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पतरस का दुसरा पस्र

पतरस की दुसरी चिठ्टी
भूमिका
2 परतस कि चिठ्टी कहव हैं कि याहा प्रेरित पतरस दुवारा लिखो गयो थो, लेकिन आज कई विध्दान येखा सच्ची नी माना। याहा संभव हैं कि कोई ओर न येखा पतरस की अऊर से लिखो हो। लेखक कहव हैं कि वाहा यीसु की जिन्दगी की ओर जरुरी रूप से रुपान्तरन 1:17-18 खुद हतो। अदि पतरस न चिठ्टी लिखी हती, ते संभव हैं कि ओ न ओ ख रोम म मसी को जनम को 65-69 सालो को बीच, मरन से पहलो लिखो हो। पतरस येखा दुसरी चिठ्टी 3:1 भी कहव हैं, जे 1 पतरस की चिठ्टी को बाद लिखन की तारीक रखह हैं। उन न सभी मसी हुन ख चिठ्टी ख संबोधित करियो।
पतरस न या चिठ्टी विस्वासी हुन ख अच्छी जिन्दगी जीवन को लाने प्रोत्साहित करन अऊर झुटा सिक्छक हुन को अनुसरन नी करन की चेतावनी देवन को लाने लिखो थो। 2 ओ न उन्हे उन लोग हुन ख उपेक्छा करन को लाने प्रोत्साहित करियो जो कह रहया हैं कि यीसु ख वापस आवन म बेजा टइम लग रहयो हैं। ऐको बजाय ओ न बतायो कि परमेस्वर धीमो नी आय बल्कि चाहाव हैं कि हर कोई बचायो जाए। 2 पतरस 3:8-9 याहा एक अच्छी जिन्दगी जीवन को एक वजह हैं। 3:14
रूप रेखा
1. पतरस अपनो परिचय देवा हैं अऊर अपनो पाठको ख संबोधित करह हैं। 1:1-2
2. फिर वाहा उन ख अच्छो जिन्दगी जीवन की याद दिलावा हैं काहेकि परमेस्वर न हमे सक्छम करियो हैं। 1:3-21
3. ऐको बाद वाहा झुठो सिक्छक हुन को खिलाफ चेतावनी देवा हैं अऊर कहव हैं कि अंत म झुटा सिक्छ हुन को का होगा। 2:1-22
4. ऐको बाद पतरस विस्वासी हुन ख यीसु को दुसरो आगमन की तैयारी को लाने अच्छी जिन्दगी जीवन को लाने प्रोत्साहित करते हुओ समाप्त करह हैं। 3:1-17

1
अभिवादन
1 समोन पतरस कि तरफ से, जो यीसु मसी को दास अर प्रेरित आय, वी अदमी हुन को नाम जीन ख हमारो परमेस्वर अर उध्दार देन वालो यीसु मसी कि धार्मिकता को असो हमारो जसो बेजा किमती विस्वास मिल लो हैं।

2 परमेस्वर कि अर हमारो प्रभु यीसु कि चीन्न को असो दया अर सान्ति तुम म बेजा जादा से बढ़ती जाहे।

परमेस्वर कि पुकार अर चुनाव
3 काहेकि ओकी परमेस्वर सक्ति न सब कई जो जिन्दगी अर भक्ति से नाता[a] रखह हैं, हम ख ओकी ही पहचान को दुवारा दियो हैं, जेना हम ख ही महिमा अर सद्गुन को जसो बुलायो हैं। 4 जीन को व्दारा ओ ना हम ख बेजा किमती अर बेजा ही बडो प्रतिग्या दियो हैं: काहेकि इनको व्दारा तुम वा सड़ाहट से छोड़ ख, जो दुनिया म बुरी लोभ हुन से होय हैं, परमेस्वर व्यवहार को संगी दार हो जा। 5 एको लाने तुम सब तरीका को कोसिस कर ख अपनो विस्वास पर सद्गुन, अर सद्गुन पर समझ, 6 अर समझ पर सहन कि सक्ति, अर सहन कि सक्ति, अर धीरज पर भक्ति, 7 अर भक्ति पर भई चारा कि इच्छा पर प्रेम बढ़ते जा। 8 काहेकि अदि यी बात हुन तुम म अभी रहे अर बढ़ती जाहे, ते तुम ख हमारो प्रभु यीसु मसी कि पहचान म बेकार अर निस्फल नी होन दे हे। 9 काहेकि जे म यी बात हुन नी आय, उ अंधो आये अर धुँधलो देखह हैं, अर अपनो पिछलो पाप हुन धोखा ख सुध्द होन को लाने भूल बैठो हैं।

