9 “ ‘का तुमन चोरी अऊ हतिया करहू, बेभिचार अऊ लबारी गवाही दूहू, बाल देवता बर धूप जलाहू अऊ आने देवतामन के पाछू चलहू, जेमन ला तुमन नइं जानव, 10 अऊ तब ये घर, जऊन म कि मोर नांव हवय, तुमन येमा आके मोर आघू म ठाढ़ होहू अऊ ये कहिहू, “हमन सुरकछित हवन”—ये जम्मो घिनौना काम करे बर सुरकछित हवन? 11 ये घर, जेमा मोर नांव हवय, का येह तुम्हर बर डाकूमन के गुफा हो गे हवय? पर मेंह देखत आवत हंव! यहोवा ह घोसना करत हे।
12 “ ‘अब सीलो नगर म ओ जगह म जावव, जिहां पहिली मेंह मोर नांव बर एक निवास बनाय रहेंव, अऊ देखव कि मेंह अपन मनखे इसरायल के दुस्टता के कारन ओ निवास के का दसा कर दे हंव। 13 यहोवा ह घोसना करत हे, जब तुमन ये जम्मो काम करत रहेव, त मेंह तुमन ला बार-बार कहेंव, पर तुमन नइं सुनेव; मेंह तुमन ला बलांय, पर तुमन जबाब नइं देव। 14 एकरसेति ये घर, जेमा मोर नांव हवय, ये मंदिर, जेमा तुमन भरोसा करथव, ये जगह, जेला मेंह तुमन ला अऊ तुम्हर पुरखामन ला देय रहेंव, येकर दसा घलो मेंह सीलो के सहीं कर दूहूं। 15 जइसने कि मेंह तुम्हर जम्मो संगी इसरायली, एपरैम के मनखेमन संग करे रहेंव, वइसने ही मेंह तुमन ला अपन आघू ले धक्का देके निकाल दूहूं।’
16 “एकरसेति ये मनखेमन बर तेंह पराथना झन कर अऊ न ही येमन बर कोनो बिनती या निबेदन कर; मोर करा येमन के तरफ ले झन गोठिया, काबरकि मेंह तोर बात ला नइं सुनंव। 17 का तेंह नइं देखत हस कि ये मनखेमन यहूदा के नगरमन म अऊ यरूसलेम के गलीमन म का करत हवंय? 18 लइकामन कठवा संकेलथें, ददामन आगी सुलगाथें, अऊ माईलोगनमन पीसान गुंथके स्वरग के रानी ला चघाय बर रोटी बनाथें। ओमन मोर गुस्सा ला भड़काय बर आने देवतामन बर पेय-बलिदान देथें। 19 पर का ओमन मोला ही भड़कावथें? यहोवा ह घोसना करत हे। का ओमन बेसरम होके अपनआप के ही हानि नइं करत हें?
20 “ ‘एकरसेति परमपरधान यहोवा ह ये कहत हे: मोर गुस्सा अऊ मोर कोप ह ये जगह के ऊपर भड़कही—मनखे अऊ पसु ऊपर, मैदान के रूखमन ऊपर अऊ तुम्हर भुइयां के फसल ऊपर—अऊ ये गुस्सा अऊ कोप के आगी ह जलते रहिही अऊ नइं बुताही।
21 “ ‘सर्वसक्तिमान यहोवा, इसरायल के परमेसर ह ये कहत हे: जावव अऊ अपन होम-बलिदानमन ला अपन आने बलिदानमन संग मिलावव अऊ मांस ला खुद खावव! 22 काबरकि जब मेंह तुम्हर पुरखामन ला मिसर देस ले बाहिर लानेंव अऊ ओमन ले बात करेंव, त मेंह ओमन ला होम-बलिदान अऊ बलिदानमन के बारे म हुकूम नइं दे रहेंव, 23 पर मेंह ओमन ला ये हुकूम देय रहेंव: मोर बात ला मानव, तब मेंह तुम्हर परमेसर होहूं अऊ तुमन मोर मनखे होहू। मोर दिये गय जम्मो हुकूम के पालन करव, ताकि तुम्हर भलई होवय। 24 पर ओमन मोर बात ला नइं सुनिन अऊ धियान नइं दीन; येकर बदले, ओमन अपन दुस्ट हिरदय के जिद्दी सुभाव म चलिन। ओमन पाछू हट गीन अऊ आघू नइं बढ़िन। 25 जऊन समय ले तुम्हर पुरखामन मिसर देस ला छोंड़िन, बार-बार मेंह अपन सेवक अगमजानीमन ला तुम्हर करा पठोंय। 26 पर ओमन मोर बात ला नइं सुनिन अऊ धियान नइं दीन। ओमन हठी रिहिन अऊ अपन पुरखामन ले बढ़के दुस्ट काम करिन।’
27 “जब तेंह ओमन ला ये जम्मो बात बताबे, त ओमन तोर बात ला नइं सुनहीं; जब तेंह ओमन ला बलाबे, त ओमन जबाब नइं दीहीं। 28 एकरसेति ओमन ले कह, ‘येह ओ जाति ए, जऊन ह यहोवा अपन परमेसर के बात ला नइं माने हे या अपन गलत काममन ला नइं छोंड़े हे। सच्चई ह मर गे हवय; येह ओमन के मुहूं ले गायब हो गे हवय।
29 “ ‘अपन चुंदी ला काट अऊ दूरिहा म फटिक दे; बंजर टीला म चघके बिलाप कर, काबरकि यहोवा ह ये पीढ़ी के मनखेमन ला अस्वीकार करे हवय, ओमन ला तियाग दे हवय; ओमन ओकर कोप के भागी अंय।
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