1 ये किसम ले अकास अऊ धरती अऊ ओमा के जम्मो चीज के बनई पूरा हो गीस।
8 अऊ यहोवा परमेसर ह पूरब कोति अदन[d] म एक बगीचा लगाईस, अऊ उहां ओ मनखे जेला ओह रचे रिहिस, रख दीस। 9 अऊ यहोवा परमेसर ह भुइयां म जम्मो किसम के रूख, जो देखे म मनोहर अऊ जेकर फर खाय म बने लगथे, उगाईस, अऊ बगीचा के मांझा म जिनगी के रूख अऊ भला अऊ बुरा के गियान के रूख ला घलो लगाईस।
10 ओ बगीचा ला पलोय बर, एक नदी अदन ले बहत रिहिस अऊ उहां ले आघू जाके ओह चार धारा म बंट गीस। 11 पहिली धारा के नांव पीसोन ए; येह हवीला नांव के पूरा देस ला, जिहां सोन मिलथे, घेरे हवय। 12 (ओ देस के सोन चोखा होथे; उहां खुसबूदार धूप अऊ गोमेदक घलो मिलथे।) 13 दूसर नदी के नांव गीहोन ए; येह कूस[e] नांव के पूरा देस ला घेरे हवय। 14 अऊ तीसर नदी के नांव तिगरीस ए; येह अस्सूर के पूरब कोति बोहाथे। अऊ चौथा नदी के नांव फरात ए।
15 तब यहोवा परमेसर ह मनखे ला लेके अदन के बगीचा म रख दीस कि ओह ओमा काम करय अऊ ओकर देखभाल करय। 16 अऊ यहोवा परमेसर ह मनखे ला ये हुकूम दीस, “तें बगीचा के कोनो घलो रूख के फर बिगर रोक-टोक के खा सकत हस, 17 पर भला अऊ बुरा के गियान के जऊन रूख हवय, ओकर फर तें कभू झन खाबे, काबरकि जब तें ओकर फर ला खाबे, त निस्चित रूप से तेंह मर जाबे।”
18 फेर यहोवा परमेसर ह कहिस, “मनखे के अकेला रहई बने नो हय। में ओकर बर एक अइसन मददगार बनाहूं, जऊन ह ओकर ले मेल खावय।”
19 यहोवा परमेसर ह भुइयां ले जम्मो जाति के पसुमन ला अऊ अकास के जम्मो चिरईमन ला बनाय रिहिस अऊ ये देखे बर ओमन ला मनखे करा लानिस कि ओह ओमन के का-का नांव रखथे; अऊ जऊन-जऊन नांव लेके जीयत परानीमन ला मनखे ह बलाईस, ओह ओमन के नांव हो गीस। 20 ये किसम ले मनखे ह जम्मो घरेलू-पसुमन के, अकास के चिरईमन के अऊ जम्मो बन पसुमन के नांव रखिस।
23 तब आदम ह कहिस,
25 आदम अऊ ओकर घरवाली दूनों नंगरा रिहिन, पर ओमन लजात नइं रिहिन।
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