9 यदि कोढ़ को रोग को जसो कोयी आदमी म हय, त ओख याजक को जवर लायो जाय। 10 अऊर याजक ओख जांचे, अऊर ओकी चमड़ी पर सफेद रंग की सूजन हय, अऊर ओको वजह बाल भी सफेद भय गयो हय, अऊर ऊ सूजन म बिना चमड़ी को मांस हय, 11 त याजक जानेंन कि ओको चमड़ी म पुरानो कोढ़ हय, येकोलायी ऊ ओख अशुद्ध ठहराये; अऊर ओख अलग नहीं रखेंन, कहालीकि ऊ अशुद्ध हय। 12 अऊर यदि कोढ़ चमड़ी म बहुत जादा फूट क, जहां तक याजक देखे रोगी को मुंड सी पाय तक पूरो शरीर म फैल्यो होना, 13 त याजक फिर सी जांचे, अऊर यदि कोढ़ ओको पूरो शरीर म फैल गयो हय, त याजक ओख शुद्ध ठहराये; अऊर ओको पूरो शरीर सफेद भय गयो हय त ऊ शुद्धच ठहरेंन। 14 पर ओको म बिना चमड़ी को मांस दिखायी दे, तब ऊ अशुद्ध हय। 15 अऊर याजक बिना चमड़ी को मांस देख क ओख अशुद्ध ठहराये; कहालीकि वसो बिना चमड़ी को मांस अशुद्धच होवय हय; अऊर ऊ कोढ़ को रोग आय। 16 पर यदि ऊ बिना चमड़ी को मांस फिर सी सफेद होय जाये, त ऊ आदमी याजक को जवर जाये, 17 अऊर याजक ओख जांचे, अऊर यदि ऊ दाग फिर सी सफेद भय गयो हय, त याजक रोगी ख शुद्ध ठहराये; ऊ शुद्ध हय।
18 फिर यदि कोयी की चमड़ी म फोड़ा हय जो अच्छो भय गयो हय, 19 अऊर फोड़ा को जागा म सफेद सूजन यां लाल जसो सफेद दाग होना, त ऊ याजक ख दिखाये; 20 अऊर याजक ऊ फोड़ा ख जांचे, यदि ओख लगे कि चमड़ी म फैल रह्यो हय अऊर ओको बाल भी सफेद भय गयो हय, तब याजक ऊ आदमी ख अशुद्ध ठहराये; यो कोढ़ को रोग आय जेकी सुरूवात फोड़ा सी भयी हय। 21 पर यदि याजक ओख जांचे कि ओको म सफेद बाल नहाय, अऊर चमड़ी म नहीं फैल रह्यो हय, अऊर ओकी चमक कम भय गयी हय, त याजक ऊ आदमी ख सात दिन तक अलग रखे। 22 अऊर यदि ऊ रोग ऊ समय तक चमड़ी म सचमुच फैल जाये, त याजक ऊ आदमी ख अशुद्ध ठहराये; कहालीकि ऊ कोढ़ को रोग आय। 23 पर यदि ऊ दाग नहीं फैलय अऊर अपनो जागा परच रह्य, त ऊ फोड़ा को दाग आय; तब याजक ऊ आदमी ख शुद्ध ठहराये।
24 फिर यदि कोयी की चमड़ी म जरयो हुयो घाव होना, अऊर ऊ जरयो हुयो घाव म बिना चमड़ी को लाल जसो दाग सफेद यां सफेदच होय जाये, 25 त याजक ओख जांचे, अऊर ऊ दाग म को बाल सफेद भय गयो होना अऊर ऊ चमड़ी सी गहरो दिखायी दे, त ऊ कोढ़ आय; जो ऊ जरयो हुयो घाव को दाग म सी फूट निकल्यो हय; त याजक ऊ आदमी ख अशुद्ध ठहराये; कहालीकि ओको म कोढ़ को रोग आय। 26 पर यदि याजक ओकी जांच करे कि दाग म सफेद बाल नहाय अऊर चमड़ी सी गहरो नहाय, अऊर ओकी चमक कम भय गयी हय, त ऊ ओख सात दिन तक अलग रखे, 27 अऊर याजक सातवों दिन ओख जांचे, अऊर यदि ऊ चमड़ी म फैल गयो हय, त याजक ऊ आदमी ख अशुद्ध ठहराये; कहालीकि ओख कोढ़ को रोग हय। 28 पर यदि ऊ दाग चमड़ी म नहीं फैल्यो हय अऊर अपनो जागा पर जसो को वसोच बन्यो हय, त ऊ जरन को वजह सूजयो हुयो हय, याजक ऊ आदमी ख शुद्ध ठहराये; कहालीकि ऊ दाग जरन को वजह हय।
