17 यहोवा ह कहिथे, “जेमन अपनआप ला एकर बर पबितर अऊ सुध करथें कि ओमन ओकर पाछू-पाछू बारीमन म जावंय, जऊन ह ओ मनखेमन के बीच हवय, जेमन सूरा अऊ मुसवा के मांस अऊ आने असुध चीजमन ला खाथें—ओमन जेकर पाछू-पाछू जावत हें, ओमन आखिरी म एके संग नास हो जाहीं,” यहोवा ह घोसना करत हे।
18 “ओमन जऊन योजना बनाके काम करे हवंय, ओकर कारन मेंह आनेचवाला हंव अऊ मेंह जाति-जाति अऊ भासा-भासा के मनखेमन ला इकट्ठा करहूं अऊ ओमन आके मोर महिमा देखहीं।
19 “में ओमन म एक चिनहां परगट करहूं, अऊ ओमन के बांचे कुछू मनखेमन ला में ओ जातिमन करा पठोहूं, जेमन न तो मोर बारे म सुने हवंय अऊ न ही मोर महिमा देखे हवंय, याने कि मेंह ओमन ला तरसीसीमन करा, लिबियन[b] अऊ लूदीमन करा (धनुसधारी के रूप म माहिर), तूबली अऊ यूनानीमन करा अऊ दूरिहा के द्वीपवासीमन करा पठोहूं। ओमन जाति-जाति के मनखेमन के बीच मोर महिमा के बखान करहीं। 20 अऊ ओमन जम्मो जातिमन ले तुम्हर जम्मो मनखेमन ला यहोवा बर एक भेंट के रूप म यरूसलेम म मोर पबितर पहाड़ मेर लानहीं—ओमन ला घोड़ा, रथ, गाड़ी, खच्चर अऊ ऊंटमन म बईठाके लानहीं,” यहोवा ह कहत हे। “ओमन ला अइसे लाय जाही, जइसे इसरायलीमन यहोवा के मंदिर म सुध बरतन म अन्न-बलिदान लानथें। 21 अऊ मेंह ओमन के कुछू मनखे ला पुरोहित अऊ लेवी के रूप म काम करे बर अलग करहूं,” यहोवा ह कहत हे।
22 “जइसन नवां अकास अऊ नवां धरती, जेमन ला मेंह बनाहूं, मोर आघू म बने रहिहीं,” यहोवा ह घोसना करत हे, “वइसन तुम्हर नांव अऊ तुम्हर संतानमन घलो बने रहिहीं। 23 एक नवां चंदा ले दूसर नवां चंदा तक अऊ एक बिसराम दिन ले दूसर बिसराम दिन तक, जम्मो मनखेमन आहीं अऊ मोर आघू म मुड़ नवाहीं,” यहोवा ह कहत हे। 24 “अऊ ओमन बाहिर निकलहीं अऊ ओ मनखेमन के लास ला देखहीं, जेमन मोर ले बिदरोह करे रिहिन; जऊन कीरामन ओ लासमन ला खाथें, ओमन नइं मरंय, अऊ जऊन आगी ले ओमन ला जलाय जाथे, ओह नइं बुतावय, अऊ ओमन जम्मो मानव-जाति बर घिनौना हो जाहीं।”
<- यसायाह 65