3 तब पौलुस ह ओमन ले पुछिस, “त तुमन काकर बतिसमा पाय हवव?”
4 पौलुस ह कहिस, “यूहन्ना तो पाप ले पछताप करे के बतिसमा दीस अऊ मनखेमन ला कहिस कि जऊन ह ओकर बाद अवइया हवय, ओकर ऊपर याने कि यीसू ऊपर बिसवास करव।” 5 ये सुनके ओमन परभू यीसू के नांव म बतिसमा लीन। 6 जब पौलुस ह ओमन ऊपर अपन हांथ रखिस, त ओमन ऊपर पबितर आतमा उतरिस, अऊ ओमन आने-आने भासा बोले अऊ अगमबानी करे लगिन। 7 ओमन जम्मो झन लगभग बारह मनखे रिहिन।
8 पौलुस ह सभा-घर म जाके उहां तीन महिना तक बेधड़क गोठियाईस। ओह मनखेमन ला परमेसर के राज के बारे म समझाय बर बहस करय। 9 पर कुछू मनखेमन हठ म आके ओकर बात ला बिसवास नइं करिन अऊ मनखेमन के आघू म परभू के रसता के बारे म खराप बात कहिन। एकरसेति पौलुस ह ओमन ला छोंड़ दीस अऊ बिसवासीमन ला अपन संग लेके हर दिन तरन्नुस के भासन-घर म बिचार-बिमर्स करे लगिस। 10 दू बछर तक ले एहीच होते रिहिस। एकरे कारन एसिया प्रदेस म रहइया जम्मो यहूदी अऊ यूनानीमन परभू के बचन ला सुनिन।
11 परमेसर ह पौलुस के दुवारा असधारन चमतकार करय। 12 मनखेमन रूमाल अऊ अंगछा मन ला पौलुस के देहें म छुआ के बिमरहामन करा ले जावंय अऊ ओमन के बेमारी ठीक हो जावय अऊ दुस्ट आतमामन ओमन ले निकल जावंय।
13 कुछू यहूदी ओझा जऊन मन एती-ओती जाके दुस्ट आतमामन ला निकालंय, ओमन घलो परभू यीसू के नांव लेके अइसने करे के कोसिस करिन। ओमन परेत आतमामन ला कहंय, “यीसू के नांव म, जेकर परचार पौलुस ह करथे, मेंह तोला हुकूम देवत हंव कि निकल आ।” 14 स्किवा नांव के एक यहूदी मुखिया पुरोहित के सात झन बेटा रहंय अऊ ओमन घलो अइसने करंय। 15 एक दुस्ट आतमा ह ओमन ला कहिस, “यीसू ला मेंह जानथंव अऊ पौलुस ला घलो जानथंव; पर तुमन कोन अव?” 16 तब ओ मनखे जऊन म दुस्ट आतमा रिहिस, ओमन ऊपर झपटिस अऊ ओ जम्मो झन ला बस म कर लीस अऊ ओह ओमन ला अइसने मारिस कि ओमन नंगरा अऊ घायल होके ओ घर ले भाग निकलिन।
17 जब इफिसुस के रहइया यहूदी अऊ यूनानीमन ला ये बात के पता चलिस, त ओमन जम्मो डरा गीन अऊ परभू यीसू के नांव के अब्बड़ बड़ई होईस। 18 जऊन मन बिसवास करे रिहिन, ओमा के कतको झन आके खुल्लम-खुल्ला अपन खराप काममन ला मान लीन। 19 जादू-टोना करइयामन ले कतको झन अपन पोथीमन ला संकेलिन अऊ मनखेमन के आघू म ओ किताबमन ला आगी म बार दीन। जब ओ किताबमन के दाम के हिसाब करे गीस, त ओह लगभग पचास हजार ड्राचमास के बराबर रिहिस।[a] 20 ये किसम ले परभू के बचन ह चारों खूंट फईलत गीस अऊ एकर परभाव बाढ़त गीस।