10 ऐको लाने अरे भई बहिन हुन, अपनो बुलायो जान ख, अर चुन लियो ख जान ख सिधो करन ख अच्छी रिती कोसिस करते जाओ, काहेकि अदि असो करेगों ते सदा[b] को लाने ठोकर नी खाऐगो; 11 यानी यू ही रिती से तुम हमारो प्रभु अर मुक्ति देन वालो यीसु मसी कि आखरी म स्वर्ग राज म बड़ो सम्मान को संग अंदर आन पा हे।

पतरस को आखरी बखत
12 एको लाने अगर तुम यी बात हुन मालूम हैं, अर जो सच वचन तुम ख मिल्यो हैं ओ म बनो रह, तेबी मी तुम ख यी बात हुन कि परखन जानन को लाने हमेसा तैयार रहूंगो। 13 मी यू अपनो लाने उचित समझू हैं कि जब तक मी यी डेरा म हूँ, तब लक तुम ख परख-परख ख दिला ख उभारता रहू। 14 एको लाने यू जानू आय कि मोरो डेरा को गिरायो जानो को बखत जल्दी आवनवालो हैं, जसो कि प्रभु यीसु मसी न मो ख पर प्ररगट कियो हैं। 15 एको लाने मी असो कोसिस करूँगो कि मोरो कुछ जाने को बाद तुम इन सब बात हुन को हमेसा याद ख सक हैं।
मसी कि संगति कि आँखी देखी गवाही
16 काहेकि जब हम न तुम ख अपनो प्रभु यीसु मसी कि सक्ति ख अर आखरी बखत म आन को बारा म बता दियो हतो, ते हुसयार[c] से गढ़ी भई कायनी हुन को अनुकरण नी हतो असो कि हम न खुद ही ख ओखा घमण्ड ख देखो हतो। 17 काहेकि जब ओ न परमेस्वर बाप से सम्मान अर स्तुति मिली हैं अर उ घमण्ड हुन महिमा म से यू आवाज आई, “यू मोरो प्यारो पोरिया आय, जेस मी खुसी हूँ।” 18 तब हम न ओखा संग सुध्द टेकड़ा पर हते अर स्वर्ग से यही आवाज आती सुनी हैं।

19 हमारो नजदीक जो भविस्य बतान वाला हुन को वचन आय, उ यी घटना हुन से कड़क खड़ो रयो। तुम यू चोक्खो करिये हैं जो यू समझ ख ओ ख पर ध्यान करिये हैं, कि उ एक दिया हैं, जो अन्धियारा जगह म ओ ख बखत लक उजाला दे देव रह हैं जब लक कि दिन नी निकले अर सुबह को तारा तुमारा मन हुन म नी चमक उठे। 20 पर पहलो यू जान ले कि सुध्द सास्र कि कोई भी भविस्य वानी कुई को अपनो ही सलाह धारा को आधार पर पूरो नी होए। 21 काहेकि कुई भी भविस्य वानी अदमी कि इच्छा से कभी नी भई, पर भक्त दास हुन सुध्द आत्मा को व्दारा उभारे जा ख परमेस्वर कि तरफ से बोलते हते।

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