4 पर एसाव ह याकूब संग भेंट करे बर दऊड़िस अऊ ओला छाती ले लगा लीस; ओह ओला बाहां म पोटारके चूमिस। अऊ ओ दूनों रोईन। 5 तब एसाव ह माईलोगन अऊ लइकामन ला देखिस अऊ पुछिस, “तोर संग येमन कोन अंय?”
6 तब दासी अऊ ओमन के लइकामन हबरिन अऊ आके दंडवत करिन। 7 फेर लिआ अऊ ओकर लइकामन आईन अऊ दंडवत करिन। सबले आखिरी म यूसुफ अऊ राहेल आईन, अऊ ओमन घलो दंडवत करिन।
8 एसाव ह पुछिस, “ये जो गाय-बईला अऊ भेड़-बकरी के दलमन रसता म मोला मिलिन, एकर का मतलब ए?”
9 पर एसाव ह कहिस, “हे मोर भाई, मोर करा पहिले ही बहुंत हवय। जऊन कुछू तोर करा हवय, ओह तोरेच रहय।”
10 याकूब ह कहिस, “नइं, नइं! यदि तोर दया मोर ऊपर हवय, त मोर ये भेंट ला गरहन कर। काबरकि तोर चेहरा देखई ह परमेसर के चेहरा देखे सहीं अय, अऊ तेंह मोला खुसी से गरहन करे हस। 11 तोर करा जऊन भेंट लाय गे हे, ओला गरहन कर, काबरकि परमेसर ह मोर ऊपर अनुग्रह करे हवय अऊ मोर करा मोर जरूरत के जम्मो चीज हवय।” अऊ जब याकूब ह बहुंत बिनती करिस, त एसाव ह ओ भेंट ला गरहन कर लीस।
12 फेर एसाव ह कहिस, “आ, अब हमन चलन; में तोर संग चलहूं।”
13 पर याकूब ह ओला कहिस, “हे मोर मालिक, तेंह जानत हस कि मोर संग नान-नान लइकामन हवंय अऊ ओ भेड़ अऊ गायमन के देखभाल करना जरूरी ए, जऊन मन अपन लइकामन ला दूध पीयावत हें। यदि येमन एक दिन भी जादा खेदे जाहीं, त जम्मो के जम्मो पसु मर जाहीं। 14 एकरसेति मोर मालिक ह अपन सेवक के आघू चलय, अऊ मेंह ये पसु जऊन मन मोर आघू म रेंगत हवंय, ओमन के मुताबिक अऊ लइकामन के रेंगई के मुताबिक धीरे-धीरे चलहूं, अऊ सेईर म अपन मालिक करा हबरहूं।”
15 एसाव ह कहिस, “त मोर कुछू मनखेमन ला तोर संग छोंड़ देवत हंव।”
16 तब एसाव ह ओही दिन वापिस सेईर जाय बर निकलिस। 17 पर याकूब ह उहां ले सुक्कोत गीस, अऊ उहां अपन बर एक घर अऊ अपन पसुमन बर कोठा बनाईस। एकरसेति ओ जगह के नांव सुक्कोत[a] परिस।
18 याकूब ह पदन-अराम[b] ले आय के बाद, कनान के सकेम सहर म सही-सलामत हबरिस अऊ सहर के लकठा म अपन डेरा ठाढ़ करिस। 19 भुइयां के जऊन भाग म, ओह तम्बू गाड़े रिहिस, ओला ओह सकेम के ददा, हमोर के बेटामन के हांथ ले एक सौ चांदी के टुकड़ा म बिसाय रिहिस। 20 उहां ओह एक बेदी बनाईस अऊ ओकर नांव एल-एलोहे-इसरायल[c] रखिस।
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