4 बिहाव ह जम्मो मनखे म आदर के बात समझे जावय। बिहाव के बिछौना ह सुध रहय, काबरकि परमेसर ह ओ जम्मो झन के नियाय करही, जऊन मन बेभिचारी अंय अऊ आने के संग गलत संबंध रखथें। 5 तुमन अपन जिनगी ला रूपिया-पईसा के मोह-मया ले दूर रखव अऊ जऊन कुछू तुम्हर करा हवय, ओमा संतोस रहव, काबरकि परमेसर ह कहे हवय,
7 अपन ओ अगुवामन के खियाल रखव, जऊन मन तुमन ला परमेसर के बचन सुनाईन। ओमन के जिनगी के जम्मो बने बात के बारे म सोचव अऊ ओमन के बिसवास के नकल करव। 8 यीसू मसीह ह कल, आज अऊ सदाकाल बर उसनेच ए।
9 नाना किसम के अनजान उपदेस के दुवारा धोखा झन खावव। येह बने अय कि हमर हिरदय ह परमेसर के अनुग्रह ले मजबूत होवय, न कि ओ रीति-रिवाज के भोजन ले, जऊन ला खाय ले कोनो फायदा नइं होवय। 10 हमर एक बेदी हवय, जिहां ले पबितर-तम्बू म सेवा करइयामन ला खाय के अधिकार नइं ए।
11 महा पुरोहित ह पसुमन के लहू ला पाप-बलिदान के रूप म महा पबितर स्थान म ले जाथे, पर ओमन के देहें ह डेरा के बाहिर म जलाय जाथे। 12 एकर खातिर, यीसू घलो सहर के दुवार के बाहिर दुख भोगिस, ताकि ओह अपन खुद के लहू ले मनखेमन ला पबितर करय। 13 त आवव, हमन डेरा के बाहिर ओकर करा चलन अऊ ओ कलंक म भागी होवन जऊन ला ओह सहिस। 14 काबरकि इहां, हमर कोनो स्थायी सहर नइं ए, पर हमन ओ सहर के बाट जोहथन, जऊन ह अवइया हवय।
15 एकरसेति आवव, हमन यीसू के जरिये परमेसर ला लगातार इस्तुति के बलिदान चघावन अऊ ये बलिदान ह हमर मुहूं के ओ बचन ए, जऊन ह ओकर नांव ला मानथे। 16 अऊ भलई करे बर अऊ आने मन के मदद करे बर झन भूलव, काबरकि अइसने बलिदान परमेसर ला भाथे।
17 अपन अगुवामन के ऊपर भरोसा रखव अऊ ओमन के अधीन म रहव। ओमन तुम्हर खियाल ओ मनखेमन सहीं रखथें, जऊन मन ला अपन काम के लेखा देना जरूरी ए। ओमन के बात मानव, ताकि ओमन के काम ह एक बोझा सही नइं, पर एक आनंद के बात होवय, नइं तो ओह तुम्हर कुछू फायदा के नइं होही।
18 हमर बर पराथना करव। हमन ला भरोसा हवय कि हमर बिबेक ह साफ हवय अऊ हर किसम ले, आदर के जिनगी जीये के ईछा हवय। 19 मेंह तुमन ले खास करके बिनती करत हवंव कि तुमन पराथना करव, ताकि मेंह तुम्हर करा जल्दी वापिस आ सकंव।
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