3 “ ‘तुमन म ले हर एक झन अपन दाई अऊ ददा के आदर करव, अऊ तुमन मोर बिसराम दिनमन ला मानव। मेंह यहोवा तुम्हर परमेसर अंव।
4 “ ‘तुमन मूरतीमन कोति झन लहुंटव अऊ अपन बर धातु के देवता झन बनावव। मेंह यहोवा तुम्हर परमेसर अंव।
5 “ ‘जब तुमन यहोवा ला मेल-बलिदान चघावव, त अइसने चघावव कि येह तुम्हर खातिर गरहन करे जावय। 6 जऊन दिन तुमन ओला चघावव, ओही दिन या ओकर दूसर दिन ओला खाय जावय; कोनो चीज तीसर दिन तक बांच जावय, त ओला आगी म जला दिये जावय। 7 यदि ओमा के कुछू ला तीसर दिन खाय जाथे, त ओह असुध अय अऊ ओला नइं गरहन करे जावय। 8 जऊन कोनो ओला खाथे, ओह दोसी ठहिरही, काबरकि ओह यहोवा के पबितर चीज ला अपबितर करे हवय; ओला अपन मनखेमन के समाज ले निकाल दिये जावय।
9 “ ‘अपन देस म रहे के बाद, जब तुमन अपन भुइयां के फसल ला लुवव, त अपन खेत के कोना-कोना तक जम्मो ला झन लुवव या लुवाय फसल के गिरे-परे बालमन ला झन संकेलव। 10 तुमन अपन अंगूर के बारी म दूसर बार अंगूर टोरे बर झन जावव या अंगूर के बारी म झरे अंगूरमन ला झन संकेलव। ओमन ला गरीब अऊ परदेसीमन बर छोंड़ दव। मेंह यहोवा तुम्हर परमेसर अंव।
11 “ ‘तुमन चोरी झन करव।
12 “ ‘मोर नांव म लबारी किरिया झन खावव अऊ ये किसम ले अपन परमेसर के नांव ला अपबितर झन करव। मेंह यहोवा अंव।
13 “ ‘अपन परोसी ला झन ठगव या ओला झन लूटव।
14 “ ‘भैंरा मनखे ला सराप झन देवव या अंधरा के आघू म हपटे बर कुछू झन मढ़ावव, पर अपन परमेसर के भय मानव। मेंह यहोवा अंव।
15 “ ‘नियाय ला झन बिगाड़व। गरीब के संग पखियपात या बड़े मनखे के मुहूं-देखी नियाय झन करव, पर अपन परोसी के सही-सही नियाय करव।
16 “ ‘अपन मनखेमन के बीच म लबारी बात झन फईलावव।
17 “ ‘अपन मन म अपन संगी इसरायली ले घिन झन करव। अपन परोसी ला खुले मन से डांटव, ताकि तुमन ओमन के अपराध म भागी झन होवव।
18 “ ‘काकरो ले बदला झन लेवव या अपन मनखेमन के बीच म कोनो बर बईरता झन रखव, पर अपन परोसी ले अपन सहीं मया करव। मेंह यहोवा अंव।
19 “ ‘मोर बिधिमन ला मानव।
20 “ ‘कोनो गुलाम माईलोगन, जेकर मंगनी कोनो मनखे के संग हो गे हवय, पर ओ कुंवारी ला दाम देके नइं छोंड़ाय गे हवय या ओला सुतंतर नइं करे गे हवय; ओकर संग यदि कोनो मनखे ह सारीरिक संबंध बनाथे, त ओमन ला दंड[b] तो दिये जावय, पर ओमन झन मार डारे जावंय, काबरकि ओ कुंवारी ला सुतंतर नइं करे गे रिहिस। 21 ओ आदमी ह मिलापवाला तम्बू के मुंहटा म यहोवा करा दोस-बलिदान बर एक ठन मेढ़ा लेके आवय। 22 पुरोहित ह ओ दोस-बलिदान के मेढ़ा ला यहोवा के आघू म चघाके ओ मनखे के पाप के प्रायस्चित के बिधि ला पूरा करय, तब ओह जऊन पाप करे हवय, ओह छेमा करे जाही।
23 “ ‘जब तुमन कनान देस म आवव अऊ उहां कोनो किसम के फर के रूख लगावव, त ओकर फर ला बरजे[c] कस समझव। तीन बछर ले ओ फर ला तुमन बरजीत समझव; ओला झन खावव। 24 चौथा साल ओकर जम्मो फर यहोवा के इस्तुति के बलिदान बर पबितर ठहिरही। 25 तब पांचवां साल तुमन ओकर फर ला खा सकत हव। ये किसम ले तुम्हर फसल म बढ़ोतरी होही। मेंह यहोवा तुम्हर परमेसर अंव।
26 “ ‘तुमन कोनो घलो मांस ला लहू के संग झन खावव।
27 “ ‘अपन मुड़ के किनारे के चुंदी ला झन कटावव या अपन दाढ़ी के तीर के बाल ला झन कतरावव।
28 “ ‘कोनो मरे मनखे बर अपन देहें ला झन काटव या अपन देहें म गोदना झन गोदावव। मेंह यहोवा अंव।
29 “ ‘अपन बेटी ला बेस्या बनाय के दुवारा ओकर अपमान झन करव, नइं तो देस ह बेस्या के काम के कारन बुरई ले भर जाही।
30 “ ‘मोर बिसराम दिनमन ला मानव अऊ मोर पबितर-स्थान के आदर करव। मेंह यहोवा अंव।
31 “ ‘बईगामन अऊ भूत-परेत साधोइयामन करा झन जावव, काबरकि तुमन ओमन के दुवारा असुध हो जाहू। मेंह यहोवा तुम्हर परमेसर अंव।
32 “ ‘डोकरामन के आघू म उठके ठाढ़ हो जावव; सियानमन के आदर करव अऊ अपन परमेसर के भय मानव। मेंह यहोवा अंव।
33 “ ‘जब कोनो परदेसी तुम्हर देस म तुम्हर संग रहिथे, त ओकर संग गलत बरताव झन करव। 34 जब कोनो परदेसी तुम्हर बीच म रहत हवय, त ओकर संग वइसने बरताव करव, जइसने कि तुमन देसी मनखे के संग करथव। ओकर ले अपन सहीं मया करव, काबरकि तुमन घलो मिसर देस म परदेसी होके रहेव। मेंह यहोवा तुम्हर परमेसर अंव।
35 “ ‘जब तुमन कोनो चीज ला नापथव, तऊलथव या गनथव, त ये काम ला ईमानदारी से करव। 36 लम्बई नापे के सही पैमाना, भार तऊले बर सही तराजू, मात्रा जाने बर सही एपा[d] अऊ सही हीन[e] के उपयोग करव। मेंह यहोवा तुम्हर परमेसर अंव, जऊन ह तुमन ला मिसर देस ले निकालके लानिस।
37 “ ‘मोर जम्मो बिधि-बिधान अऊ मोर जम्मो कानून ला मानव अऊ ओमन के पालन करव। मेंह यहोवा अंव।’ ”
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