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प्रशंसा का एक भजन
1 यहोवा की स्तुति करो!
परमेश्वर के पवित्रस्थान में उसकी स्तुति करो;
उसकी सामर्थ्य से भरे हुए आकाशमण्डल में
उसकी स्तुति करो!
2 उसके पराक्रम के कामों के कारण
उसकी स्तुति करो[a];
उसकी अत्यन्त बड़ाई के अनुसार उसकी स्तुति करो!
3 नरसिंगा फूँकते हुए उसकी स्तुति करो;
सारंगी और वीणा बजाते हुए उसकी स्तुति करो!
4 डफ बजाते और नाचते हुए उसकी स्तुति करो;
तारवाले बाजे और बाँसुरी बजाते हुए
उसकी स्तुति करो!
5 ऊँचे शब्दवाली झाँझ बजाते हुए
उसकी स्तुति करो;
आनन्द के महाशब्दवाली झाँझ बजाते हुए
उसकी स्तुति करो!
6 जितने प्राणी हैं
सब के सब यहोवा की स्तुति करें[b]!
यहोवा की स्तुति करो!
<- भजन संहिता 149
- a उसके पराक्रम के कामों के कारण उसकी स्तुति करो: यहाँ परमेश्वर के सामर्थ्य को और उसकी सर्वशक्ति को प्रगट करनेवाली बातों का संदर्भ दिया गया है।
- b जितने प्राणी हैं सब के सब यहोवा की स्तुति करें: आकाश पृथ्वी और जल के सब प्राणी। एक विश्वव्यापी स्तुति का उदगार हो केवल संगीत वाद्द्यों से ही नहीं, सब जीवित प्राणी एक साथ उसकी स्तुति करें।