9 तब पिलान वालो को प्रधान न फिरौन सी कह्यो, “मोरो अपराध अज मोख याद आयो। 10 जब फिरौन अपनो दासों सी गुस्सा भयो होतो, तब मोख अऊर जेवन बनान वालो को प्रधान ख कैद कराय क् अंगरक्षकों को प्रधान को घर को जेलखाना म डाल दियो होतो; 11 तब हम दोयी न एकच रात म सपनो देख्यो अऊर ऊ सपनो को अर्थ अलग अलग होतो। 12 वहां हमरो संग एक इब्री जवान होतो, जो अंगरक्षकों को प्रधान को दास होतो; तब हम न ओख अपनो अपनो सपनो बतायो अऊर ओन हमरो सपनो को अर्थ हम्ख बतायो, हम म सी एक एक को सपनो को अर्थ ओन बताय दियो। 13 अऊर जसो जसो अर्थ ओन बतायो होतो, वसोच भयो भी, यानेकि मोख त मोरो पद फिर मिल्यो, पर ऊ फासी पर लटकायो गयो।”
14 तब फिरौन न यूसुफ ख बुलायो; अऊर ऊ तुरतच जेलखाना सी बाहेर निकाल्यो गयो, अऊर बाल बनाय क अऊर कपड़ा बदल क फिरौन को आगु आयो। 15 फिरौन न यूसुफ सी कह्यो, “मय न एक सपनो देख्यो हय, अऊर ओको अर्थ बतावन वालो कोयी भी नहाय; अऊर मय न तोरो बारे म सुन्यो हय कि तय सपनो सुनतोच ओको अर्थ बताय देवय हय।”
16 यूसुफ न फिरौन सी कह्यो, “मय त कुछ भी नहीं जानु हय, पर परमेश्वरच फिरौन लायी शुभ वचन देयेंन।”
17 तब फिरौन यूसुफ सी कहन लग्यो, “मय न अपनो सपनो म देख्यो कि मय नील नदी को किनारे खड़ो हय। 18 फिर देख्यो, कि नील नदी म सी सात मोटी अऊर सुन्दर सुन्दर गाय निकल क घास चरन लगी। 19 तब अऊर देख्यो, कि उन्को पीछू सात अऊर गाय निकली, जो पतली अऊर बहुत छोटी अऊर कमजोर हंय; मय न पूरो मिस्र देश म असी बदसूरत गाय कभी नहीं देख्यो। 20 इन कमजोर अऊर बदसूरत गायों न उन पहिली सातों मोटी मोटी गायों ख खाय लियो; 21 अऊर जब हि उन्ख खाय गयी तब यो मालूम नहीं होत रह्य कि हि उन्ख खाय गयी हंय, कहालीकि हि पहिले को जसो जसी की वसी बदसूरत रही। तब मय जग गयो। 22 तब मय न दूसरो सपनो देख्यो, कि एकच डंठल म सात अच्छी अच्छी अऊर अनाज सी भरी हुयी लोम्ब निकली। 23 तब देखू हय, कि उन्को पीछू अऊर सात मुरझायी, पतली, अऊर पूर्व की हवा सी सुखी हुयी लोम्ब निकली। 24 अऊर इन पतली लोम्ब न उन सात अच्छी अच्छी लोम्ब ख खाय लियो। येख मय न तान्त्रिकों ख बतायो, पर येको अर्थ बतावन वालो कोयी नहीं मिल्यो।”
25 तब यूसुफ न फिरौन सी कह्यो, “तोरो सपनो का एकच हय, परमेश्वर जो काम करनो चाहवय हय, ओख ओन फिरौन पर दरसायो हय। 26 हि सात अच्छी अच्छी गाय सात साल हंय; अऊर हि सात अच्छी अच्छी लोम्ब भी सात साल हंय; यो तरह सी सपनो एकच आय। 27 तब उन्को पीछू जो कमजोर अऊर गरीब गाय निकली, अऊर जो सात सुखी अऊर पूर्व की हवा सी मुरझायी हुयी लोम्ब निकाली, हि अकाल को सात साल होयेंन। 28 या वाच बात आय जो मय फिरौन सी कह्य चुक्यो हय कि परमेश्वर जो काम करनो चाहवय हय, ओख ओन फिरौन ख दिखायो हय। 29 सुन, असो सात साल आयेंन जब पूरो मिस्र देश म बहुत तरह सी अनाज पैदा होयेंन। 30 उन्को बाद सात साल अकाल को आयेंन, अऊर पूरो मिस्र देश म लोग हि पूरी उपज ख भूल जायेंन; अऊर अकाल सी देश को नाश होयेंन। 31 अऊर अकाल इतनो भयानक होयेंन कि अच्छी फसल अऊर उपज कोयी ख याद तक नहीं रहेंन। 32 अऊर फिरौन न जो यो सपनो दोय बार देख्यो हय येको भेद योच आय कि यो बात परमेश्वर को तरफ सी नियुक्त होय गयी हय, अऊर परमेश्वर येख जल्दीच पूरो करेंन।
