1 “ओ दिन दाऊद के घराना अऊ यरूसलेम के निवासीमन ला ओमन के पाप अऊ असुधता ले सुध करे बर एक सोता फूटही।
2 “ओ दिन, मेंह देस ले जम्मो मूरतीमन के नांव ला मिटा दूहूं, अऊ ओमन ला फेर कभू सुरता नइं करे जाही।” सर्वसक्तिमान यहोवा ह ये घोसना करत हे। “मेंह देस ले अगमजानीमन ला अऊ असुधता के आतमा ला निकाल दूहूं। 3 अऊ तभो ले कहूं कोनो अगमबानी करे, त ओला जनम देवइया ओकर दाई-ददा ओला कहिहीं, ‘जरूरी अय कि तें मर जा, काबरकि तेंह यहोवा के नांव म लबरा बात कहे हस।’ तब ओकर खुद के दाई-ददामन ओ अगमबानी करइया ला तलवार ले मार डारहीं।
4 “ओ दिन हर एक अगमजानी ह अपन अगम के दरसन बर सरमिंदा होही। ओमन मनखेमन ला धोखा देय बर चुंदी ले बने अगमजानीमन के कपड़ा नइं पहिरहीं। 5 पर हर एक ह कहिही, ‘मेंह अगमजानी नो हंव। मेंह एक किसान अंव; मेंह अपन जवानी ले ही खेत-खार ले अपन जिनगी चलात आय हंव।’ 6 कहूं कोनो ओकर ले पुछय, ‘तोर देहें म ये घावमन कइसे हवंय?’ त ओह जबाब दीही, ‘मोर संगीमन के घर म मोला ये चोट लगे हवय।’ ”