5 शूशन गढ़ म मोर्दकै नाम को एक यहूदी रहत होतो, जो कीश नाम को एक बिन्यामीनी को परनाती, शिमी को नाती, अऊर याईर को बेटा होतो। 6 [a]ऊ उन बन्दियों को संग यरूशलेम सी बन्धुआई म गयो होतो, जिन्ख बेबीलोन को राजा नबूकदनेस्सर, यहूदा को राजा यकोन्याह को संग बन्दी बना कर क् ले गयो होतो। 7 ओन हदस्सा नाम की अपनी काका बहिन ख, जो एस्तेर भी कहलात होती, ओख पाल्यो पोस्यो होतो; कहालीकि ओको माय बाप कोयी नहीं होतो, अऊर वा लड़की सुन्दर अऊर रूपवती होती, अऊर जब ओको माय बाप मर गयो, तब मोर्दकै न ओख अपनी टुरी को रूप म पाल्यो। 8 जब राजा की आज्ञा अऊर नियम सुनायो गयो, अऊर बहुत सी युवतियां, शूशन गढ़ म हेगे को अधिकार म जमा करी गयी, तब एस्तेर भी राजभवन म स्त्रियों को प्रबन्धक हेगे को अधिकार म सौंपी गयी। 9 वा एस्तेर ओकी नजर म अच्छी लगी; अऊर ऊ ओको सी खुश भयो, तब ओन बिना विलम्ब ओख राजभवन म सी सिंगार करन की चिजे, अऊर ओको जेवन, अऊर ओको लायी चुनी हुयी सात सहेलियां भी दी, अऊर ओख अऊर ओकी सहेलियों ख रनवास म सब सी अच्छी रहन की जागा दी। 10 एस्तेर न अपनो लोग नहीं बतायो होतो, न अपनो कुल, कहालीकि मोर्दकै न ओख आज्ञा दी होती कि ओख नहीं बताजो। 11 मोर्दकै हर दिन रनवास को आंगन को आगु टहलत होतो ताकि एस्तेर को हाल चाल जान सके कि अऊर वा कसी हय?
12 जब एक एक लड़की की पारी आयी, कि वा क्षयर्ष राजा को जवर जाये अऊर यो ऊ समय भयो जब ओको संग स्त्रियों लायी ठहरायो हुयो नियम को अनुसार बारा महिना तक व्यवहार करयो गयो होतो; मतलब उन्को सिंगार करन को दिन यो रीति सी बीत गयो, कि छय महिना तक गन्धरस को तेल लगायो जात होतो, अऊर छय महिना तक सुगन्ध की चिज, अऊर स्त्रियों ख शुद्ध करन को दूसरो सामान लगायो जात होतो। 13 यो तरह सी वा लड़की जब राजा को जवर जात होती, तब जो कयी वा चाहत होती कि रनवास सी राजभवन म ले जाये, ऊ ओख दियो जात होतो। 14 शाम ख त वा जात होती अऊर सुबेरे वा लौट क रनवास को दूसरो घर म जाय क रखेलियों को प्रबन्धक राजा को किन्नर शाशगज को अधिकार म होय जात होती, अऊर राजा को जवर फिर नहीं जात होती। यदि राजा ओको सी प्रसन्न होय जात होतो, तब ऊ नाम ले क बुलायी जात होती।
15 जब मोर्दकै को काका अबीहैल की टुरी एस्तेर, जेख मोर्दकै न टुरी मान क रख्यो होतो, ओकी पारी आयी की राजा को जवर जाये, तब जो कुछ स्त्रियों को प्रबन्धक राजा को किन्नर अधिकारी हेगे न ओको लायी ठहरायो होतो, ओको सी ज्यादा ओन अऊर कुछ नहीं मांग्यो। जितनों न एस्तेर ख देख्यो, हि सब ओको सी प्रसन्न भयो। 16 तब एस्तेर राजभवन म राजा क्षयर्ष को जवर ओको राज्य को सातवों साल को तेबेत नाम को दसवों महीना म पहुंचायी गयी। 17 राजा न एस्तेर ख अऊर सब स्त्रियों सी ज्यादा प्रेम करयो, अऊर दूसरी सब कुंवारियों सी ज्यादा ओको अनुग्रह अऊर कृपा की दृष्टि ओकोच पर भयी, यो वजह ओन ओकी मुंड पर राजमुकुट रख्यो अऊर ओख वशती की जागा पर रानी बनायो। 18 तब राजा न अपनो सब हाकिमों अऊर कर्मचारियों ख एक बड़ो भोज दियो, अऊर ओख एस्तेर को भोज कह्यो; अऊर क्षेत्रों म छुट्टी दिलायी, अऊर अपनी उदारता को लायक इनाम भी बाट्यो।
- a 2:6 २ राजा २४:१०-१६; २ इतिहास ३६:१०
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