29 “फिर यदि कोयी आदमी यां बाई को मुंड पर, यां आदमी को दाढ़ी म दाग होना, 30 त याजक ऊ रोग की जांच करे, अऊर यदि ऊ चमड़ी को अन्दर गहरो दिखायी दे, अऊर ओको म भूरो भूरो पतलो बाल होना, त याजक ऊ आदमी ख अशुद्ध ठहराये; यो मुंड यां दाढ़ी को कोढ़ यां खुजली आय।” 31 अऊर यदि याजक चर्मरोग को रोग ख जांचय कर क् देखय हय अऊर ओको म कारो बाल भी नहाय, त याजक चर्मरोग को रोगी ख सात दिन तक अलग रखे, 32 अऊर याजक सातवों दिन रोग की जांच करे, यदि चर्मरोग फैल्यो नहीं होना, अऊर ओको म भूरो भूरो बाल नहीं होना, अऊर चर्मरोग चमड़ी को अन्दर गहरी नहीं दिखायी देवय हय, 33 त ऊ आदमी दाढ़ी बनायेंन; पर ऊ चर्मरोग की जागा ख छोड़ देयेंन; अऊर याजक चर्मरोग वालो रोगी ख सात दिन तक अलग रखे। 34 याजक सातवों दिन चर्मरोग की जांच करे, यदि चर्मरोग चमड़ी पर फैली नहाय अऊर वा चमड़ी को अन्दर गहरी दिखायी नहीं देवय हय, त याजक ऊ आदमी ख शुद्ध ठहराये; अऊर ऊ अपनो कपड़ा धोय क शुद्ध ठहरे। 35 पर यदि ओको शुद्ध होन को बाद भी चर्मरोग चमड़ी म कुछ फैलय हय, 36 त याजक ओख जांचे अऊर यदि वा चर्मरोग चमड़ी म फैल गयी हय, त याजक भूरो बाल ख नहीं ढूंढे; कहालीकि ऊ आदमी अशुद्ध हय। 37 पर यदि ओकी नजर म चर्मरोग जसो को वसोच हय, अऊर ऊ जागा पर कारो बाल उग्यो हय, त चर्मरोग अच्छी भय गयी हय, अऊर ऊ आदमी शुद्ध हय; याजक ओख शुद्धच ठहराये।
38 फिर यदि कोयी आदमी यां बाई को चमड़ी म चमकदार सफेद दाग होना, 39 त याजक जांचे, यदि चमड़ी म हि दाग थोड़ो सफेद होना, त ऊ समझे कि यो दागच आय; त ऊ आदमी शुद्ध हय।
40 “फिर जेको मुंड को बाल झड़ गयो होना, त समझनो कि ऊ टक्कल हय पर शुद्ध हय।” 41 अऊर यदि कोयी आदमी को मुंड को सामने को अऊर कनपटी को बाल झड़ गयो हय, त ओको मस्तक टक्कल हय पर ऊ शुद्ध हय। 42 पर यदि टक्कल मुंड पर यां मस्तक पर लाल जसो सफेद दाग होना, त समझनो कि ऊ ओको टक्कल मुंड यां मस्तक पर निकल्यो हुयो कोढ़ आय। 43 येकोलायी याजक ओख जांचे, यदि ओको टक्कल मुंड यां टक्कल मस्तक पर चमड़ी को कोढ़ को समान लाल जसो सफेद हय,जसो चमड़ी को कोढ़ म होवय हय, 44 त ऊ आदमी कोढ़ को रोगी हय अऊर अशुद्ध हय; अऊर याजक ओख निश्चितच अशुद्ध ठहराये; कहालीकि ऊ रोग ओको मुंड पर भयो हय।
45 कोढ़ जसो रोग को रोगी फट्यो कपड़ा पहिने अऊर ओको मुंड को बाल बिखरयो रहे, अऊर खल्लो को ओंठ ख झाक क पुकारे, “अशुद्ध, अशुद्ध!” 46 जितनो दिन तक ओको म रोग रहेंन उतनो दिन तक ऊ अशुद्ध रहेंन; अऊर ऊ अशुद्धच हय येकोलायी ऊ अकेलो रहे, ओकी रहन की जागा छावनी को बाहेरच रहे।
53 यदि याजक जांच कर क् देखे कि रोग कपड़ा को बन्यो हुयो हिस्सा म, यां चमड़ा की कोयी चिज म नहीं फैल्यो हय, 54 अऊर याजक वा दाग वालो चिज ख धोवन की आज्ञा दे, अऊर भी ओख सात दिन लायी अलग रखे। 55 अऊर धोवन को बाद याजक ऊ चिज की जांच करे, यदि दाग को रंग बदल्यो नहाय, अऊर दाग फैल्यो नहाय, त समझनो की वा चिज अशुद्ध हय; तुम ओख आगी म जलावो, चाहे दाग आगु को भाग म हो यां पीछु को भाग म। 56 पर यदि याजक जांच कर क् देखे कि धोवन को बाद दाग की चमक कम भय गयी हय, त याजक ऊ कपड़ा यां चमड़ा म सी फाड़ क निकाले; 57 अऊर यदि दाग कपड़ा म, यां कपड़ा को बन्यो हुयो हिस्सा म, यां चमड़ा की कोयी भी चिज म दिखायी देवय हय, त ऊ फिर सी फैल रह्यो हय; त तुम वा चिज ख आगी म जलाय देवो। 58 यदि ऊ उन को कपड़ा म होना, या चमड़ा की जो चिज होना ओको सी जब धोयी जायेंन अऊर दाग निकलती रहेंन, त वा दूसरी बार धोय क शुद्ध ठहरेंन।
59 त ऊन यां सन को कपड़ा म यां चमड़ा की बनी कोयी चिज म कोढ़ जसो दाग हय त ओख शुद्ध यां अशुद्ध ठहरान की याच व्यवस्था आय।
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