1 ओ जगह ला छोंड़के, यीसू ह अपन चेलामन संग अपन नगर नासरत म आईस। 2 बिसराम के दिन, ओह सभा-घर म सिकछा देवन लगिस अऊ अब्बड़ मनखेमन ओकर बात ला सुनके चकित होईन।
4 यीसू ह ओमन ला कहिस, “अगमजानी ह अपन नगर, अपन कुटुम्ब अऊ अपन घर के छोंड़ जम्मो जगह आदरमान पाथे।” 5 ओह उहां एको चमतकार के काम नइं कर सकिस। सिरिप कुछू बिमरहामन ऊपर हांथ रखके ओमन ला बने करिस। 6 अऊ ओह ओमन के कम बिसवास ला देखके अचम्भो करिस।
8 ओकर हुकूम ये रिहिस, “डहार बर सिरिप लउठी के छोंड़ अऊ कुछू झन लेवव, न रोटी, न झोला अऊ न पटका म पईसा। 9 पनही ला पहिरव, पर अपन संग म एक ठन घलो अतकिहा कुरता झन लेवव। 10 जब भी तुमन कोनो घर म जावव, त ओ सहर ला छोंड़त तक ओहीच घर म ठहिरव। 11 अऊ कहूं कोनो ठऊर के मनखेमन तुमन ला गरहन नइं करंय अऊ तुम्हर बात ला नइं सुनंय, त उहां ले निकलत बेरा अपन गोड़ के धुर्रा ला झर्रा देवव ताकि येह ओमन के बिरूध एक गवाही होवय।”
12 तब चेलामन जाके परचार करिन कि मनखेमन पाप ले पछताप करंय। 13 ओमन कतको परेत आतमामन ला निकालिन अऊ कतको बिमरहामन ला तेल म अभिसेक करके ओमन ला बने करिन।
14 हेरोदेस राजा एकर बारे म सुनिस, काबरकि यीसू के नांव ह जम्मो अंग फईल गे रहय। कुछू मनखेमन कहत रिहिन, “यूहन्ना बतिसमा देवइया ह मरे म ले जी उठे हवय अऊ एकर कारन ओकर दुवारा चमतकार के काममन होवत हवंय।”
15 आने मन कहिन, “ओह एलियाह अय।”
16 पर जब हेरोदेस ह येला सुनिस, त ओह कहिस, “येह यूहन्ना बतिसमा देवइया ए, जेकर मुड़ ला मेंह कटवा दे रहेंव, ओहीच ह जी उठे हवय!”
17 काबरकि हेरोदेस ह खुद हुकूम दे रिहिस कि यूहन्ना ला बंदी बना लव अऊ ओला बांधके जेल म डाल दव। ओह अपन भाई फिलिप्पुस के घरवाली हेरोदियास के कारन अइसने करे रिहिस। ओह हेरोदियास ले बिहाव कर ले रिहिस। 18 काबरकि यूहन्ना ह हेरोदेस ला कहे रिहिस, “अपन भाई के घरवाली ला रखई तोर बर कानून के मुताबिक उचित नो हय।” 19 एकरसेति हेरोदियास ह अपन मन म यूहन्ना बर बईरता रखय अऊ ओला मरवाय बर चाहत रहय। पर ओला मऊका नइं मिलत रिहिस। 20 काबरकि हेरोदेस ह यूहन्ना ला धरमी अऊ पबितर मनखे जानके ओकर ले डराय अऊ ओला बंचाके रखे रहय। हेरोदेस ह यूहन्ना के बात ला सुनके घबरावय, तभो ले ओकर बात ला सुने के ईछा रखय।
21 आखिर म ओ समय आईस, जब हेरोदेस ह अपन जनम दिन म एक बड़े जेवनार करिस। ओह राज के बड़े अधिकारी, पलटन के सेनापति अऊ गलील के बड़े मनखेमन ला नेवता दीस। 22 तब हेरोदियास के बेटी ह आके उहां जम्मो झन के आघू म नाचिस। ओकर नचई ला देखके हेरोदेस अऊ ओकर नेवताहारीमन खुस हो गीन।
24 छोकरी ह बाहिर जाके अपन दाई ले पुछिस, “मेंह का मांगंव?”
