7 तुम चीजन कि बाहरी उपस्थिति कै देखरै हौ। का कोई ऐसो आदमी है जो खुदकै या खुदकै मसीह से संबंधित मानथै? ठीक है, उनकै फिर से अपने बारे मैं सोचन देमैं, काहैकि हम मसीह के उतनोई हैं जितने बे करथैं। 8 तुमरे बिनास के ताहीं ना, बल्कि तुमरे आध्यात्मिक निर्माड़ के ताहीं हमैं प्रभु से जो अधिकार मिलो है, अगर मैं बाके ऊपर जाधे गरब कर रौ हों, तौ मोकै जौ बात की कोई सरम ना है। 9 जौ मैं इसलै कहरौ हौं, कि चिट्ठिन के जरिये तुमकै डरपान बारो ना बनौ। 10 बे कहथैं, “कि पौलुस की चिट्ठीयैं तौ गंभीर और मजबूत है, लेकिन जब बौ आदमी मैं हमरे संग होथै, तौ बौ सरीर मैं कमजोर होथै, और बाके सब्द कुछ भी ना होथैं!” 11 ऐसे आदमिन कै जौ समझनो चाहिए कि जब हम दूर होथैं तौ हम अपनी चिट्ठिन मैं जो लिखथैं बामै कोई अंतर ना होथै और जब हम तुमरे संग होथैं तौ हम का करंगे।
12 हमरी इतनी हिम्मत ना है कि हम अपने आपकै उनके संग मैं गिनैं। या फिर उनकै अपने से मिलामै! जो अपनी मोहों बड़ाँईं खुदै करथैं, और खुदकै आपसै मैं नाप तोलकै एक दुसरे से मिलाएकै गधन जैसी करथैं! 13 हम तौ हद से जाधा कतई घमंड ना करंगे, खाली बहे हद तक घमंड करंगे, जितनो परमेस्वर हमकै हक दई है, और बामै तुम्हऊँ आए गै हौ, और बहे के हिसाब से घमंड करंगे, और जामैं हमरो काम भी सामिल है। 14 हम अपनी औकात से बाहर अपने आपकै बड़ानो नाय चाहथैं, जैसे कि तुमरे ले नाय पुगन की हालत मैं होतो, लेकिन मसीह को सुसमाचार सुनात भइ तुमरे ले पुग चुको है। 15 और हम अपनी हद से बाहर दुसरे के काम मैं गुमान नाय करथै; लेकिन हमकै आस है, कि जैसे-जैसे तुमरो बिस्वास बढ़तै जागो, बैसिये हम अपनी हद के हानी तुमरी बजह से औरौ बड़तै जामंगे। 16 फिर हम तुमरे अलावा दुसरे देसन मैं सुसमाचार को प्रचार कर सकथैं और कोई छेत्र मैं पहले से करे गै काम के बारे मैं घमंड ना करनो चाहिए।
17 लेकिन जैसो कि सास्त्र कहथै, “जो कोई घमंड करनो चाहथै बाकै जौ बात मैं घमंड करनो चाहिए कि प्रभु का करी है।” 18 काहैकि जौ बे लोगन के ताहीं है जिनकै प्रभु अच्छी तरह से समझथैं जो बास्तव मैं अपनाओ जाथै, ना बे लोग जो खुद के बारे मैं अच्छो सोचथैं।
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