3 “परबंधकर्ता ह अपनआप ले कहिस, ‘अब मेंह का करंव? मोर मालिक ह मोला मोर काम ले छुट्टी करइया हवय। मोर अतकी ताकत नइं ए कि माटी कोड़ सकंव, अऊ भीख मांगे म मोला सरम आथे। 4 अब मेंह समझ गेंव कि मोला का करना चाही, ताकि जब इहां ले मोला काम ले निकाल दिये जावय, त मनखेमन अपन घर म मोर सुवागत करंय।’
5 “एकरसेति ओह ओ जम्मो मनखेमन ला बलाईस, जऊन मन ओकर मालिक के उधारी लगत रहंय। ओह पहिली मनखे ले पुछिस, ‘तोर ऊपर मोर मालिक के कतेक उधारी हवय?’
6 “ओह कहिस, ‘करीब तीन हजार लीटर जैतून के तेल।’
7 “तब ओह दूसरा मनखे ले पुछिस, ‘तोर ऊपर कतेक उधारी हवय?’
8 “मालिक ह ओ बेईमान परबंधकर्ता के बड़ई करिस, काबरकि ओह चतुरई ले काम करे रिहिस। अऊ येह सच ए कि ये संसार के मनखेमन अपन मामला के निपटारा करे म परमेसर के मनखेमन ले जादा चतुर अंय। 9 मेंह तुमन ला कहत हंव कि संसारिक धन ले अपन बर संगवारी बना लेवव, ताकि जब ओ धन ह सिरा जावय, त तुम्हर सुवागत सदाकाल के घर म होवय।
10 “जऊन ह बहुंत छोटे चीज म ईमानदार रहिथे, ओह बहुंत म घलो ईमानदार रहिही; अऊ जऊन ह बहुंत छोटे चीज म बेईमान ए, ओह बहुंत चीज म घलो बेईमान होही। 11 एकरसेति यदि तुमन संसारिक धन म बिसवासयोग्य नइं ठहिरे हव, त तुमन ला स्वरग के सच्चा धन कोन सऊंपही? 12 अऊ यदि तुमन पराय संपत्ति म ईमानदार नइं ठहिरेव, त तुम्हर खुद के संपत्ति तुमन ला कोन दीही?
13 “कोनो भी मनखे दू झन मालिक के सेवा नइं कर सकय। या तो ओह एक झन ले नफरत करही अऊ दूसर झन ले मया, या फेर ओह एक झन बर समरपित रहिही अऊ दूसर झन ला तुछ जानही। तुमन परमेसर अऊ धन दूनों के सेवा नइं कर सकव।”
14 ओ फरीसी जऊन मन पईसा के लोभी रिहिन, ओमन ये जम्मो ला सुनके यीसू के हंसी उड़ाय लगिन। 15 यीसू ह ओमन ला कहिस, “तुमन ओ मनखे अव, जऊन मन अपनआप ला आने मनखेमन के आघू म सही ठहिराथव, पर परमेसर ह तुम्हर मन के बात ला जानथे। काबरकि जऊन चीज ला मनखेमन बहुंत कीमती समझथें, ओह परमेसर के नजर म तुछ ए।
16 “मूसा के कानून अऊ अगमजानीमन के लिखे बचन के परचार यूहन्ना बतिसमा देवइया तक करे गीस। ओकर बाद ले परमेसर के राज के सुघर संदेस के परचार करे जावथे, अऊ हर एक झन येमा जाय के भरसक कोसिस करत हवय। 17 अकास अऊ धरती के मिट जवई सरल ए, पर मूसा के कानून के एक ठन बिन्दू घलो नइं मिटय।
18 “जऊन ह अपन घरवाली ला छोंड़के आने माईलोगन ले बिहाव करथे, ओह छिनारी करथे, अऊ जऊन मनखे एक छोंड़े गे माईलोगन ले बिहाव करथे, ओह छिनारी करथे।
22 “एक समय आईस, जब ओ भिखमंगा ह मर गीस अऊ स्वरगदूतमन ओला अब्राहम के तरफ ले गीन। ओ धनवान मनखे घलो मर गीस अऊ ओला माटी दिये गीस। 23 मरे के बाद, ओह पाताल-लोक म पीरा भोगत रहय, अऊ जब ओह अपन आंखी उठाके देखिस, त बहुंत दूरिहा म अब्राहम अऊ ओकर बाजू म लाजर रहय। 24 तब ओह नरियाके कहिस, ‘हे ददा अब्राहम, मोर ऊपर दया कर अऊ लाजर ला मोर करा पठो दे कि ओह अपन अंगरी के टीप ला पानी म भिगोवय अऊ मोर जीभ ला ठंडा करय, काबरकि मेंह ये आगी के जुवाला म बहुंत पीरा भोगत हवंव।’
25 “पर अब्राहम ह कहिस, ‘ए बेटा, सुरता कर कि तोला तोर जिनगी म जम्मो बने चीज मिले रिहिस, जबकि लाजर ला खराप चीज मिले रिहिस, पर अब ओह इहां सांति पावथे, अऊ तेंह दुख भोगत हस। 26 अऊ एकर अलावा, हमर अऊ तोर बीच म एक बहुंत गहिरा खंचवा बनाय गे हवय, ताकि जऊन मन इहां ले तोर करा जाना चाहंय घलो, त नइं जा सकंय अऊ न ही उहां ले हमर करा कोनो पार होके आ सकय।’
27 “ओ मनखे ह कहिस, ‘तब मेंह तोर ले बिनती करत हंव, ददा; लाजर ला मोर ददा के घर म पठो दे, 28 काबरकि मोर पांच झन भाई हवंय। ओह जाके ओमन ला चेतावय, ताकि ओमन पीरा भोगे के ये जगह म झन आवंय।’
29 “पर अब्राहम ह कहिस, ‘ओमन करा मूसा अऊ अगमजानीमन के किताब हवय। ओमन ओ किताब म लिखे संदेस ला सुनंय।’
30 “ओ मनखे ह कहिस, ‘नइं, हे ददा अब्राहम, यदि मरे मनखे म ले कोनो उठके ओमन करा जावय, त ओमन अपन पाप के पछताप करहीं।’
31 “पर अब्राहम ह ओला कहिस, ‘यदि ओमन मूसा अऊ अगमजानीमन के बात ला नइं सुनंय, त कहूं कोनो मरे म ले जी घलो उठय, तभो ले ओमन ओकर बात ला नइं मानहीं।’ ”
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