14 यहोशू न कह्यो, “परमेश्वर को भय मान क ओकी सेवा खरायी अऊर सच्चायी सी करो; अऊर जिन देवतावों की सेवा तुम्हरो पूर्वज मेशोपोटामियां अऊर मिस्र म करत होतो, उन्ख दूर कर क् परमेश्वर की सेवा करो। 15 अऊर यदि परमेश्वर की सेवा करनो तुम्ख बुरो लगय हय, त अज चुन लेवो कि तुम कौन की सेवा करो, चाहे उन देवतावों की उन्की सेवा तुम्हरो पूर्वज मेशोपोटामियां[j] म करत होतो, अऊर चाहे एमोरियों को देवतावों की सेवा करो जिन्को देश म तुम रह्य हय; पर मय त अपनो परिवार समेत परमेश्वरच की सेवा हमेशा करूं।”
16 तब लोगों न उत्तर दियो, “परमेश्वर ख त्याग क दूसरो देवतावों की सेवा करन को बिचार हम कभी नहीं करबो; 17 कहालीकि हमरो परमेश्वर यहोवा उच आय जो हम्ख अऊर हमरो पूर्वजों ख मिस्र देश सी निकाल लायो, अऊर हमरो देखतो देखतो बड़ो बड़ो आश्चर्यकर्म करयो, अऊर जो रस्ता पर अऊर जितनी जातियों को बीच म सी हम चलत आवत होतो ओन हमरी रक्षा करी; 18 [k]अऊर हमरो सामने सी यो देश म रहन वाली एमोरी अऊर सब जातियों ख निकाल दियो हय; येकोलायी हम भी परमेश्वर की सेवा करबो, कहालीकि हमरो परमेश्वर उच आय।”
19 यहोशू न लोगों सी कह्यो, “तुम सी परमेश्वर की सेवा नहीं होय सकय; कहालीकि ऊ पवित्र परमेश्वर आय; ऊ जलन रखन वालो परमेश्वर आय; ऊ तुम्हरो अपराध अऊर पाप माफ नहीं करेंन। 20 यदि तुम परमेश्वर ख त्याग क परायो देवतावों की सेवा करन लगो, त ऊ तुम्हरो भलो करतो आयो हय तब भी ऊ मुड़ क तुम्हरी हानि करेंन, अऊर तुम्हरो अन्त भी कर डालेंन।”
21 लोगों न यहोशू सी कह्यो, “नहीं; हम परमेश्वरच की सेवा करबो।”
22 यहोशू न लोगों सी कह्यो, “तुम खुदच अपनो गवाह हय कि तुम न परमेश्वर की सेवा करन को निर्नय लियो हय।” उन्न कह्यो,
23 यहोशू न कह्यो, “अपनो बीच म सी परायो देवतावों ख दूर कर क् अपनो अपनो मन इस्राएल को परमेश्वर यहोवा को तरफ लगावो।”
24 लोगों न यहोशू सी कह्यो, “हम त अपनो परमेश्वर यहोवाच की सेवा करबो, अऊर ओकीच बात मानबो।”
25 तब यहोशू न उच दिन लोगों सी वाचा बन्धायी, अऊर शकेम म उन्को लायी विधि अऊर नियम ठहरायो। 26 या पूरी बाते यहोशू न परमेश्वर की व्यवस्था की किताब म लिख दियो; अऊर एक बड़ो गोटा चुन क वहां ऊ बांझ झाड़ को खल्लो खड़ो करयो, जो परमेश्वर को पवित्र जागा म होतो। 27 तब यहोशू न लोगों सी कह्यो, “सुनो, यो गोटा हम लोगों को गवाह रहेंन, कहालीकि जितनो वचन परमेश्वर न हम सी कह्यो हय उन्ख येन सुन्यो हय; येकोलायी यो तुम्हरो गवाह रहेंन, असो नहीं होय कि तुम अपनो परमेश्वर सी मुकर जावो।” 28 तब यहोशू न लोगों ख अपनो अपनो निजी हिस्सा म जान लायी बिदा करयो।
31 यहोशू जब तक जीन्दो रह्यो, तब तक इस्राएली लोग परमेश्वर की उपासना करतो रह्यो, अऊर ओको मरन को बाद भी हि अगुवा को जीन्दो रहतो, जिन्न ऊ सब कुछ जो परमेश्वर न इस्राएलियों को लायी करयो होतो, देख क इस्राएल को लोग परमेश्वर की उपासना करतो रह्यो।
32 फिर यूसुफ की हड्डी जिन्ख इस्राएली लोग मिस्र सी लायो होतो हि शकेम नगर की जमीन को ऊ हिस्सा म गाड़ी गयी, जेक याकूब न शकेम नगर को पिता हमोर को टुरावों सी एक सौ चांदी को सिक्का म ले लियो होतो; येकोलायी ऊ यूसुफ की सन्तान को निजी हिस्सा भय गयो।
33 हारून को टुरा एलीआजार भी मर गयो; अऊर ओख एप्रैम को पहाड़ी देश को गिबा नगर म माटी दी गयी, जो ओको टुरा पीनहास ख दियो गयो होतो।
<- यहोशू 23- a 24:2 उत्पत्ति ११:२७
- b 24:3 उत्पत्ति 12:1-9; 21:1-3
- c 24:4 उत्पत्ति २५:२४-२६; ३६:८; ४६:१-७; व्यवस्थाविवरन २:५
- d 24:7 निर्गमन 14:1-31
- e 24:8 गिनती २१:२१-३५
- f 24:10 गिनती २२:१; २४:२५
- g 24:11 यहोशू ३:१४-१७; ६:१-२१
- h 24:12 निर्गमन २३:२८; व्यवस्थाविवरन ७:२०
- i 24:13 व्यवस्थाविवरन ६:१०,११
- j 24:15 महा नदी
- k 24:18 प्रेरितों ७:४५
- l 24:30 यहोशू १९:४९-५०
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