1 काहे कि नेम जे म आँवन वाली भली चीज को प्रतिबिम्ब्र हैं पर उन को असली रूप नी, ऐको लाने वी एक ही प्रकार को बलि को व्दारा जेय हर साल उत्तम अच्छो चड़ाए जावा हैं, जोने आँवन वालो ख कभी भी सिध्द नी कर सकह। 2 अदि असो हो पावा ते का उन को ते उन को बलि चढ़ानो बन्द काहे नी हो जाय? काहेकि फिर ते सेवा करन वालो एक ही बार म हमेसा हमेसा को लाने सुध्द होय जावह हैं। अऊर अपनो पाप हुन को लाने फिर कभी खुद ख अपराधी नी समझा। 3 पर उन को व्दारा हर साल पाप ख याद दिलायो जावह हैं। 4 काहे कि यू अनहोनी हैं कि बईल अर बकरा हुन को खून पाप ख दुर करहे असो सम्भव नी हैं।
5 ऐको लाने जब यीसु यू दुनिया म आयो थो ते ओ न कहयो थो:
8 ओ न पहलो कहयो थो, “नी तू न बलि अर भेट अर घर की बलि अर पाप बलि ख ते तू चाहवा हैं,” अर नी ही तू उन न खुस हुओ, लेकिन (यघपि) यू बलि तो नेम को हिसाब से चढायो जावा हैं। 9 अऊर उसी बखत याहा कहव हैं, “देख मी आय गयो हैं, ताकि तोरी इच्छा पुरी करुँ,” अत: वी पहिलो को उठा देवह हैं, तेकी दुसरो ख नियुक्त करे। 10 सो परमेस्वर की इच्छा से एक बार ही हमेसा हमेसा को लाने यीसु मसी को सरीर को बलि दान को दुवारा हम सुध्द कर दियो गयो।
11 हर याजक एक दिन को बाद दुसरो दिन खडो हो ख अपनो भक्ती हुन को काम हुन ख पुरो करह हैं। उ बार-बार एक जसी ही बलि हुन चढ़ावा हैं जे पाप हुन ख कभी दुर नी कर सकह हैं। 12 ते याजक को जसो म मसी ते पाप हुन को लाने हमेसा को लाने एक ही बलि चढ़ाय आय ख परमेस्वर को जेवनो हात तरफ जा ख बठयो, 13 अर वईच बखत से ओ ख अपना बैरी हुन ख ओको; पाय को नीचु को पीढ़ी बना देन को इन्तजार हैं। 14 काहे कि ओ न एक ही बार बली को दुवारा, जे सुध्द होते जा रया हैं, उन ख सदा हमेसा को लाने पूरो सुध्द कर दियो।
15 अर सुध्द आत्मा भी हम ख यही गवाही देवह हैं, काहे की ओ न पहले कय्हो रहा,
17 फिर उ असो कहा हैं, “मी उनका पाप हुन ख अर उनका अधर्म का काम हुन ख फिर कभी याद नी करन को।” 18 जब पाप हुन कि माफी मिल गई हैं, ते फिर पाप हुन को लाने बली चढ़ान कि जरूत नी राई।
26 काहेकि सही को ग्यान मिल जान को बाद भी अदि हम जान बूज ख पाप करते रहवा हैं, ते पाप की माफी को लाने फिर कोई बलिदान बाकी नी हाय। 27 एक भयानक धुन बाकी रह जावा हैं न्याव की, अर एक भयानक आँग की, जो बैरी हुन ख सिदो ही गील लेन कि सोचा हैं। 28 जे कोई मूसा को नेम को पालन करनो से मना करा आय, ओखा बीना दया को दो या तीन गवाह हुन कि गवाही पर मार ड़ालो जाय हैं, 29 ते सोच ल कि वी कितना अर भी भारी सजा को लायक ठहरोगो, जे न परमेस्वर को पोरिया ख पाय से खुन्दियो अर वाचा को खून ख, जेको दुवारा उ सुध्द ठहरायो गयो रहा, असुध्द जान्यो हैं, अर दया कि आत्मा ख बेज्जती करियो हैं। 30 काहेकि हम ओ ख जानह हैं, जे न कहयो, “पलटा लेनो मोरो काम हैं, मीइच ही बदला लेहूँ।” अर फिर यु, कि “प्रभु अपनो इंसान हुन को न्याय करेगों,” 31 कोई पापी को जिन्दा परमेस्वर को हात म पड़ जानो एक भयानक बात हैं।
32 तुम इंसान वी बितीया वाला दिन हुन ख याद करो जब तुम ख उजेरो मिलन को तुरत बाद वा, बडी दु: ख मूसिबत संघर्स भोगनो को बाद समना करते हुए, मजबूती से डटिया रहे। 33 कभी ते सब अदमी हुन को सामे तुम ख अपमान अऊर अत्याचार सहनो पड़ो अऊर कुछ अदमी हुन ख असी बेदसा म पडिया वाला को संग सामिल होनू पडो। 34 अपनो कैदी को अदमी हुन को संग दुख म उनको दुख बाटो अऊर जब तुम्हारो धन सम्पत्ति ख कबजा कर लियो ते अपनो अपनो म जे हानि हुओ हैं ओ ख खुस हो ख मान लियो काहेकि वी जानत रह की हमारो जाने अबा भी कुछ पैसा अऊर जमीन जाजायद हैं जे हमेसा को लाने रहे। 35 एकोलाने तुम लोग अपनो भरोसा अऊर धैर्य छोडो ऐको पुरस्कार महान हैं। 36 तुम इंसान हुन ख धीरज धरनो जरुरी हैं, जेसे परमेस्वर कि इच्छा ख पुरी करन को बाद तुम ख उ मिल जाये जेको वादा परमेस्वर कर चुक्यो हैं। 37 जसो कि धर्म सास्र म लिखो,
39 पर हम वी इंसान हुन म से नी आय, जो पिच्छु हटन को वजे से नास हो जावा हैं, बल्कि हम वी इंसान हुन म से आय, जे अपनो भरोसा को दुवारा जिन्दगी ख पावा हैं।
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