1 फिर ओ न मो ख बिल्लोउर कि सी झलकती हुई, जीवन को पानी की नद्दी दिखी, जो परमेस्वर अर मेम्ना को सिंहासन से निकल ख 2 उ सहर को बीचो बीच बहत रहा। नद्दी को एनो पार अर ओ नो पार जीवन को झाड़ हतो; ओमा बारा तरीका को फल लगत रहा, अऊर उ बारा महीना फरत रहा: अर झाड़ को पत्ताहुन से जाति-जाति ख अदमी[a] अच्छा होत रहा। 3 फिर स्राप नी होन को, अर परमेस्वर अर मेम्ना को सिंहासन उ सहर म होयगो।
7 “देख मी तुरत ही आन वालो हैं! धन्य हैं उ, जो या किताब की भविस्वानी की बात हुन ख माना हैं।”
8 मी उईच यूहन्ना आय, जो असी बात हुन सुना हैं अर देखत रहा। जब मीना सुना अर देख्यो, ते जो स्वर्ग दूत मोखा असी बात हुन दिखात रहा, मी उनको पाय हुन पा पड़न को लाने गिड पड़यो। 9 पर ओ ना मोसे कय्हो, “देख असो मत करा; काहेकि मी तोरो, अर तोरा भई भविस्यवक्ता हुन, अर या किताब कि बात हुन ख मानन वाला को संगी दास आय। परमेस्वर ही ख दण्डवत कर।” 10 फिर ओ ना मोसे कय्हो, “या किताब कि भविस्यवानी की बात हुन ख बंद मत करा; काहेकि बखत नजीक आयो हैं। 11 जो बुरो करा हैं उ बुरो ही करते रैय; अऊर जो मलीन हैं, उ मलीन बनो रैय; अर जो धर्मी हैं उ धरमी बनो रैय; अर जो सुध्द हैं: उ सुध्द बनो रैय।”
12 “देख मी तुरत ही आन वालो हैं; अर हर एक को काम को अनुसार बदला देन को लाने एक एक फल मोरो जोने हैं। 13 मी अलफा अर ओमेगा, पहेलो अर आखरी, सुरूवात अर आखरी आय।”
14 धन्य वी हैं, जो अपना कपड़ा धो लेवा हैं, काहेकि उनका जीवन को झाड़ को जोने आन को अधिकार मीलेगो, अर वी फाटक से होका सहर [b]म भीतर जाएगो। 15 पर कुत्ता, अर टोना हुन, अर चोरी-छिनाला[c] अर हत्यारा अर मूर्ति ख पूजनवाला, अर हे एक झूट का चाहनवालो अर गढ़नवालो बाहर रहेगो।
16 मी खुद यीसु न अपनो स्वर्गदूत ख एकोलाने भेज्यो कि तुमरो आगु कलेसिया हुन को बारे म असी बात हुन की गवाही दे। मी दाऊद को मूल अर वंस, अर भुसारो को चमकन वालो तारा आय। 17 आत्मा अर दुलन दोई कहाँ हैं, “आ!” अर सुनन वालो भी बोले, “आ!” जोका प्यास लगी होय उ आय, अर जो ख लगा हैं जीवन को पानी फिरी[d] म ले।
20 जो या बात कि गवाही देवा हैं उ असो कहाँ हैं, “हाँ मी तुरत ही आन वालो हैं।” आमीन। अरे प्रभु यीसु जल्दी आ!
21 प्रभु यीसु की दया सुध्द अदमी हुन को संग होती रैय। आमीन।
<- प्रकासितवाक्य 21
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