16 ओ समय मिसरीमन दुरबल परानी हो जाहीं। सर्वसक्तिमान यहोवा ओमन के बिरूध जऊन हांथ उठाही, ओकर कारन, डर के मारे ओमन कांपे लगहीं। 17 अऊ यहूदा के देस ह मिसरीमन ला आतंकित करही; जेकर ले घलो यहूदा के चरचा करे जाही, ओह भयभीत होही, ये सब ओ योजना के कारन होही, जेला सर्वसक्तिमान यहोवा ह मिसरीमन के बिरूध करत हे।
18 ओ दन म मिसर देस म पांच सहर होहीं, जेकर मनखेमन कनान देस के भासा बोलहीं अऊ सर्वसक्तिमान यहोवा के भक्ति बर किरिया खाहीं। ओमा से एक ठन सहर के नांव सूरज[a] होही।
19 ओ दिन म मिसर देस के बीच म यहोवा बर एक बेदी होही, अऊ ओकर सीमना म यहोवा बर एक स्मारक होही। 20 मिसर देस म येह यहोवा बर एक चिनहां अऊ गवाही होही। अपन ऊपर अंधेर करइयामन के कारन, जब ओमन यहोवा ला पुकारहीं, तब ओह ओमन बर एक उद्धारकर्ता अऊ ओमन के रकछा करइया ला भेजही, अऊ ओह ओमन ला छोंड़ाही। 21 ये किसम ले यहोवा अपनआप ला मिसरीमन ऊपर परगट करही, अऊ ओ दिन ओमन यहोवा ला चिनहीं। ओमन बलिदान अऊ अन्न-बलिदान चघाके ओकर उपासना करहीं; ओमन यहोवा बर मन्रत रखहीं अऊ ओला पूरा घलो करहीं। 22 यहोवा ह मिसर देस ऊपर एक महामारी लानही; ओह ओमन ला मारही अऊ ओमन ला चंगा घलो करही। ओमन यहोवा कोति फिरहीं, अऊ ओह ओमन के बिनती सुनके ओमन ला चंगा करही।
23 ओ दिन म मिसर ले अस्सूर तक एक राजमार्ग होही। अस्सूरीमन मिसर देस जाहीं अऊ मिसरीमन अस्सूर देस जाहीं। अऊ मिसरीमन अस्सूरीमन के संग मिलके अराधना करहीं। 24 ओ दिन म धरती ऊपर इसरायल ह तीसरा देस होही, जेकर नांव मिसर अऊ अस्सूर के संग आसीसित देस के रूप म लिये जाही। 25 सर्वसक्तिमान यहोवा ह ये कहिके ओमन ला आसीस दीही, “धइन होवंय मिसर म मोर मनखेमन, मोर हांथ के बनाय अस्सूर अऊ मोर उत्तराधिकार इसरायल।”