25 छोकरी ह तुरते भीतर राजा करा गीस अऊ बिनती करके कहिस, “मेंह चाहथंव कि तेंह यूहन्ना बतिसमा देवइया के मुड़ ला एक ठन थाली म मोर करा मंगवा दे।”
26 तब राजा ह बहुंत दुखी होईस, पर अपन किरिया अऊ जेवनार म आय पहुनामन के सेति ओला इनकार करे नइं चाहिस। 27 एकरसेति, राजा ह तुरते एक सिपाही ला हुकूम देके, यूहन्ना के मुड़ ला लाने बर पठोईस। सिपाही ह जेल म जाके यूहन्ना के मुड़ ला काटिस, 28 अऊ ओ मुड़ ला एक ठन थाली म लानके छोकरी ला दीस अऊ ओ छोकरी ह येला अपन दाई ला दे दीस। 29 येला सुनके यूहन्ना के चेलामन आईन अऊ ओकर लास ला उठाके ले गीन अऊ कबर म रख दीन।
30 प्रेरितमन लहुंटके यीसू करा जूरिन अऊ जऊन कुछू ओमन करे अऊ सिखोय रिहिन, ओ जम्मो बात ओला बताईन। 31 तब ओह ओमन ला कहिस, “चलव, कोनो सुनसान ठऊर म चलके थोरकन सुरता लेवव।” काबरकि अब्बड़ मनखेमन आवत-जावत रिहिन, अऊ ओमन ला खाय के मऊका घलो नइं मिलत रिहिस।
32 एकरसेति ओमन डोंगा म चघके एक ठन सुनसान जगह म चल दीन। 33 ओमन ला जावत देखके, कतको झन ओमन ला चिन डारिन अऊ झील के तीरे-तीर दऊड़िन अऊ आघू हबरके उहां ओमन ले मिलिन। 34 जब यीसू डोंगा ले उतरिस अऊ मनखेमन के एक बड़े भीड़ ला देखिस, त ओला ओमन के ऊपर तरस आईस, काबरकि ओमन बिगर चरवाहा के भेड़मन सहीं रिहिन अऊ ओह ओमन ला बहुंत अकन बात सिखोवन लगिस।
35 जब बेरा ह ढरक गीस, तब ओकर चेलामन ओकर करा आके कहिन, “येह एक सुनसान जगह ए अऊ बेरा ह बहुंत ढरक गे हवय। 36 मनखेमन ला भेज ताकि ओमन आसपास के गांव अऊ बस्तीमन म जाके अपन खाय बर कुछू बिसा सकंय।”
37 पर यीसू ह जबाब दीस, “तुमन ओमन ला कुछू खाय बर देवव।”
38 ओह ओमन ला कहिस, “जाके देखव कि तुम्हर करा कतेक रोटी हवय?”
39 तब यीसू ह ओमन ला हुकूम दीस कि जम्मो झन ला हरियर कांदी ऊपर ओरी-ओरी करके बईठा देवव। 40 ओमन सौ-सौ अऊ पचास-पचास के ओरी-ओरी करके बईठ गीन। 41 तब ओह पांचों रोटी अऊ दूनों मछरी ला लीस अऊ स्वरग कोति देखके परमेसर ला धनबाद दीस अऊ रोटी ला टोर-टोरके अपन चेलामन ला देवत गीस कि ओमन मनखेमन ला परोसंय अऊ दूनों मछरी ला घलो मनखेमन म बांट दीस। 42 ओ जम्मो झन खाईन अऊ खाके अघा गीन। 43 चेलामन बांचे-खुचे रोटी अऊ मछरी के टुकड़ा के बारह टुकना भर के उठाईन। 44 खवइयामन म उहां पांच हजार आदमीमन रिहिन।
45 एकर बाद, यीसू ह तुरते अपन चेलामन ला डोंगा म चघाईस कि ओमन ओकर आघू बैतसैदा ला जावंय, जब तक ओह भीड़ के मनखेमन ला बिदा करय। 46 ओमन ला बिदा करके ओह पहाड़ी ऊपर पराथना करे बर गीस।
47 जब संझा होईस, त डोंगा ह झील के मांझा म रहय अऊ यीसू ह एके झन भांठा म रिहिस। 48 ओह देखिस कि चेलामन डोंगा ला खेवत-खेवत थक गे रहंय, काबरकि हवा ह ओमन के उल्टा दिग म बहत रहय। झूलझूलहा, ओह झील ऊपर रेंगत चेलामन करा गीस, अऊ ओमन ले आघू निकले चाहत रिहिस। 49 पर ओमन ओला जब झील ऊपर रेंगत देखिन, त ओमन ओला भूत समझिन, अऊ ओमन चिचियाय लगिन। 50 काबरकि जम्मो चेलामन ओला देखके डरा गे रहंय।
53 ओमन झील के ओ पार गन्नेसरत सहर म हबरिन, त डोंगा ला उहां रखके उतरिन। 54 ओमन के डोंगा ले उतरतेच ही, मनखेमन तुरते यीसू ला चिन डारिन। 55 मनखेमन आसपास के जम्मो गांव-गंवई म दऊड़के गीन अऊ बिमरहामन ला चटई अऊ खटिया म उठा-उठाके यीसू करा लाने लगिन। 56 अऊ ओह जिहां कहूं भी गांव, नगर या देहात म गीस, मनखेमन बिमरहामन ला सड़क, गली अऊ बजार मन म रखके ओकर ले बिनती करंय कि येमन ला कम से कम तोर ओनहा के छोर ला छुवन दे; अऊ जतेक झन ओला छुईन, ओ जम्मो झन चंगा हो गीन।
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