7 तुम तो भोत अच्छा से दौड रा था. अब कोने तोखे रोकी दियो की सच्ची खे नी मान्यो. 8 असो सीख्यो तुमारो बुलानवाला परमेश्वर का तरप से नी. 9 थोडो सो खमीर सब ओसनीआले आटो खे खमीर बयन डारस. 10 प्रभु पर तुमारा विषय मे भरोसो रखस हइ की तुमारो कोय दुसरो विषय नी हुये. पन जो तोखे घबऱ्ये देस हइ, व्हा कोय भी ही हुये खे दण्ड पाए.
11 पन हे भैइ अरु भैइनहोण, अगर मी आज तक भी जसो की कुछ दुन्या समझस हइ की खतना करण को महत्व को प्रचार करस हइ, ते मेखे अब तक सतायो जास हइ तब भी मसीह खे क्रुस को प्रचार करण पइदा हुयो मरा सभी बाधाहोन खतम होनु चास. 12 अच्छो होस की जो तोखे दुखी करस हइ, वे सब रस्ता पर जाये अपनो आंग हि खे काटि डालस.
13 हे भैइ, तुम स्वतंत्रता होन का लिये बुलाया गया हइ. पन असो अपना आप खे स्वतंत्रता आंग का काम का लिये अवसर बन्यो, जब प्रेम से एक दुसरो को सेवक बन्यो. 14 क्युकी सब व्यवस्था ये एक ही बात मे पुरी हुइ जाए हइ, “तु अपना पडोसी से अपना जसो प्रेम रखस.” 15 पन अगर तुम एक दुसरा खे दुख अरु चोट पोचास हइ तुम आपस मे एक दुसरा खे पुरी रीति से खतम करस हइ.
19 आंग का काम व्यभिचार, अपवित्रता, अरु भोग-विलास को काम लुचपन, 20 मूर्तिपुजा, जादुटोनो, शत्रुता, लडनो वाद विवाद, इर्ष्या, घुस्सा, स्वार्थी पन, 21 डाह, मतवालो, लिलाक्रीडा अरु येका जसा अरु-अरु काम हइ, येका विषय मे मी तुम से पैयले से बोली दिउस हुये जसो पैयले बोल्यो भी चुक्यो हुये, की असो असो काम करणवाला परमेश्वर का राज्य को वारिस नी हुये.
22 पर आत्मा को फल प्रेम, आनन्द, शांती, धीरज, कृपा, अच्छो, विश्वास, 23 नम्रता, अरु संयम हइ. असा काम का विरोध मे कोय भी व्यवस्था नी. 24 अरु जो मसीह यीशु को हइ, ओने आंग का ओकि लालसाहोन अरु अभिलाषाहोन समेत क्रुस पर चडय दीयो हइ. 25 अगर हम आत्मा का वजेसे जिन्दो हइ, ते मन का जसो चले भी. 26 हम अभिमानी नी एक दुसरा पर नी चिडचिडानो या एक दुसरा की प्रती नी इर्षा रख.
<- गलतिया 4गलतिया 6 ->
Languages