13 अब तुम्हईं अजमावौ: का बईय्यर कै मूड़ उत्कार कै परमेस्वर से प्रार्थना करनो सोभा देथै? 14 का प्रकृति अपने आपै जौ नाय बताथै कि लम्बे बार रखानो लोगन के ताहीं सरम की बात है, 15 जाके बाबजूद बईंय्यरन के लम्बे बार उनकी महिमा हैं काहैकि जे बाकै ओढ़नी के ताहीं दै गै हैं। 16 लेकिन अगर जौ बारे मैं कोई और है जो जिरहबाजी करनो चाहथै तौ, बौ जौ समझ लेबै कि परमेस्वर की कलीसिया मैं ऐसियै रीत है।
17 लेकिन जौ आग्या देत भौ मैं तुम्हारी बड़ाँईं नाय कर्रौ हौं: सभाघरन मैं तुमरे जुरान से भलाई नाय लेकिन बुराइये होथै। 18 सबसे पहली बात तौ जौ है कि मैं सुनों हौं तुम जो आपस मैं कलीसिया मैं जब जुराथौ तौ तुमरे बीच मैं लड़ाई होथैं ऐसो मेरे सुनन मैं आओ है और मोकै थोड़ी सो विस्वासौ है। 19 काहैकि जौ बात सच्ची है कि तुमरे बीच मैं बटबारो होनो जरूरी है कि बे, जो परमेस्वर मैं खरे निकरे हैं, उजीतो मैं आए जामैं। 20 सो तुम जो एक जघा मैं इखट्टे होथौ, तौ प्रभु भोज खान के ताहीं नाय। 21 खानु खान की बेरा एक दूसरे से पहले अपनो खानु खाए लेथौ, सो कोई तौ भूंको रह जाथै और कोई मतवारो हुई जाथै। 22 का खान पीन के ताहीं तुमरे अपने घर नाय हैं? या परमेस्वर की कलीसिया कै तुच्छ जानथौ और जिनके पास कछुए नाय है उनकै सर्मिंदा करथौ, मैं तुमसे का कहमौं? का जौ बात मैं तुम्हारी बड़ाँईं करौं? कतईये नाय!
23 मोकै जो सिक्छा प्रभु से मिली रहै, बौ मैं पहलिये से तुमकै दै दौ: जो रात ईसु कै पकड़बाओ गौ रहै, मसीह रोटी लई, 24 धन्यवाद दई और बाकै तोड़ी और कही, “तुमरे ताहीं मेरो जौ सरीर है, ऐसो मेरी याद के ताहीं करे करियो।” 25 ऐसियै रीति से खानु खान के बाद बौ कटोरा लईं और कहीं, “जौ कटोरा मेरे खून मैं नई वाचा है, जब कहु तुम जाकै पीबौ तौ मेरी याद मैं ऐसोई करे करियो।”[d]
26 जब कभई तुम जौ रोटी खाथौ, और जौ कटोरा मैं से पीथौ, तौ तुम प्रभु की मौत को जब तक बौ नाय आए, प्रचार करथौ। 27 तभई जो कोई गलत तरीका से प्रभु की रोटी खाथै, या बाके कटोरा मैं से पीयै, बौ प्रभु की सरीर और खून को अपराधी होगो। 28 सो पहले अपने आपकै परखौ, और जहे रीति से रोटी मैं से खाबै और कटोरा मैं से पियै। 29 जो प्रभु की सरीर कै खात-पीत फैसला नाय करै, तौ बौ खान और पीन से अपने ऊपर मुकदमा लाथै। 30 जहे बजह से तुम मैं कित्ते बिमार और कमजोर हैं, और निरे मरियो गै। 31 अगर हम पहलियै अपने आपकै आजमा लेते तौ, फैसला नाय होतो। 32 लेकिन प्रभु हमैं आजमाय कै हमारी ताड़ना करथै ताकी हम दुनिया के संग सजा के हकदार नाय ठहरैं।
33 तभईये, मेरे प्रिय भईय्यौ जब तुम प्रभु भोज खान ताहीं जुराथौ, तौ एक दुसरे कै असियाय करौ। 34 और अगर तुम मैं से कोई भी भूंको होबै, तौ तुमकै घरईये खानु खानो चहाईये, जोसे तुम एक संग मिलथौ तौ सजा की वजह नाय होबै। और बाकी बातन कै मैं खुद आयकै ठीक कर देंगो।
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