1 फिर यीशु ने आख उठय खे लकपती खे दुन्या दान कि पेटी मे पैसा डालता हुयो देख्यो. 2 अरु यीशु ने एक कंगाल विदवा खे भी ओमे दो सिक्का, डालते हुये देख्यो. 3 तब यीशु ने बोल्यो. मी तुम से सच्ची बोलुस हय कि या गरीब विधवा ने सबसे बडीखे दाल्योस हइ. 4 क्युकी वे सब ने अपनी अपनी बडती मे से दान मे कुछ डाल्योस हइ. पन येने अपनी कमी मे से अपनी सब जीवी का डाली दी हइ.
5 जब खेत्ता दुन्या मन्दिर का बारे मे बोली राथा.कि व्हा कसो अच्छो फत्तर अरु दि वाली चिजहोन से सिगार्यो गयोस हइ. ते यीशु ने बोल्यो. 6 वे दिन आह्ये. जिनमे ह्या सब जो तुम देखस हय.उनमे से ह्या कोय फत्तर पर फत्तर भी नी छुटेह्ये. जो गाड्यो नी जानको.
7 उनने उनका से पुछ्यो. “हे गुरु. यो सब कब हुये? अरु या बात जब पुरी होना पर हुये. ते वा टेम मे का का चिन्ह हुये?”
8 यीशु ने बोलयो. “सावधान र्हेव. कि फसायो नी जानको. क्युकी खुप मरा नाम से अयखे बोल्हे. कि टेम नजीक अय पहुच्योस हइ तुम उनका पिछे नी चली जानु.”
9 जब वाद विवाद अरु दंगो कि बात सुनी. तब घबरय नी जानु. क्युकी इनका पैयले होनो जरुरती हइ. पन वा टेम तुरुत खत्म नी हुये.
10 तब यीशु ने उनका से बोल्यो. जात पर जात अरु राज्य पर राज्य कर्हे. 11 अरु बडा बडा भुकम्प हुये. अरु जगा जगा अकाल अरु माहामारीहोन पडे. अरु बद्दल मे भयकर बात अरु बडा बडा चिन्ह पइदा हुये.
12 पन या सब बात से पैयले वे मरा नामकरण तुमके पकडे. अरु सताया. अरु आराधनालयहोन मे दियो अरु बन्दीगृह मे डाल्हे. अरु राजाहोन अरु राजपल का सामने ली जाह्ये. 13 पर ह्या तुमारी गवाही देन को अवसर हुय जाह्ये. 14 येका लिये अपना अपना मन मे ठानी रख देन को पैयले से उत्तर देन कि चिन्ता नी करण का.
15 क्युकी मी तुमखे असी बात अरु दिमाक दिह्यु. कि तुमारो सब खिलाप सामनो कर खण्डन नी करी सक्हे. 16 अरु तुम्हारा माय बाप अरु भैइ अरु कुटुम. अरु दोस्त्त भी तुम पकडे. ह्या तक कि तुम मे से खेत्ता खे मारी डाल्यो. 17 अरु मरा नामकरण सब दुन्या तरा से बुरो कर्हे. 18 पन तुमारा माथा को एक बाल भी बाको नी होनको. 19 अपना धिरज से तुम अपना जान खे बचाह्ये रखह्ये.
25 “अरु सुरज अरु चान्द अरु तारा को चिन्ह दिखाह्ये अरु पृथ्वी पर. राष्ट्र-राष्ट्र का दुन्या खे फजित हुये. क्युकी वे समुद्र को गरझनो अरु लहेर को पानी लहेर से घबरय जाह्ये.”
26 अरु डर करण अरु जगत पर आनवाली घटनाहोन कि रस्ता देखेते देखते दुन्या खे जान मे जान नी र्हियो क्युकी बद्दल की शक्तीहोन हलय जाह्ये. 27 तब वे इन्सान को बेटा खे सामर्थ्य अरु बडी महिमा का साथ बद्दल पर आते देखे. 28 जब ये बात होन लगी. ते सिधी हुय खे अपनो माथो उप्पर उठानु. क्युकी तुमारो छुटकारो नजीक हुये.
37 उन दिन मे उ मन्दिर मे उपदेश करता थो अरु रात को जैतून नामक पहाड पर रहता थो. 38 अरु फजर खे सब दुन्या ओकी सुनन का लिये मन्दिर मे ओका पास आया करता था.
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