33 “येकोलायी अब फिरौन कोयी समझदार अऊर बुद्धिमान आदमी ख ढूंढ क ओख मिस्र देश पर प्रधान मन्त्री ठहरायो। 34 अऊर फिरौन पूरो मिस्र देश म अधिकारियों ख ठहराये, अऊर सात साल जो अच्छी फसल अऊर उपज को हंय ऊ समय जमीन की उपज को पाचवों भाग लियो करे। 35 अऊर तब अच्छी फसल को सात सालों म सब तरह की खान की चिज जमा करे, अऊर नगर नगर म जेवन लायी अनाज को भण्डार घर खोले अऊर अनाज की रक्षा करे। 36 या जेवन की चिज अकाल को उन सात सालों लायी हंय, जो मिस्र देश म आयेंन, देश को जेवन लायी रखी हय, जेको सी देश को ऊ अकाल सी सत्यानाश नहीं हो जाये।”
46 जब यूसुफ मिस्र को राजा फिरौन को जवर खड़ो भयो, तब ऊ तीस साल को होतो। ऊ फिरौन को जवर सी निकल क पूरो मिस्र देश म दौरा करन लग्यो। 47 पहिले को सात सालों म जमीन बहुत तरह सी अनाज पैदा करती रही, 48 अऊर यूसुफ उन सातों सालों म सब तरह की जेवन की चिजे, जो मिस्र देश म होत रह्य, उन्ख जमा कर क् नगरों म रखतो गयो; अऊर हर एक नगर को चारयी तरफ को खेतों की जेवन की चिजे ख ऊ उच नगर म जमा करतो गयो। 49 यो तरह यूसुफ न अनाज ख समुन्दर की रेतु को जसो बहुत अच्छो सी एक एक कर क् गिन क रख्यो, तब वहां इतनी फसल भय गयी कि यूसुफ न ओख गिननोच छोड़ दियो।
50 अकाल को पहिलो साल को आनो सी पहिले यूसुफ को दोय टुरा पैदा भयो, ओन नगर को याजक पोतीपेरा की बेटी आसनत न उन्ख जनम दियो। 51 यूसुफ न अपनो बड़ो टुरा को नाम यो कह्य क मनश्शे[h] रख्यो, कि “परमेश्वर न मोरो सी मोरी पूरी परेशानी, अऊर मोरो बाप को पूरो घराना भुलाय दियो हय।” 52 दूसरो को नाम ओन यो कह्य क एप्रैम[i] रख्यो, कि “परमेश्वर न मोख ऊ देश म फलवन्त करयो जित मोख दु:ख भोगनो पड़्यो होतो।”
53 मिस्र देश को अच्छी फसल पकन को सात साल खतम होय गयो; 54 [j]अऊर यूसुफ को कहन को अनुसार सात सालों लायी अकाल शुरू भय गयो। सब देशों म अकाल पड़न लग्यो, पर मिस्र देश म अनाज होतो। 55 [k]जब मिस्र को पूरो देश भूखो मरन लग्यो; तब प्रजा फिरौन सी चिल्लाय चिल्लाय क खाना मांगन लग्यो; अऊर ऊ सब मिस्रियों सी कहत रह्य, “यूसुफ को जवर जावो; अऊर जो कुछ ऊ तुम सी कहेंन, उच करो।” 56 जब अकाल पूरी धरती पर फैल गयो, अऊर मिस्र देश म अकाल को रूप भयंकर भय गयो, तब यूसुफ सब भण्डार घर ख खोल क मिस्रियों ख अनाज बेचन लग्यो। 57 येकोलायी पूरी धरती को लोग मिस्र देश म अनाज लेन लायी यूसुफ को जवर आन लग्यो, कहालीकि पूरी धरती पर भयंकर अकाल होतो।
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