1 मंग यीसु नाव मा चघके ओनागन गयो, अना आपरो नगर मा आयो। 2 अना देखिन का लकवा वारा, ला खाट पर धरके ओको कठा आनीन। यीसु ना उनको बिस्वास देखके, लकवा को रोगी ला कहीस, अरे टूरा हिम्मत राख! तोरो पाप छिमा भईन।
3 एको पर कई मोसे को नियम को गुरू ना सोचिन का यो तो परमेस्वर की निन्दा करासे।
4 यीसु ना उनको मन की गोस्टी ला जानके कहीस, तुमी आपरो-आपरो मन मा बुरो बिचार कायलाई करासेव। 5 सरल का से? यो कव्हनो का तोरो पाप छिमा भईन, अना यो कव्हना का उभो होय, अना चल फिर। 6 पर एकोलाय तुमी जान लेव, का “मानूस को टूरा” ला धरती पर पाप छिमा करन को, अधिकार से, तबा ओना लकवा को रोगी ला कहीस, उभो होय! अना आपरी खाट ला उठाव, आपरो घर जाय।
7 उ लकवा को रोगी उभो होयके, आपरो घर चली गयो। 8 लोक असो देखके डराय गईन, अना परमेस्वर की बड़ाई करन लगीन, जेना मानूस ला असो अधिकारी ठहराईसेस।
9 वहान लक लगत पुढा बढके यीसु न मत्ती नामको मानूस ला बरगन वसुली करन वालो चौबट्टा पर बसयो चोयो त वोको लक कहीस,“ मोरो मंघा भय जाव।”
10 [a]जबा उ घर मा जेवन मा बसयो, ता लगत सा जमा वसूल करन वारो पापी आयके यीसु अना ओको चेला संग जेवन लाय बस गईन। 11 असो देखीके फरिसी गीन ना ओको चेला ला कहिन, तोरो गुरूजी बरगन लेवन वारा अना पापी गीन को संग काय ला जेवन करासे?
12 असो आयक के यीसु ना उनको लक कहीस, बईद साजरो लाई नही से, पर बीमार गीन लाई जरूरी से। 13 एको लाई तुमी जायके एको अरथ सीक लेव। मि पुजा चढानो नही, पर दया चाहुसेऊ, काहे की मि न्यायी ला नही, पर पापी गीन ला बुलावन आईसेऊ।[b]
14 तबा योहन का चेला गीन ओको जवर आयके कहिन, का कारन से? आमी अना फरिसी एतरो उपास करासेत, पर तोरा चेला उपास नही करत।
15 यीसु ना उन लक कहीस की जबा तकन बराती नवरदेव को संग मा रव्हासे , सोक कर सकासेत? पर वय दिवस आहेति जबा नवरदेव उनको लक अलग कियो जाहे। ओनो बेरा मा उपास करयेत।
16 कोरो कपरा को नाड़ा जूनो कपरा पर कोनी नही लगाय सकत, काहे की उ नाड़ा ओ कपरा ला काही अखीन खीच लेवसे, अना उ लगत फट जासे। 17 अना लोक नवा अंगूर को रस ला जुनो कुप्पा मा नही भरत, काहे का असो करन लक कुप्पा फट जासे, अना अंगूर को रस बह जासे अना कुप्पा नास भय जासे पर नयो अंगूर को रस नयो कुप्पा मा भरासेत अना वय दुही बचया रहोसेत।
18 यीसु उन लक यो गोस्टी कर रहयो होतो। तबच एक समाज को मुखिया आयके दुई हात जोड़के नमस्कार करीस अना कहीस, मोरी टूरी मर गई। चलके आपरो हात ला ओको पर राख, ता वा जित्तो भयी जाहे।
19 यीसु उभो होयके आपरा चेला गीन को संग मा, ओको मंघा चलन लगीन।
20 एक बायको जोनको बारा बरस लक लाल धोवा जान की बीमारी होती। मंघा लक आयके ओको कपरा को कगर सेव ला छीव लेईस। 21 काहे का वा आपरो मन मा कव्हत होती। अदी मि ओको कपरा ला छी लेहुँ ता साजरी भयी जाहुँ।
22 यीसु ना मुरकके, ओला देखिस अना कहीस, अवो टूरी हिम्मत राख, तोरो बिस्वास ना तोला साजरो करीसेस। अता वा बायको ओनो बेरा मा साजरो भयी गई।
23 जबा यीसु मुखिया को घर मा पहुचियो। अना बंसरी बजावन वारा अखीन, भीड़ ला हुल्लड़ करतो देखीस। 24 तबा कहीस हट जाओ “टूरी मरी नही पर जप मा से।” एको पर ओकी हसी उडावन लगीन। 25 पर जबा भीड़ हेड़ पर देईन, ता उ भीतर जायके टूरी पर को हात धरीस, अना वा जित्तो भय गई। 26 अना या गोस्टी सप्पा देस मा फैल गई।
28 जबा उ घर मा गयो, ता वय अँधरा ओको जवर आइन, अना यीसु ना उनको लक कहीस, का तुमला भरोसा से? का मि असो कर सकासु?
29 तबा ओना ओको डोरा ला छीवके कहीस, तुमरो को भरोसा लक, तुमरो लाय होय जाय। 30 अना उनका डोरा खुल गईन, अना यीसु ना उन ला चिता के कहीस, सतरक रव्हने, कोनी एना बात ला नोको जाने।
31 पर उनना हिटके सप्पा देस मा साजरा बारता यस फैला देईन।
34 [c]पर फरिसी गिनना कहीन “यो ता सैतान को मुखिया को मदद लक बुरो आतमा भूत-पलित ला हेड़से।” 35 [d]यीसु सब नगर-गाँव मा फिरत होतो। अखीन सब पिराथना घर मा साजरो गोस्टी को मुनादी करत होतो करत होतो। अना राज को साजरो बारता आयकावत होतो। हर तरीका की बीमारी अना कमजोरी ला दुहुर करत होतो। 36 [e]जबा ओना भीड़ ला देखीस, ता ओला लोकगीन पर तरस आयो काहेका वय ओनो मेढा को जसो सेत। जिनको कोनी रखवालो नहाय। अना दुखी, भटको हुओ सेत। 37 [f]तबा ओना आपरा चेला गीन ला कहीस “खेत लगत पिकयो सेत, पर बनिहार जरा सा सेत। 38 एकोलाय खेत का मालिक! पिरभु लक बिनती करो। का वय आपरो फसल ला कापन लाई बनिहार धाड़ेत”।
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