12 एकोलाने नेम सुध्द हैं, अर आदेस भी उचित अर अच्छो हैं। 13 ते का उ ते अच्छो हतो, मोरो लाने मरनू रयो? असो नी! पर पाप ओकी अच्छी चीज ख व्दारा मोरो लाने माऊत ख पैदा करनवालो भयो कि ओको पाप होन दिखनू हो, अर आदेस को व्दारा पाप ही पाप मय रहे!
14 हम जाना हैं कि नेम ते आत्मिक हैं, पर म सारीरिक अर पाप ख हात बिक हुयो हैं। 15 जो म करूँ हैं ओ ख नी जाना: काहेकि जो म चाहूँ हैं नी कियो करूँ पर जेसे मोखा गुस्सा आय हैं उ करूँ हैं। 16 पर जो म नी चाहूँ हैं कि ऊईच करूँ हैं ते म मान लियो हैं कि नेम अच्छो हैं। 17 ते असो मजबुरी म ओकी करन वालो म नी, पर पाप हैं जो मोखा म बठो भयो हैं। 18 काहेकि मी जानू हैं कि मोखा म असो कि मोरो सरीर म कुई अच्छी चीज भीतर नी करिये। इच्छा ते मोखा म हैं, पर अच्छो काम मोखा से बन नी पड़ आय। 19 काहेकि जसो अच्छो काम कि मी इच्छा करूँ हैं उ ते नी करूँ हैं, पर जे ख बुराई कि इच्छा नी कर हैं उही कियो करूँ हैं। 20 अब अदि म उही करूँ हैं जेको इच्छा नी करूँ हैं, ते ओको करनवालो म नी रय्हो, पर पाप जो मोखा म बठो भेयो हैं।
21 यी तरीका म यी नेम पायो हैं कि अब दया करन कि अच्छो करा हैं, ते बुराई मोरो नजीक आव हैं। 22 काहेकि मी अंदर अदमीत्व से ते परमेस्वर कि नेम से बेजा खूसी[a] रह हैं। 23 पर मोखा अपनी आग हुन म दूसरो तरीका को नेम दिखई पड़ह हैं, जे मोरो समझ को नेम से लड़ह हैं अर मोखा पाप को नेम ख बन्धन म डालो हैं जो मोरो आग हुन म हैं। 24 मी कसो अभागो अदमी हूँ! मोखा यी मरन का सरीर से कोन छुड़ा हे? 25 हमारो प्रभु यीसु मसी को व्दारा परमेस्वर को धन्यवाद हो। एकोलाने म स्वंय दिमाक से ते परमेस्वर को नेम ख, पर सरीर से पाप कि नेम को सेवा करूँ हैं।
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