1 संतमन बर जऊन सेवा करे जाथे, ओकर बारे म तुमन ला लिखे के जरूरत नइं ए। 2 काबरकि मेंह जानथंव कि तुमन मदद करे बर उत्सुक रहिथव अऊ मेंह मकिदुनिया के मनखेमन के आघू म तुम्हर बारे म डींग हांकके ये कहे हवंव कि पऊर साल ले तुमन, जऊन मन अखया म रहिथव, मदद करे बर तियार हवव अऊ तुम्हर उत्साह ह ओमा के बहुंते झन ला उत्साहित करे हवय। 3 पर मेंह ये भाईमन ला एकरसेति पठोवत हवंव ताकि ये बिसय म तुम्हर बारे, हमन जऊन घमंड करे हवन, ओह लबरा साबित झन होवय, पर जइसने मेंह कहे हवंव, तुमन तियार रहव। 4 काबरकि यदि कोनो मकिदुनिया के मनखे ह मोर संग आथे अऊ ये देखथे कि तुमन तियार नइं अव, त हमन तुम्हर बारे म कुछू कहे नइं सकबो, अऊ तुम्हर ऊपर अतेक भरोसा करे के बाद हमर बेजत्ती होही। 5 एकरसेति, मेंह भाईमन ले ये बिनती करई जरूरी समझेंव कि ओमन पहिली ले तुम्हर करा जावंय अऊ ओ दान के परबंध करंय, जऊन ला तुमन देय के वायदा करे हवव। तब येह दबाव म दिये गय दान नइं, पर उदार मन ले दिये गय दान होही।
12 तुम्हर ये सेवा के कारन, परमेसर के मनखेमन के सिरिप जरूरत ही पूरा नइं होवत हवय, पर कतेक किसम ले बहुंतायत ले परमेसर के धनबाद घलो होवत हवय। 13 ये सेवा के दुवारा तुमन अपनआप ला साबित कर चुके हवव, एकरसेति मनखेमन परमेसर के महिमा करहीं, काबरकि तुमन मसीह के सुघर संदेस ला गरहन करके ओकर मुताबिक चलत हवव अऊ दिल खोलके तुमन ओमन ला अऊ आने जम्मो झन ला दान देवत हवव। 14 ओमन तुम्हर बर पराथना करथें अऊ ओमन के मन ह तुमन म लगे रहिथे, काबरकि परमेसर के अनुग्रह तुम्हर ऊपर बहुंतायत ले होय हवय। 15 परमेसर के धनबाद होवय ओकर ओ दान खातिर, जेकर बयान नइं करे जा सकय!
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