1 एकरसेति, हे मोर भाईमन हो! तुमन ले मेंह मया करथंव अऊ तुमन म मोर जी लगे रहिथे। तुमन मोर आनंद अऊ मोर मुकुट अव। हे मयारू संगवारीमन, अइसनेच तुमन परभू के बिसवास म मजबूत बने रहव।
4 परभू म सदा आनंदित रहव। मेंह येला फेर कहथंव: आनंदित रहव! 5 जम्मो झन जान जावंय कि तुमन नम्र मनखे अव। परभू ह लकठा म हवय। 6 कोनो बात के फिकर झन करव, पर हर एक बात म, पराथना अऊ निबेदन के दुवारा, धनबाद के संग तुमन अपन बिनती ला परमेसर के आघू म रखव। 7 तब परमेसर के सांति, जऊन ह मनखे के समझ के बाहिर अय, तुम्हर हिरदय अऊ मन के रखवारी मसीह यीसू म करही।
8 आखिर म, हे भाईमन हो, जऊन बात ह सच ए, जऊन बात ह आदर के लईक ए, जऊन बात ह सही ए, जऊन बात ह निरमल ए, जऊन बात ह मयारू ए, जऊन बात ह मन ला भाथे—यदि कोनो बात ह उत्तम या परसंसा के लईक ए, त अइसने बात के बारे म सोचव। 9 जऊन बात तुमन मोर ले सीखे हवव या मोर ले पाय हवव या मोर ले सुने हवव या मोर म देखे हवव, ओकरेच मुताबिक चलव। अऊ सांति के परमेसर ह तुमन के संग रहिही।
14 तभो ले, तुमन बने करेव कि मोर तकलीफ म मदद करेव। 15 हे फिलिप्पीमन, जइसने कि तुमन जानथव कि सुघर संदेस के परचार के सुरूआती दिन म, जब मेंह मकिदुनिया प्रदेस ले चलेंव, त सिरिप तुम्हर छोंड़ अऊ कोनो घलो कलीसिया देय अऊ लेय के मामला म मोर मदद नइं करिस। 16 अऊ त अऊ जब मेंह थिस्सलुनीके सहर म रहेंव अऊ मोला घटी रिहिस, त तुमन बार-बार मोर करा मदद पठोय रहेव। 17 अइसने बात नो हय कि मेंह दान चाहथंव, पर मेंह चाहथंव कि तुमन अइसने काम करव, जऊन ह तुम्हर जिनगी के खाता म जोड़े जावय। 18 मेंह जम्मो चीज ला पा गे हवंव, बल्कि मोला जरूरत ले जादा मिल गे हवय। तुमन इपफ्रुदीतुस के हांथ म जऊन भेंट ला पठोय रहेव, ओला पाके मोर मन ह संतोस हो गे हवय। ओमन एक खुसबूदार भेंट, गरहन करे लईक बलिदान अंय, जेकर ले परमेसर ला खुसी होथे। 19 अऊ मोर परमेसर ह मसीह यीसू म अपन महिमामय धन के मुताबिक तुम्हर जम्मो जरूरत ला पूरा करही।
20 परमेसर, हमर ददा के महिमा जुग-जुग होवय। आमीन।
22 इहां के जम्मो संत, खास करके जऊन मन महाराजा के घराना के अंय, तुमन ला जोहार कहत हवंय।
- a कुछू हस्तलिपि म आमीन सबद नइं ए
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