1 एक रोज तब कर लेन वालो अर पापी ओके पास आयो कर हते। ताकि ओकी सुने। 2 पर फरीसी अर सासतिरी कुड़कुड़ा ख कहन लगिया, “यू ते पापी हुन से मिलत हैं अर उनका संग खात भी हैं।” 3 ऐ पर यीसु न उन ख यू उदाहरन सुनायो:
4 “तुम म से कोन हैं जेको सव भेड़ हो, अर ओमा से एक भटक जाए, ते तुम निन्यानवे का जंगल म छोड़कर, उ खोई का जब तक मिल नी जाए ओको खोजतो नी रहे? 5 अर जब मिल जात हैं, ते उ बड़ो खुसी से ओ ख कंधे पर उठकर लेख हैं; 6 अर घर म आकर दोस्तहुन अऊर पड़ोसी हुन का इकठ्टा कर ख कहत रह, ‘मोरो संग आनन्द करो, काहेकि मोरी खोई हुई भेड़ मिल गई हैं।’ 7 मी तोसे कहू हैं कि असो तरीका से एक मन फिरान वालो पापी को बारे म भी स्वर्ग म इत्तो ही खुसी होय, जितनो कि निन्यानवे असा धर्मी हुन को बारे म नी होवा, जिन्हे का मन फिरानू की आवस्यकता नी।
20 तब उ उठकर, अपनो बाप का नजीक चलो गयो: उ अभी दुर ही हतो कि ओखा बाप न ओ ख देखकर तरस खायो, अर दऊड ख ओ ख गले लगायो, अर बेजा चुमियो। 21 पोरिया न ओसे कय्हो, पिता जी, मी न स्वर्ग का विरोध म अर तोरी नजर म पाप कियो हैं अर अब इ योग्य नी रह गयो कि मी तोरो पोरिया कहलाऊँ। 22 परन्तु पिता न अपनो दासो से कय्हो, जल्दी से चोक्खो से चोक्खो कपड़ा निकालकर ओ ख पहिना, अर ओको हात म अँगूठी, अऊर पाय म जूता पहिनायो, 23 अर पलो हुओ बच्छा लाकर मारियो ताकि हम ओ ख खाएँ खुसी मनाए। 24 काहेकि मोरो यु पोरिया मर गयो हतो, फिर से जिन्दो हो गयो हैं खो गयो हतो, अब मिल गयो हैं अऊर वी खुसी करन लगो।
25 “परन्तु ओको बड़ो पोरिया खेत म हतो। जब उ आते हुए घर को नजीक पहुँचे, तो ओ न गान-बजानो अर नाचन वाले का आवाज सुनाई दियो। 26 अत: ओ न एक सेवक का बुला ख पुछियो, ‘यू का हो रहे हैं?’ 27 ओ न ओसे कय्हो, ‘तोरो भई आयो हैं, अर तोरो पिता न पलो हुओ बच्छा को कटवायो हैं एकोलाने कि ओ ख भलो चंगो पायो हैं।’ 28 यु सुन कर उ गुस्सा से भर गयो अर भीतर जान नी चाहे, पर ओको बाप बाहर आय का ओ ख मनान लगियो। 29 ओ न पिता को उत्तर दियो, ‘देख मी इतनो साल से तोरी सेवा कर रयो हूँ’ अऊर कभी भी तोरी आग्या नी टाली, तोभी तू न मोखा कभी ‘एक भी बकरी को बच्चा भी नी दियो कि मी अपनो दोस्त हुन का संग खुसी करूँ हैं।’ 30 पर जब तोरो यू पोरिया, ‘जेना तोरी धन-दऊलत रंडी बाजी म उडा दी हैं, अर आयो, ते ओके लाने तू न पलो हुओ बच्छा कटवायो।’ 31 ओ न ओसे कय्हो, ‘पोरिया, तू सदा मोरो संग हैं; अर जे कुछ मोरो हैं उ सब तोरो ही हैं। 32 पर अब आनन्द करनो अर मगन होन चाहिए, काहेकि यू तोरो भई मर गयो हते, ते जिन्दो गयो हैं; खो गयो हतो, अब मिल गयो हैं’।”
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