1 “फिर जो नियम तोख उन्को समझानो हंय हि यो आय, 2 जब तुम कोयी इब्री दास लेय ले, तब ऊ छय साल तक सेवा करतो रहेंन, पर सातवों साल बिना कीमत चुकाये स्वतंत्र होय क जाय सकेंन। 3 यदि ऊ बिना शादी को आयो हय, त ऊ बिना शादी कोच चली जाये; अऊर पत्नी संग आयो हय, त पत्नी को संग चली जाये। 4 [a]यदि ओको मालिक न ओको लायी पत्नी बनाय दियो हय, अऊर ओको सी ओको संतान भयी हय, त ओकी पत्नी अऊर बच्चा ओको स्वामी कोच रहेंन, अऊर ऊ अकेलो जाय सकेंन। 5 पर यदि ऊ दास दृढ़ता सी कहेंन, ‘मय अपनो स्वामी, अऊर अपनी पत्नी, अऊर बच्चा सी प्रेम रखू हय, येकोलायी मय स्वतंत्र होय क नहीं जाऊं;’ 6 त ओको मालिक ओख न्याय करन वालो को आगु लिजाय क; फिर ओख दरवाजा को चौखट जवर लिजाय क बारीक सुजा सी ओको कान छेदेंन; तब ऊ अपनो मालिक की हमेशा सेवा करेंन।”
7 “यदि कोयी अपनी टुरी ख दासी होन लायी बेच डाले, त ऊ दासी होन को वजह आदमी-दासों को जसो स्वतंत्र होय क बाहेर नहीं जाय सकेंन। 8 यदि वा अपनो मालिक ओख अपनी पत्नी बनाये, अऊर फिर ओख सी खुश नहीं रह्य, त वापस ओको बाप ख दाम सी छुड़ायी जान दे; पर ओको विश्वास घात करन को बाद ओख विदेशी लोगों को हाथ बेचन को ओको अधिकार नहीं रहेंन। 9 यदि ओन अपनो बेटा लायी चुन्यो हय, त बेटी जसो व्यवहार करो। 10 यदि ऊ दूसरी सी बिहाव कर ले, तब ऊ पहिली पत्नी ख खाना, कपड़ा, की कमी नहीं होन दे, अऊर कोयी सुख सी दूर नहीं रखे। 11 अऊर यदि ऊ इन तीन बातों म कमी करेंन, त वा बाई बिना दाम चुकायो स्वतंत्र होय जायेंन।”
15 “जो अपनो माय-बाप ख मारय हय, ओख निश्चय मार डाल्यो जायेंन।”
16 [e]“जो कोयी आदमी ख अपहरन करय, ओख बिकय यां ओको जवर मिलय त ऊ भी निश्चय मार डाल्यो जाये।”
17 [f]“जो कोयी अपनो माय-बाप ख श्राप दे ऊ भी निश्चय मार डाल्यो जायेंन।”
18 “यदि आदमी झगड़य हय, अऊर एक दूसरो ख गोटा या घूसा सी असो मारे कि ऊ मरयो नहीं पर बीस्तर पर पड़्यो रहो, 19 त जब उठ क फिर लाठी को सहारा चलन फिरन लगेंन, तब ऊ मारन वालो निर्दोष ठहरेंन; उच दशा म ऊ ओको पड़्यो रहन को समय की हानि भर दे, अऊर ओख ठीक भी कराय देंन।”
20 “यदि कोयी अपनो दास यां दासी ख लाठी सी असो मारयो कि ऊ ओको मारन सी मर जाये, तब ओख निश्चय सजा दियो जाये। 21 पर यदि ऊ एक दोय दिन जीन्दो रहेंन, त ओको स्वामी ख सजा नहीं दियो जाये; कहालीकि ऊ दास ओको धन हय।
22 “यदि कोयी आदमी मार पीट करतो समय ओको धक्का कोयी गर्भवती बाई ख लगन सी ओको गर्भ गिर जाये, पर अऊर कुछ नुकसान नहीं होय, त मारन वालो सी ऊ बाई को पति जो भी मांग करय उतनो दण्ड की रकम दियो जाये जितनो पन्च निश्चित करेंन। 23 पर यदि मार-पीट म कुछ हानि पहुंच्यो, त जीव को बदला जीव देनो पड़ेंन, 24 [g]अऊर तुम आंखी को बदला आंखी को, अऊर दात को बदला दात को, अऊर हाथ को बदला हाथ, अऊर पाय को बदला पाय लेवो, 25 अऊर दाग को बदला दाग, अऊर घाव को बदला घाव, अऊर मार को बदला मार की सजा आय।”
26 “जब कोयी अपनो दास यां दासी की आंखी पर असो मारयो कि फूट जाये, त ऊ ओकी आंखी को बदला ओख स्वतंत्र कर क् जान देजो। 27 अऊर यदि ऊ अपनो दास या दासी ख मार क् ओको दात तोड़ डालेंन, त ऊ ओको दात को बदला ओख स्वतंत्र कर क् जान देयेंन।”
33 “यदि कोयी आदमी न गड्डा खोल क या खोद क ओख नहीं झाक्यो, अऊर ओख म कोयी को बईल यां गधा गिर जाये, 34 त जेको ऊ गड्डा आय ऊ ओको नुकसान ख भर दे; ऊ जनावर को मालिक ख ओको कीमत भर देंन, अऊर मरयो हुयो जनावर गड्डा वालो को होयेंन।”
35 यदि कोयी को बईल कोयी दूसरों को बईल ख असो मारे कि ऊ मर जाये, त हि दोयी आदमी जीन्दो बईल ख बेच क ओकी कीमत आपस म अरधो अरधो बाट ले; अऊर मरयो हुयो पशु को शव ख भी वसोच बाट ले। 36 यदि यो मालूम पड़े कि ऊ बईल की पहिलो सी सींग मारन की आदत होती, पर ओको मालिक न ओख बान्ध क् नहीं रख्यो, त निश्चय ऊ बईल को बदला बईल भर दे, पर मरयो शव ओकोच ठहरेंन।
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