासना मैं पड़े रहथैं और इन्हईं तराहनी के औरै-औरै काम करथैं, मैं तुमकै पहलिये चौकन्नो करथौं: जो आदमी जे कामन कै करथैं, बे परमेस्वर के राज्य को वारिस नाय होंगे।
22 पर आत्मा को फल प्रेम, खुसी, सांति, धीरज, दया, भलाई, बिस्वास, 23 नमरता और संयम है; ऐसे-ऐसे कामन के खिलाप मैं कोईये नियम नाय है। 24 जो मसीह ईसु के हैं, बे सरीर कै बाकी लालसा और इच्छा समेत क्रूस मैं चढ़ाय दई हैं। 25 आत्मा हमकै जिंदगी दई है, बौ भी हमरी जिंदगी कै वस मैं करनो चाहिए। 26 हमैं एक दुसरे पर गर्व या जलन नाय होनो चाहिए या एक दुसरे से जलनो ना चाहिए।
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