2 “कहूं चोर ह चोरी करत पकड़े जावय अऊ ओला मारत बखत ओह मर जावय, त चोर ला मारनेवाला ह खून के दोसी नो हय; 3 पर कहूं ये काम बेर निकले के बाद होथे, त चोर ला मारनेवाला ह खून के दोसी अय।
5 “कहूं कोनो मनखे अपन पसु ला खेत या अंगूर के बारी म चराथे अऊ ओमन ला खुला छोंड़ देथे अऊ ओमन आने के खेत ला चर देथें, त ओह अपन खेत या अंगूर के बारी के सबले बने फसल ओला बलदा म देके नुकसान के भरपई करय।
6 “कहूं कोनो मनखे आगी धराथे, अऊ ओ आगी ह झाड़ीमन म फईल जाथे, जेकर ले अनाज के बीड़ा या खड़े फसल या फेर जम्मो खेत ह जर जावय, त आगी धरइया ह ओकर नुकसान के भरपई जरूर करय।
7 “कहूं कोनो मनखे ह अपन परोसी ला चांदी या आने चीज संभालके रखे बर देथे अऊ ओ चीज ह परोसी के घर ले चोरी हो जाथे, अऊ चोर ह यदि पकड़ म आ जावय, त ओह ओकर दू गुना भरय। 8 पर यदि चोर ह पकड़े नइं जावय, त जरूरी अय कि ओ घर के मालिक ला नियायीमन करा लाने जावय, अऊ ओ नियायीमन पता लगावंय कि कहीं घर के मालिक ह तो ओ आने मनखे के संपत्ति म हांथ नइं डारे हवय। 9 गैरकानूनी तरीका ले कब्जा करे गय जम्मो मामला म, चाहे ओह एक ठन बईला या एक ठन गदहा या एक ठन भेड़ या एक ठन कपड़ा या फेर कोनो आने गंवाय चीज हो, जेकर बारे म यदि कोनो मनखे ये कहिथे, ‘येह मोर अय,’ तब ओ दूनों झन अपन मामला ला नियायीमन करा लानंय। जऊन ला नियायीमन दोसी ठहिरावंय, ओह दूसर मनखे ला दू गुना भर देवय।
10 “कहूं कोनो मनखे अपन परोसी ला बईला या गदहा या भेड़ या अऊ कोनो पसु संभालके रखे बर देथे अऊ ओकर बाद ओ पसु ह मर जाथे या ओला चोट लगथे या काकरो देखे बिगर कोनो ओला खेदके ले जाथे, 11 त ओ दूनों झन के बीच ये मामला के निपटारा यहोवा के आघू म ये सपथ खवाके करे जावय कि परोसी ह आने मनखे के संपत्ति म हांथ नइं लगाय हवय। संपत्ति के मालिक ह ये बात ला मान लेवय, अऊ नुकसान के भरपई करे के जरूरत नइं परय। 12 पर कहूं ओ परोसी ले पसु ला चोराय गे हवय, त फेर मालिक ला नुकसान के भरपई जरूर करे जावय। 13 कहूं ओ पसु ला कोनो जंगली पसु ह चीर-फार डारय, त परोसी ह ओ पसु के बांचे-खुचे चीज ला सबूत के रूप म लानय अऊ ओला ओ चीर-फार करे गे पसु बर कोनो भरपई करना नइं पड़य।
14 “कहूं कोनो मनखे अपन परोसी ले मांगके कोनो पसु ला लानय अऊ मालिक के नइं रहे म ओ पसु ला चोट लगय या ओह मर जावय, त ओ मनखे ह नुकसान ला जरूर भरय। 15 पर कहूं मालिक ह पसु संग म रहय, त मांगके ले जानेवाला मनखे ला नुकसान भरना नइं पड़य। यदि पसु ला भाड़ा म लाने गे रिहिस, त नुकसान के भरपई ओकर दिये गय किराया म हो जाही।
18 “जादूगरनी ला जीयत झन रहन दव।
19 “कहूं कोनो मनखे ह पसु संग कुकरम करथे, त ओला मार डारे जावय।
20 “जऊन कोनो यहोवा के छोंड़ अऊ कोनो आने देवता बर बलि चघाथे, ओला नास कर दिये जावय।
21 “कोनो परदेसी के संग अतियाचार झन करव या ओला झन सतावव, काबरकि तुमन घलो मिसर देस म परदेसी रहेव।
22 “कोनो बिधवा या अनाथ लइका ले फायदा झन उठावव।[a] 23 कहूं तुमन अइसन करथव अऊ ओमन मोला गोहारथें, त मेंह ओमन के गोहार ला जरूर सुनहूं। 24 मोर कोरोध ह भड़कही अऊ मेंह तुमन ला तलवार ले मार डारहूं; अऊ तुम्हर घरवालीमन बिधवा अऊ तुम्हर लइकामन अनाथ हो जाहीं।
25 “कहूं तुमन अपन बीच रहइया मोर कोनो मनखे ला उधार म पईसा देथव, जऊन ह कि जरूरत म हवय, त येला एक धंधा के रूप म झन लेवव; ओकर ले बियाज झन लेवव। 26 कहूं तुमन अपन परोसी के कपड़ा ला गिरवी के रूप म अपन करा रखथव, त ओला बेर बुड़त तक लहुंटा दव। 27 काबरकि तुम्हर परोसी करा ओढ़े बर सिरिप एके ठन कपड़ा हवय। ओह अऊ का ला ओढ़के सुतही? जब ओह मोला गोहारही, त मेंह ओकर सुनहूं, काबरकि मेंह दयालु अंव।
28 “परमेसर के निन्दा झन करव[b] या अपन मनखेमन के हाकिम ला सराप झन देवव।
29 “अपन खेत के फसल या रसकुंड म ले भेंट ला रोकके झन रखव।
31 “तुमन ला मोर पबितर मनखे बनना हे। एकरसेति ओ पसु के मांस ला झन खावव, जेला कोनो जंगली जानवर ह मार डारे हवय; ओला कुकुरमन के आघू म फटिक दव।
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