4 पर यहोवा ह जबाब दीस, “का तोर कोरोध करई ह सही अय?”
5 तब योना ह निकलके ओ सहर के पूरब कोति एक जगह म बईठ गीस। उहां ओह अपन बर एक छाजन बनाईस अऊ ओकर छइहां म बईठके इंतजार करे लगिस कि अब सहर के का होही? 6 तब यहोवा परमेसर ह पान-पतईवाला एक पऊधा[a] ला उगाईस अऊ अइसन बढ़ा दीस कि ओकर ले योना के मुड़ म छइहां हो जाय अऊ ओला असुबिधा झन होवय, अऊ योना ह ओ पऊधा के कारन बहुंत खुस हो गीस। 7 पर ओकर दूसर दिन, बिहनियां परमेसर ह एक ठन कीरा ला भेजिस, जऊन ह ओ पऊधा ला कुतर दीस, जेकर से ओ पऊधा ह सूखा गीस। 8 जब सूरज निकलिस, त परमेसर ह झुलसा देवइया पुरवई हवा चलाईस, अऊ घाम ह योना के मुड़ म पड़े लगिस, जेकर से ओह बेहोस होय लगिस। योना ह मर जाय के ईछा करत कहिस, “बने होतिस कि मेंह जीयत रहे के बदले मर जातेंव।”
9 पर परमेसर ह योना ला कहिस, “का ओ पऊधा बर कोरोध करई तोर बर उचित अय?”
10 पर यहोवा ह कहिस, “तेंह ये पऊधा बर चिंता करत हस, जेकर तेंह न तो देखभाल करे रहय अऊ न ही तें ओला बढ़ाय रहय। येह रथिया भर म निकलिस अऊ रथिया भर म मर घलो गीस। 11 त फेर का में ये बड़े सहर नीनवे के चिंता नइं करंव, जेमा एक लाख बीस हजार ले जादा मनखे हवंय अऊ जेमन अपन डेरी-जेवनी हांथ के भेद ला नइं जानंय—अऊ ये सहर म बहुंत पसु भी हवंय?”
<- योना 3- a ये पऊधा के एकदम सही जानकारी नइं ए
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