4 मैदान के सेनापति ह ओमन ला कहिस, “हिजकियाह ला बतावव:
11 तब एलयाकीम, सेबना अऊ योआह, मैदान के सेनापति ला कहिन, “अपन सेवकमन ले अरामिक भासा म गोठिया, काबरकि हमन ये भासा ला समझथन। भीथी ऊपर बईठे मनखेमन के सुनत म हमर ले इबरानी म झन गोठिया।”
12 पर सेनापति ह जबाब दीस, “का मोर मालिक ह मोला सिरिप तुम्हर मालिक अऊ तुमन ला ये बात कहे बर पठोय हवय, अऊ दीवार ऊपर बईठे ओ मनखेमन ला नइं, जेमन ला तुम्हर सहीं, अपन खुद के मल ला खाना अऊ अपन खुद के पेसाब ला पीना पड़ही।”
13 तब सेनापति ह ठाढ़ होईस अऊ इबरानी म जोर से कहिस, “महाराजा अस्सूर के राजा के बात ला सुनव! 14 राजा ह ये कहत हे, हिजकियाह तुमन ला धोखा झन देवय। ओह तुमन ला छुड़ा नइं सकय। 15 हिजकियाह के मनाय म झन आवव, जब ओह यहोवा ऊपर भरोसा रखे बर ये कहिथे, ‘खचित यहोवा ह हमन ला छुड़ाही; ये सहर[b] ला अस्सूर के राजा के हांथ म नइं दिये जावय।’
16 “हिजकियाह के बात ला झन सुनव। अस्सूर के राजा ह ये कहिथे: मोर संग मेल-मिलाप करव अऊ बाहिर निकलके मोर करा आवव। तब तुमन म ले हर एक ह अपन खुद के अंगूर के नार के अऊ अंजीर के रूख के फर खाही अऊ अपन खुद के कुंड के पानी पीही, 17 जब तक कि मेंह आके तुमन ला एक अइसन देस म नइं ले जाहूं, जऊन ह तुम्हर खुद के सहीं होही—अनाज अऊ नवां अंगूर के मंद के देस, रोटी अऊ अंगूर के बारीमन के देस।
18 “हिजकियाह ह तुमन ला बहकावन झन पावय, जब ओह कहिथे, ‘यहोवा ह हमन ला छुड़ाही।’ का अऊ जातिमन के देवतामन कभू अपन देसमन ला अस्सूर के राजा के हांथ ले छुड़ाय हवंय? 19 हमात अऊ अरपाद के देवतामन कहां हवंय? सपरवैम के देवतामन कहां हवंय? का ओमन सामरिया ला मोर हांथ ले बचाय हवंय? 20 ये देसमन के जम्मो देवतामन ले कोन ह अपन देस ला मोर हांथ ले बचाय हवय? तब यहोवा ह कइसे यरूसलेम ला मोर हांथ ले छुड़ा सकथे?”
21 पर मनखेमन चुपेचाप रिहिन अऊ जबाब म कुछू नइं कहिन, काबरकि राजा ह ये हुकूम दे रिहिस, “ओला जबाब झन दव।”
22 तब हिलकियाह के बेटा एलयाकीम, जऊन ह महल के अधिकारी रिहिस; सेबना जऊन ह सचिव रिहिस; अऊ आसाप के बेटा योआह, जऊन ह इतिहास के अभिलेखक रिहिस; ये तीनों अपन फटे कपड़ा के संग हिजकियाह मेर गीन, अऊ ओला मैदान के सेनापति के कहे बात ला बताईन।
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