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1 ओळी चो मखे बिल्लौरन जीवनन सारको झलकतेली, जीवनन जलन एक नदी देखाड़्यो, जो यहोवा–भगवान आरू गाड़ गाडरा न राजगाद्दी छे निकळीन, 2 तिनात नगरन विच मा उहवती होती। नंदीन इने पार आरू उना पार जीवनन झाड़को हुता; उका मा बारा भातिन फव लागता हुता, आरू चो हर महने फळतो हुतो; आरू झाङन पान्टा छे जाती जातीन लोगहन वारू हुयसे हुता।

3 ओळी सराप नी होयछे, आरू यहोवा–भगवान आरू गाडरा न राजगाद्दी तिना नगर मा होछे, आरू ओको दास ओकी सेवा करसे। 4 चे उका मुय देखछे, आरू उका नाव तिन्दरा माथा पर लिखलो हुओ होयछे। 5 आरू ओळी रात नी होयछे, आरू तिनुक दिया आरू दाहड़ान विजाळान जरूरत नी होयछे, काहकि पोरबु यहोवा–भगवान तिनुक विजाळो आपसे, आरू चे जलोमका राज करसे।

ईशु मसीह क ओळी पोछो आवनो
6 “ओळी चौ मखे कयो, यी वात विश्वासयोग्य आरू सत्य छे। आरू पोरबु ने जो भविष्यव्दाक्ता न आत्माओ क यहोवा–भगवान छे, आपसा सोरगदूत क अतरान करीन मुकल्यो कि आपसा दास न क वो वात, जो छाटलो होयणो छे वो देखाङे।”

7 “आरू देख, हाव छाटुत आवने वाळु छे; सयालो छे चे जो इनी किताबन ओगळायती वात क मानता छे।”

8 हाव त्योत् यहुन्ना छे जो यी वात सोमळता आरू देखता हुता। आरू जव हाव सुन्यो आरू देख्यो, ती जो सोरगदूत मखे यी वात देखाङतो हुतो, हाव ओको वंदने क पाय पड़्यों। 9 ओळी चो मखे कयो, “देख, असो मा करे; काहकि हाव तारा आरू तारा भाईस कागळिया न क आरू इनी किताब न वात क मानने वाळा न संगी दास छे, यहोवा–भगवानन आराधना कर।” 10 ओळी चो मखे कयो, “इनी किताबन अगवायती वात क बंद मा करे; काहकि टेहाव साते छे। 11 जो अन्याय करे चो अन्याय करतो रये; आरू जो हावळव्यो छे चो मेळन्यो बनलो रये; आरू जो न्यायी सी, चो बनलो रये; आरू जो चुखलो छे, चो चुखलो बनलो रये।”

12 देख, हाव छाटोत् आवने वाळो छे; आरू हर एक क ओको कामन अनसारे बदलो देने जुगु तेरो फोव मार पास छे। 13 [a]“हाव अल्फा आरू ओमेगा, पेहलो आरू आखरी, शुरू आरू सेवलो छे।”

14 सयालो छे चे जो आपसा चोगला धुयलेय, काहकि ओको जीवनन झाड़को क साते आवनेन हक जोड़छे, आरू चे झोपला मा सी भरायछे। 15 पर टोना करनिया, व्यभिचारी, हत्यारा, मुर्ती पुजा करने वाळा, ओळी भातिन झुठ बुलने वाळा क वाटे तिना आगठा तलाव मा रयछे।

16 “हाव ईशु म्हारा सोरगदूत क एका करता मोकळ्यो, की तुमरे ओगळ मंडळीन बारा मा इनी वातन गवाय देय। हाव दाऊदन मुव आरू ओवलियाद, आरू भोळ भाकान चमकने वाळो तारो छे।”

17 आरू आत्मा, आरू लुगाई दुयू कयती छे, “आव!”

आरू सोमळने वाळो भी कये “आव!”
आरू जो तिसलो होय, चो आवे आरू जो कोय चाहे चो जीवनन पानी फिरी मा लेय।
चेतावनी
18 हाव आखा क, जो जीवनन किताबन ओगळायती वात क सोमळे, आरू गवाय देयो: यदि कोय मानुस इनी वात मा काहय बढ़ावे ती यहोवा–भगवान तिनी पीङा क जो इनी किताब मा लिखली छे, तिना पर बढावछे। 19 आरू यदि कोय इनी ओगळायती वातन किताब मा सी काहय निकाळ देय, ती यहोवा–भगवान तिना जीवनन झाड़को नगर मा सी जेरो वात किताब मा छे, उको वाटो निकाळ देसे।

20 जो इनी वातन गवाय देय, चो यो कये, “हाव, हाव छाटलो आवने वाळो छे। आमेन। ए पोरबु आव!”

21 पोरबु ईशुन दया चुखलो लोगहन क साते रये। आमेन।

<- प्रकाशितवाक्य 21