1 हे इस्राएलियों, यह वचन सुनो जो यहोवा ने तुम्हारे विषय में अर्थात् उस सारे कुल के विषय में कहा है जिसे मैं मिस्र देश से लाया हूँ: 2 “पृथ्वी के सारे कुलों में से मैंने केवल तुम्हीं पर मन लगाया है[a], इस कारण मैं तुम्हारे सारे अधर्म के कामों का दण्ड दूँगा।
9 अश्दोद के भवन और मिस्र देश के राजभवन पर प्रचार करके कहो: “सामरिया के पहाड़ों पर इकट्ठे होकर देखो कि उसमें क्या ही बड़ा कोलाहल और उसके बीच क्या ही अंधेर के काम हो रहे हैं!” 10 यहोवा की यह वाणी है, “जो लोग अपने भवनों में उपद्रव और डकैती का धन बटोरकर रखते हैं, वे सिधाई से काम करना जानते ही नहीं।” 11 इस कारण परमेश्वर यहोवा यह कहता है: “देश का घेरनेवाला एक शत्रु होगा, और वह तेरा बल तोड़ेगा, और तेरे भवन लूटे जाएँगे।”
12 यहोवा यह कहता है: “जिस भाँति चरवाहा सिंह के मुँह से दो टाँगें या कान का एक टुकड़ा छुड़ाता है[b], वैसे ही इस्राएली लोग, जो सामरिया में बिछौने के एक कोने या रेशमी गद्दी पर बैठा करते हैं, वे भी छुड़ाए जाएँगे।”
13 सेनाओं के परमेश्वर, प्रभु यहोवा की यह वाणी है, “देखो, और याकूब के घराने से यह बात चिताकर कहो: 14 जिस समय मैं इस्राएल को उसके अपराधों का दण्ड दूँगा, उसी समय मैं बेतेल की वेदियों को भी दण्ड दूँगा, और वेदी के सींग टूटकर भूमि पर गिर पड़ेंगे। 15 और मैं सर्दी के भवन को और धूपकाल के भवन, दोनों को गिराऊँगा; और हाथी दाँत के बने भवन भी नष्ट होंगे, और बड़े-बड़े घर नष्ट हो जाएँगे,” यहोवा की यही वाणी है।
<- आमोस 2आमोस 4 ->- a पृथ्वी के सारे कुलों में से मैंने केवल तुम्हीं पर मन लगाया है: मनुष्य परमेश्वर के जितना अधिक निकट आता है उतना ही अधिक उसका चूकना और परीक्षा में गिरना बुरा होता है, उसको बहुत अधिक कठोर दण्ड मिलता है। परमेश्वर से निकटता अमूल्य है, लेकिन एक महिमामय उपहार है। स्वतंत्र इच्छा के दुरूपयोग के कारण अत्यधिक महान आशीषें सबसे भयानक दुःख में बदल जाती है।
- b जिस भाँति चरवाहा .... छुड़ाता है: जब जंगली जानवरों द्वारा एक जानवर की मृत्यु हो जाए, तो चरवाहे का कर्तव्य था कि वह मृत पशु के कुछ अवशेष मालिक को दिखाए ताकि वह जान सके कि जानवर कैसे मरा। अगर चरवाहा ऐसा करने में असमर्थ हो, तो उसे जानवर के बदले मालिक को भुगतान करना पड़ता था।