1 हे भैइ अरु बहन, मरा मन की अभिलाषा अरु ओका लिये परमेश्वर से मरी प्रार्थना हइ कि वे उध्दार पाए. 2 मी या बात से गवइ दिउस हइ की परमेश्वर कि भक्ति मे का लिये ऱ्हेस हइ पन उनकी भक्ति सच्ची ज्ञान पर नीर्भर नी हइ. 3 क्युकी वे परमेश्वर की धार्मीकता से अजान हुइ, अरु अपनी धार्मीकता स्थापित करण प्रत्यन करी खे परमेश्वर कि धार्मीकता का अधीन नी हुये. 4 मसीह ने व्यवस्था को अन्त पुरो कऱ्यो येका लिये धार्मीकता जो कोय विश्वास रखस हइ उ सही रस्ता मे आस हइ.
14 फिर जेका पर ओने विश्वास नी कऱ्यो, पन जेने उनका पर विश्वास नी कऱ्यो उ मदत का लिये कसो बुलाये जेको संदेश सुन्यो नी उ पर कसो विश्वास कर? अरु प्रचार का बिना कसो सुने फिर संदेश सुननवाला भेज्या नी जाये ते कसो सुसमाचार को प्रचार कर्हे? 15 अरु अगर संदेश भेजे नी जाए, ते कसो प्रचार कर्हे? जसो शास्त्र लिख्यो हइ, “ओका पाय का ही सुवानो हइ, जो अच्छी बात की सुसमाचार सुनस हइ!” 16 पन सब ने उ सुसमाचार पर का नी लगास यशायाह बोलस हइ, “हे प्रभु कोने हमारो समाचार पर विश्वास कऱ्यो हइ?” 17 अरु विश्वास संदेश खे सुन से अरु सुनना से मसीह को वचन से होस हइ.
18 पन मी बोलस हुये खे ओने नी सुन्यो? सुन्यो ते अकुल्य हइ. क्युकी लिख्यो हइ, “ओका शब्द सब पृथ्वी पर, अरु ओका वचन जगत की छोर तक पोच्यो गया हइ.”
19 मी फिर बोलुस हुये खे का इस्राएल नी जानस था?
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