1 मी न अपनो मन म यू निर्नय लियो हतो कि फिर तुमारो नजीक नाराज करन नी आऊ। 2 यदि मी तुम ख दुख करू हैं, ते मो ख खुसी देन वालो कोन होय, अकलो उही जे ख मी न दुख कियो? 3 अऊर मी न यू बात तुम ख एकोलाने लिखो हैं कि कही असो नी हो कि मोरो आवन पर, जो न मो ख खुसी मिलनो चाहिए मी न ओसे नाराज होऊ; काहेकि मो ख तुम पूरा झन पर यू बात को विस्वास हैं कि जो मोरो खुसी हैं उही तुम पूरा झन ख भी आय। 4 बड़ो दु: ख अऊर मन को मुसीबत[a] से मी ना बेजा सा आसू बाहा ख तुम ख लिखो हतो, एकोलाने नी कि तुम नाराज हो पर एकोलाने कि तुम उ बडो प्रेम ख जान ले, जो मो ख तुम से हैं।
14 अऊर परमेस्वर को धन्यवाद हो, जो हम ख लगातार मसी कि जीत सफर म लेख चला हैं अऊर हमारो दुवारा अपनो नाम को ग्यान कि सुगन्ध जगह फैलो हैं। 15 काहेकि अदमी चाहे छुटकारा कर रह हैं अर नास हो रयो हैं, हम उनका बीच परमेस्वर का लाने मसी कि सुन्दर सुगन्ध हैं। 16 कई का लाने ते मर का खातिर मरन कि बुरी बास आव हैं, अऊर कितना ख लाने जिन्दगी को खातिर जिन्दगी कि खुसबू अच्छो यू बात हुन को लायक कोन हैं? 17 काहेकि हम उ ढ़ेर सारो ख समान नी जे परमेस्वर को वचन म उलट फेर करा हैं; पर मन कि सच्चाई से अऊर परमेस्वर की ओर से परमेस्वर को उपस्थित जान ख मसी म कह हैं।
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