6 या बात मे कोय अपनो विश्वासी भैइ का प्रती अपराध नी कर्हे या कोय अनुचित काम नी करणू क्युकी ये सब पाप का लिये प्रभु दण्ड दिये कि जसो कि हमने तुम खे बतय चुक्या हइ अरु तुम खे सावधान भी करी चुक्या हइ. 7 परमेश्वर ने हमारो बुलावो अपवित्रता का लिये नी पन पवित्र होन का लिये बुलायो हइ. 8 येका लिये जो कोय शिक्षा खे नकारस हइ उ कोय इन्सान खे नी नकारस हइ बलकी परमेश्वर खे ही नकारस हइ जो अपनी पवित्र आत्मा को प्रदान करस हइ.
9 भैइचारा का बारे मे मेखे कुछ भी लिखन कि जरुरत नी कि मी तुमारा पास कुछ लिखू, क्युकी आपस मे प्रेम रखनो तुम ने खुद ही परमेश्वर से सीख्यो हइ. 10 अरु वास्तव मे तुम अपनी सब मकिदुनी असो ही करस हइ किन्तु भैइहोन हम तुम से असी ही प्रार्थना करस हइ कि असो अधिक करस हइ. 11 अरु जसो हमने तुम खे बतायो हइ, शांती पुर्ण जिवन जिन को उद्देश खे अपना काम खे अपनो जिन का लिये खुद कमा. 12 येका से जो विश्वास नी करस हइ वे तुमारी जिन को ढंग को आदर करस तुम का कोय दुसरा पर नीर्भर नी ऱ्हेनु पडे.
15 पर जो हम खुद खे सिखय रहा हइ कि उ प्रभु शिक्षा हइ अरु जो हम प्रभु का आना तक जिन्दा ऱ्हेस जब हम मऱ्या हइ उनका से आगे नी जाये. 16 क्युकी प्रभु खुद ही स्वर्ग से उतरे. उ टेम पर बडो अवाज हुये खे अरु प्रधान स्वर्गदूत को शब्द को आवाज सुन्यो जायेका अरु परमेश्वर कि पिपडी फुकी जायेका अरु मसीह मे जो मऱ्या हइ, वे पैयले जिन्दा उठे. 17 तब हम जो जिन्दा अरु बच्या ऱ्हीहे, ते उनका सात हवा मे बंद्दल पर उठ्यो लिये जायेका कि आकाश मे प्रभु से मीले, अरु अत: हम हमेशा प्रभु का सात मे ऱ्हीहे. 18 येका लिये यो आवाज का सात एक दुसरा का सात प्रोत्साहित कर.
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