4 जब तकोआ नगर के ओ माईलोगन ह राजा मेर गीस, त ओह मुहूं के भार भुइयां म गिरके राजा के दंडवत करिस, अऊ ओह कहिस, “हे महाराज, मोर मदद कर!”
5 राजा ह ओकर ले पुछिस, “तोर का समस्या ए?”
8 राजा ह ओ माईलोगन ला कहिस, “तें अपन घर जा, अऊ मेंह तोर बिसय म एक हुकूम दूहूं।”
9 पर तकोआ के ओ माईलोगन ह राजा ले कहिस, “मोर मालिक, राजा ह मोला अऊ मोर परिवार ला छेमा करय, अऊ राजा अऊ ओकर सिंघासन ह निरदोस ठहिरय।”
10 राजा ह कहिस, “यदि कोनो मनखे तोर ले कुछू बोलथे, त ओला मोर करा ले आबे, अऊ ओ मनखेमन तोला फेर नइं सताहीं।”
11 ओह कहिस, “राजा ह यहोवा अपन परमेसर ला सुरता करय कि खून के पलटा लेवइया ह अऊ नास करन झन पावय, अऊ मोर बेटा ला नास झन करे जावय।”
12 तब माईलोगन ह कहिस, “तोर सेविका ह मोर मालिक राजा ले एक ठन अऊ बात कहे चाहत हे।”
13 ओ माईलोगन ह कहिस, “फेर तेंह परमेसर के मनखेमन के बिरूध अइसनेच उपाय काबर करे हस? जब राजा ह ये बात कहिथे, त का ओह खुद दोसी नइं ठहिरत हे, काबरकि राजा अपन निकाले गय बेटा ला लहुंटाके नइं लाय हवय? 14 हमन ला तो मरनेच हे, अऊ हमन भुइयां म गिरे हुए पानी के असन ठहिरबो, जेला फेर उठाय नइं जा सकय। पर परमेसर ह ओ बात ला नइं चाहय; एकर बदले, ओह अइसन उपाय करथे कि निकाले गय मनखे हमेसा बर ओकर ले निकाले गय सहीं झन रहय।
15 “अऊ अब मेंह अपन मालिक राजा ले ये बात कहे बर आय हवंव, काबरकि मनखेमन मोला डरा देय रिहिन। तोर सेविका ह सोचिस, ‘में राजा ले बात करहूं; सायद ओह अपन सेविका के बिनती ला सुन ले। 16 सायद राजा ह अपन सेविका ला ओ मनखे के हांथ ले छोंड़ाय के अनुमति देवय, जऊन ह मोला अऊ मोर बेटा दूनों ला परमेसर के भाग ले अलग करे के कोसिस करत हे।’
17 “अब तोर सेविका ह कहत हे, ‘मोर मालिक राजा के बचन ह मोर भाग ला सुनिस्चित करय, काबरकि मोर मालिक राजा ह परमेसर के कोनो स्वरगदूत के असन बने अऊ खराप बात म भेद कर सकथे। यहोवा तोर परमेसर ह तोर संग रहय।’ ”
18 तब राजा ह ओ माईलोगन ला कहिस, “जऊन बात मेंह तोर ले पुछनेवाला हंव, ओला मोर ले झन छुपाबे।”
19 राजा ह पुछिस, “का ये जम्मो बात म तोर पाछू योआब के हांथ हवय?”
21 तब राजा ह योआब ला कहिस, “बहुंत बढ़िया, मेंह ये काम करहूं। तेंह जा अऊ ओ जवान अबसालोम ला वापिस लेके आ।”
22 योआब ह राजा के आदर म भुइयां म मुहूं के बल गिरके ओला दंडवत करिस, अऊ ओह राजा ला आसीरबाद दीस। योआब ह कहिस, “हे मोर मालिक राजा, आज तोर सेवक ह जान गीस कि मोर ऊपर तोर दया-दिरिस्टी हवय, काबरकि राजा ह अपन सेवक के बिनती ला मान ले हवय।”
23 तब योआब ह उठके गसूर राज ला गीस अऊ अबसालोम ला वापिस यरूसलेम ले आईस। 24 पर राजा ह कहिस, “ओह अपन खुद के घर म जावय; ओह मोर चेहरा झन देखय।” तब अबसालोम अपन घर म चल दीस, अऊ राजा के चेहरा नइं देखिस।
25 जम्मो इसरायल म अबसालोम के सुघर देहें के जतेक परसंसा होवय, ओकर तुलना म अऊ कोनो के नइं होवत रिहिस। ओकर मुड़ ले लेके गोड़ तक, ओमा कुछू भी दोस नइं रिहिस। 26 जब भी ओह अपन मुड़ के बाल ला कटवाय—ओह बछर म एक बार अपन बाल कटवात रिहिस, काबरकि येह ओकर बर बहुंत भारी हो जावय—ओह अपन बाल के तऊल करवाय, अऊ ओकर वजन साही तऊल के मुताबिक दू सौ सेकेल[a] होवय।
27 अबसालोम के तीन बेटा अऊ एक बेटी होईन। ओकर बेटी के नांव तामार रिहिस, अऊ ओह एक सुघर माईलोगन होईस।
28 अबसालोम ह दू बछर तक राजा के चेहरा देखे बिगर यरूसलेम म रिहिस। 29 तब अबसालोम ह योआब ला बुलवाईस ताकि ओला राजा दाऊद करा पठोवय, पर योआब ह ओकर मेर आय ले मना कर दीस। तब ओह ओला दूसर बार बलाय बर पठोईस, पर तब भी योआब ह आय ले मना कर दीस। 30 तब अबसालोम ह अपन सेवकमन ला कहिस, “देखव, योआब के खेत ह मोर खेत ले लगे हवय, अऊ ओमा जौ के फसल लगे हवय। तुमन जाके ओमा आगी लगा दव।” तब अबसालोम के सेवकमन जाके ओ खेत म आगी लगा दीन।
31 तब योआब ह अबसालोम के घर गीस, अऊ ओह ओकर ले पुछिस, “तोर सेवकमन मोर खेत म काबर आगी लगाय हवंय?”
32 अबसालोम ह योआब ले कहिस, “देख, मेंह तोर मेर ये कहे बर मनखे पठोय रहेंव, ‘इहां आ कि मेंह तोला राजा करा ये पुछे बर पठोवंव, “मेंह गसूर ले काबर आयेंव? बने होतिस कि मेंह अब तक उहेंच रहितेंव!” ’ एकरसेति अब मेंह राजा के दरसन करे चाहत हंव, अऊ यदि मेंह कोनो बात के दोसी अंव, त ओह मोला मार डारय।”
33 तब योआब ह राजा करा गीस अऊ ओला ये बात बताईस। अऊ राजा ह अबसालोम ला बलाईस, अऊ ओह राजा करा गीस अऊ ओकर आघू म भुइयां म मुहूं के बल गिरके ओला दंडवत करिस। अऊ राजा ह अबसालोम ला चूमिस।
<- 2 समूएल 132 समूएल 15 ->- a लगभग 2.3 किलोग्राम
Languages