1 यीसु ना आपरो चेला गीन, ला कव्हासे, “पक्को पाप को लोभ मानूस को पूढा जरुर आहेत, मंग उ मानूस ला धिक्कार सेत, जोन को लक मानूस पाप को लोभ मा पड़ासे! 2 जोन मानूस ऐना लहान लोक गीनको पाप को कारन सेत, वोको सजा यो से का, गरो मा चकिया को गोटा बान्धके, ना सागर मा डाख दियो जाये।”
3 [a] “एकोलाय सतरक रव्हने, अदी तुमारो कोनी भाऊ गलति पाप करासे ता वोला नोको डाटो पर समजा लेव, अखीन उ पस्तावा करासे, ता वोला छिमा कर। 4 अदी कोनी दिवस मा सात बार तोरो विरोध मा पाप करासे, अखीन पस्तावा के छिमा मांगासे ता छिमा करदेव।”
6 पिरभू कव्हासेत, अदी तुमला राई को दाना बरोबर भरोसा होत्यो, अना सहतूत को झाड़ ला हुकूम देवतो, का उखड अना सागर मा लगी जाय! ता उ तोरो हुकूम ला मानतो।
14 यीसु ना उनला चोवके उनला कहीस, जावो!
20 एक बेरा मा मोसे को नियम को गुरू ना यीसु लक पुसिस, का परमेस्वर को राज कबा आहेत? तबा यीसु न वोला जवाब दियो, “परमेस्वर को नही चोवन वारा रुप मा राज आहेत, काहेका वा परगट नाहत। तो लोग गीनला कसो चोहेत? 21 लोक यो नही सांगासे ता चोवो उ यहान से उता सेत, काहेका परमेस्वर को, राज तुमारो बीच मा सेत।”
22 यीसु ना आपरो चेला गीनला सांगिस, एक बेरा असो आहेत, जबा तुम मानूस को टूरा एक दिवस चोवनो चाव्हने, पर वोला नही चोवने। 23 लोक तुम्ही लक कव्हेत, चोवो उ वहान से, चोवा उ यहान से, ता तुमी उता नोको जावने, अखीन उनको मंघा नोको जावने। 24 काहेका जसो बादल मा बिजली कड़कासे अखीन यो छोर लक उ छोर तकन चमका से, वसोच तुमी मानूस को टूरा को आवन को बेरा होयेत। 25 पर पुढा बेजा दुख उठानो पडे़त, यो जरुरी सेत का लोक गीन, वोला नकारेत। 26 जसो भविस्यवक्ता नूह को बेरा मा हुओ होत्यो, वसोच मानूस को टूरा को दिवस मा भी होयेत। [c] 27 भविस्यवक्ता नूह को पानी जहाज मा बसन तकन, लोकगीन जेवन अना सादी ब्याह करत होतीन। तबा परलय आयो अना सबला बुड़ा देइस अना सबा सत्यानास[d] भई गइन। 28 लूत को बेरामा भी असोच भयो, लोग जेवन करत रहयो, घर बनावत होत्यो[e] पौधा लगावत होतिन 29 पर जोन दिवस लूत ना सदोम नगर सोड़यो परमेस्वर ना बादल लक स्तो बरसायके, सबला नास कर डाख्यो। [f] 30 मानूस को टूरा को आवन को बेरा मा असोच होयेत।
31 वोना दिवस जोन अटारी मा सेत, वो समान लेवन लाय घर मा खाल्या नोको आहेत, अखीन जोन खेत मा सेत, उ मंघा नोको लवटे। 32 लूत को बायको ला हेत करो[g]। 33 जोन आपरो जान सुरक्षीत रखनो चाव्हासे, उ वोला गुमा देहेत अखीन, जोन आपरो जान देहेत, उ जित्तो रहेत[h]। 34 मी तुम लक कव्हसू, वोना रात दूई झन एक खाट मा झोपेत, एक उचल लियो जाहेत, अखीन दुजो सोड़ दियो जाहेत[i]। 35 “दोन बाया संग-संग चक्कीया मा दरत रहेत अना एक ला उचल लियो जाहेती अखीन दुसरी ला सोड़ दियो जाहेती।” 36 “दुई जन खेत मा सेत, एक उचल लियो जाहेत, अखीन दुजो सोड़यो जाहेत[j]।”
37 यो आयक के चेलागिन, न पुसयो, “हे पिरभू यो कहान, होयेत?”
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