21 ये जम्मो घटना ला देखे के बाद, पौलुस ह मकिदुनिया अऊ अखया प्रदेस होवत यरूसलेम जाय के फैसला करिस। ओह कहिस, “उहां जाय के बाद, मोला रोम घलो जाना जरूरी ए।” 22 पौलुस ह अपन मदद करइयामन ले दू झन—तीमुथियुस अऊ इरासतुस ला मकिदुनिया पठो दीस अऊ खुदे कुछू दिन बर एसिया प्रदेस म रूक गीस।
28 जब ओमन ये सुनिन, त अब्बड़ गुस्सा होईन अऊ चिचिया-चिचियाके कहिन, “इफिसीमन के अरतिमिस देवी महान ए।” 29 अऊ जम्मो सहर म कोलाहल मच गीस। मनखेमन मकिदुनिया के गयुस अऊ अरिसतर्खुस ला, जऊन मन पौलुस के संगी यातरी रिहिन, पकड़ लीन, अऊ एक संग नाचा-घर म दऊड़ गीन। 30 पौलुस ह भीड़ करा जाय बर चाहत रिहिस, पर चेलामन ओला जावन नइं दीन। 31 ओ प्रदेस के कुछू अधिकारीमन पौलुस के संगी रिहिन। ओमन ओकर करा बिनती करके ये खबर पठोईन कि ओह नाचा-घर म झन जावय।
32 सभा म गड़बड़ी होवत रिहिस। कोनो मन एक बात बर चिचियावत रहंय, त कोनो मन कुछू आने बात बर। जादा मनखेमन तो ये नइं जानत रहंय कि ओमन उहां काबर जूरे रिहिन। 33 भीड़ के कुछू मनखेमन सिकन्दर ला उकसाईन, जऊन ला यहूदीमन आघू म कर दे रहंय। सिकन्दर ह हांथ ले इसारा करिस कि जम्मो चुप हो जावंय ताकि ओह मनखेमन के आघू म जबाब दे सकय। 34 पर जब मनखेमन ये जानिन कि ओह यहूदी अय, त ओमन जम्मो झन लगभग दू घंटा तक ये कहिके चिचियाईन, “इफिसीमन के अरतिमिस महान ए।”
35 तब सहर के बाबू साहेब ह भीड़ ला सांत करके कहिस, “हे संगी इफिसीमन! जम्मो संसार ह जानत हवय कि इफिसुस सहर ह महान अरतिमिस के मंदिर अऊ अकास ले गिरे ओकर मूरती के संरछक ए। 36 ये बात ला कोनो इनकार नइं कर सकंय, त तुमन सांत रहव अऊ बिगर सोचे-बिचारे उतावलापन म कुछू झन करव। 37 तुमन ये मनखेमन ला इहां लाने हवव, जऊन मन न मंदिर ला लूटे हवंय अऊ न हमर देवी के निन्दा करे हवंय। 38 यदि देमेतिरियुस अऊ ओकर संगी कारीगरमन ला काकरो बिरोध म कोनो सिकायत हवय, त कचहरी खुला हवय अऊ उहां हाकिममन हवंय। ओमन उहां जाके नालिस कर सकथें। 39 यदि तुमन कोनो अऊ बात के बारे म पुछे चाहत हव, त ओकर फैसला ठहिराय गे सभा म करे जाही। 40 आज के घटना के कारन हमर ऊपर दंगा करवाय के दोस लगे के खतरा हवय। ये हो-हल्ला करे के, हमर करा कोनो कारन नइं ए। हमन एकर बारे म कोनो जबाब नइं दे सकन।” 41 ये कहे के बाद, ओह सभा ला बिदा कर दीस।
<- प्रेरितमन के काम 18प्रेरितमन के काम 20 ->- a एक ड्राचमास ह एक दिन के बनी के बरोबर होवय।
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