9 “धरती के जऊन राजामन ओकर संग छिनारी अऊ भोग-बिलास करिन, ओमन जब ओकर जरे के धुआं ला देखहीं, त ओमन रोहीं अऊ ओकर बर सोक मनाहीं। 10 ओमन ओकर पीरा ले डरके दूरिहा म ठाढ़ होहीं अऊ ये कहिहीं,
“ ‘हे महान सहर! हाय! तोर ऊपर हाय!
हे बेबिलोन, सक्तिसाली सहर!
एकेच घंटा म तोला तोर दंड मिल गीस!’
11 “धरती के बेपारीमन ओकर बर रोहीं अऊ कलपहीं, काबरकि अब कोनो ओमन के ये मालमन ला नइं बिसाही— 12 पानी जहाज म लदे सोन, चांदी, कीमती पथरा, मोती; सुघर मलमल, बैंगनी, रेसमी अऊ सिन्दूरी लाल कपड़ा; जम्मो किसम के महकत कठवा, अऊ हाथी-दांत, कीमती कठवा, कांसा, लोहा अऊ संगमरमर के बने जम्मो किसम के चीज; 13 पानी जहाज म लदे दालचीनी, मसाला, धूप, इतर, लोबान, अंगूर के मंद, जैतून के तेल, सुघर पीसान अऊ गहूं; पसु-धन अऊ भेड़; घोड़ा अऊ रथ; अऊ गुलाम के रूप म बेचे गय मनखेमन।
14 “बेपारीमन कहिहीं, ‘जऊन फर के लालसा तेंह करत रहय, ओह तोर ले दूरिहा हो गे हवय। तोर जम्मो धन-संपत्ति अऊ तड़क-भड़क खतम हो गीस, अऊ ओह तोला फेर कभू नइं मिलय।’ 15 जऊन बेपारीमन ये चीजमन ला बेचके बेबिलोन सहर ले धन कमाय रिहिन, ओमन ओकर पीरा ले डरके दूरिहा म ठाढ़ होहीं। ओमन रोहीं अऊ सोक मनाहीं 16 अऊ कलपत ये कहिहीं:
“ ‘हे महान सहर! हाय! तोर ऊपर हाय!
तेंह सुघर मलमल, बैंगनी अऊ सिन्दूरी लाल कपड़ा पहिरे रहय,
अऊ सोन, कीमती पथरा अऊ मोती ले सजे रहय!
17 एकेच घंटा म ये जम्मो धन ह नास हो गीस!’
“पानी जहाज के हर कप्तान, पानी जहाज म हर यातरा करइया, हर डोंगा खेवइया अऊ हर ओ मनखे, जऊन ह समुंदर ले अपन जिनगी चलाथे, ये जम्मो के जम्मो दूरिहा म ठाढ़े रहिहीं। 18 जब ओमन ओकर जरे के धुआं ला देखहीं, त ओमन चिचियाके कहिहीं, ‘का ये महान सहर सहीं कभू कोनो सहर रिहिस?’ 19 ओमन अपन मुड़ ऊपर धुर्रा ला डारहीं, अऊ रोवत अऊ कलपत ओमन चिचिया-चिचियाके कहिहीं:
“ ‘हे महान सहर! हाय! तोर ऊपर हाय!
येह ओ सहर ए,
जेकर धन के जरिये समुंदर के जम्मो जहाज के मालिकमन धनी हो गीन!
एकेच घंटा म, ओह नास हो गीस!’
20 “हे स्वरग म रहइयामन, ओकर ऊपर आनंद मनावव!
हे पबितर मनखेमन आनंद मनावव!
हे प्रेरित अऊ अगमजानीमन, आनंद मनावव!
काबरकि ओह तुम्हर संग जइसने बरताव करे रिहिस,
परमेसर ह ओला ओकर सजा दे हवय।”
बेबिलोन के दंड के आखिरी स्थिति
21 तब एक सक्तिसाली स्वरगदूत ह चक्की के एक बड़े पाट सहीं पथरा ला उठाईस अऊ ये कहत ओला समुंदर म फटिक दीस:
“महान सहर बेबिलोन ह
अइसने बेरहमी ले फटिक दिये जाही,
अऊ ओकर फेर कभू पता नइं चलही।
22 बीना बजइया अऊ संगीतकार, बांसुरी बजइया अऊ तुरही बजइयामन के संगीत के अवाज,
ये सहर म फेर कभू सुनई नइं पड़ही।
कोनो काम के कोनो घलो कारीगर,
ये सहर म फेर कभू नइं मिलही।
जांता चले के अवाज,
ये सहर म फेर कभू सुनई नइं पड़ही।
23 दीया के अंजोर,
ये सहर म फेर कभू नइं चमकही।
दूल्हा अऊ दुलहिन के अवाज,
ये सहर म फेर कभू सुनई नइं पड़ही।
ये सहर के बेपारीमन संसार के खास मनखे रिहिन।
ये सहर ह अपन जादू के दुवारा जम्मो देस के मनखेमन ला बहकाय रिहिस।
24 ये सहर म अगमजानी अऊ परमेसर के पबितर मनखेमन के लहू पाय गीस,
अऊ धरती ऊपर जऊन मनखेमन मार डारे गीन, ओ जम्मो के लहू ये सहर म पाय गीस।”
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