1 हम जे परमेस्वर को संग काम करन होन का नात से हम हुन तुम अदमी हुन से यू विनती करू हैं कि परमेस्वर कि जे किरपा तुम ख मिली हैं, ओ ख बेकार नी होन दे। 2 काहेकि उ ते बोल हैं,
3 हम कोई बात म धोखा खान को कोई भी मऊका नी देव काहे कि हमारी सेवा पर कोई आरोप[a] नी हैं। 4 अऊर हम हर बात से परमेस्वर का दास हुन को सामने अपनो चोक्खो गुण हुन ख परगट करिये हैं, बड़े धीरज से, दुख अर से, दुरदसा से, संकट हुन से, 5 हम ख मर खात से, जेल होना से, कल्ला से, महेनत से, जागते रहनो से, उपास करन से, 6 हम न अपनो अच्छो से, ग्यान से, धीरज से, दयालु से, सुध्द आत्मा से, सच्चो प्रेम से, 7 सच्चो को वचन से, परमेस्वर कि सक्ति से, धर्मी को हथियार से जो जेवनो बाएँ हात हुन म हैं, 8 इज्जत अर अपमान से, प्रसंसा अर बुराई यी सब हम ख मिलो हुयो। पाखंडी समझा गयो हैं, तब हम ख सच्चो कहनो हैं; 9 अनजान अदमी हुन को जसो हैं तेबी बड़ाई सम्मान[b] (प्रसिध्द) हैं; मरिया हुयो को जसो हैं अर देखो जिन्दो हैं; मार खान वाला को जसो हैं पर जान से मारो नी जाय हैं;[c] 10 हम ते सोक करन वाला को जसा हैं पर हमेसा खुस रह हैं गरीब हुन का जसा हैं पर बेजा हुन को धनी[d] बना देव हैं; असा हैं जसो हमारो जोने कुछ नी हाय तेबी सब कुछ रखो हैं।
11 अरे कुरिन्थुस नगर का रहन वाला हम न तुम लोग हुन से खुल ख बात हुन करी हैं, हम न तुमारो सामने अपनो मन खोल ख रख दियो हैं। 12 तुमारो लाने हमारो प्यार कम नी हुओ नी हैं, पर तुमारो ही मन हुन म सक हैं। 13 पर अपना पोरिया समझ ख तुम से कहूँ हैं कि तुम भी ओखा बदला म अपनो मन खोल दे।
17 एकोलाने प्रभु बोल हैं,
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